वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
सीआरआईटी और आईआईएफटी ने व्यापार वार्ता पर तीन दिवसीय अभिमुख पाठ्यक्रम का आयोजन किया
पाठ्यक्रम का विशेष ध्यान उभरते वैश्विक व्यापार मुद्दों, डब्लूटीओ फ्रेमवर्क, विवाद निपटान और व्यापार वार्ताओं के विशेष क्षेत्रों पर था
प्रविष्टि तिथि:
01 OCT 2026 8:58PM by PIB Delhi
नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनुसंधान केंद्र (सीआरआईटी) ने भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), नई दिल्ली के सहयोग से 28 से 30 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में व्यापार वार्ता पर तीन दिवसीय अभिमुख पाठ्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यापार वार्ता से जुड़ी प्रमुख अवधारणाओं, संस्थाओं और समकालीन मुद्दों का संक्षिप्त विवरण प्रदान किया।
पहले दिन के अकादमिक कार्यक्रम में "उभरता विश्व व्यापार परिदृश्य: चुनौतियां और अवसर तथा व्यापार सिद्धांत की मूल अवधारणाओं का परिचय", "डब्ल्यूटीओ का परिचय" और डब्ल्यूटीओ मुद्दों पर एक पैनल चर्चा सत्र शामिल थे।
दूसरे दिन "श्रम/पर्यावरण/स्थायित्व और व्यापार", "व्यापार समझौतों का कानूनी विश्लेषण और संधि व्याख्या", "व्यापार विश्लेषण/व्यापार डेटाबेस" और "विवाद निवारण" पर सत्र आयोजित किए गए।
तीसरे दिन, प्रतिभागियों ने विशेष विषयों में भाग लिया। विषय I में "व्यापार समाधान", "मूल का नियम" और "गैर-शुल्क उपाय (एनटीएम)" शामिल थे, जबकि विषय II में "बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर)", "डिजिटल व्यापार" और "सेवाएं" पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम समापन सत्र के साथ संपन्न हुआ, जिसमें सीटीआईएल के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. जेम्स जे. नेडुमपारा, जिन पर सीडब्ल्यूटीएस के प्रोफेसर और प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार भी है, का समापन संबोधन; आईआईएफटी के कुलपति डॉ. के. रंगराजन का मुख्य भाषण और अपर सचिव, वाणिज्य विभाग, श्री अमिताभ कुमार का विशेष भाषण शामिल था। सीडब्ल्यूटीएस के प्रोफेसर और सीआरआईटी के एडमिन प्रमुख डॉ. मुरली कलुम्माल ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा, इसके बाद प्रमाणपत्रों का वितरण हुआ।
अपने विशेष संबोधन में, श्री अमिताभ कुमार ने जीडीपी वृद्धि के समर्थन में व्यापार की भूमिका पर जोर दिया और बताया कि व्यापार पेशेवरों को एक बढ़ते जटिल वैश्विक व्यापारिक माहौल में आगे बढ़ने की आवश्यकता है, जिसमें नव-वाणिज्यवादी दृष्टिकोण और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) व यूरोपीय संघ वनों की कटाई विनियमन (ईयूडीआर) जैसे उपाय शामिल हैं। उन्होंने 1991 के बाद भारत के आर्थिक सुधारों और 1995 में डब्लूटीओ में शामिल होने का संदर्भ देते हुए, वस्तुओं से अलग सेवाओं, बौद्धिक संपदा अधिकार और सतत विकास से संबंधित मुद्दों तक बहुपक्षीय व्यापार नियमों के व्यापक क्षेत्र को उजागर किया और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने में सीआरआईटी पहल की सराहना की।
तीन दिनों के पाठ्यक्रम ने प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली और व्यापार वार्ता की संरचना युक्त समझ प्रदान की, जिसमें मूलभूत अवधारणाएं और डब्लूटीओ फ्रेमवर्क, आधुनिक व्यापार के आर्थिक, कानूनी और नीतिगत आयाम शामिल थे। विशेष सत्रों ने उभरते वैश्विक व्यापार परिदृश्य से संबंधित प्रमुख वार्ता क्षेत्रों में भी अंतर्दृष्टि प्रदान की।


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पीके/केसी/आरटी/जेके
(रिलीज़ आईडी: 2318033)
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