रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
'स्वच्छता ही सेवा' अभियान में उर्वरक विभाग की रचनात्मक भागीदारी
'कबाड़ से कला' के जरिए कर्मचारियों को नवाचार के लिए किया जा रहा प्रोत्साहित
कार्मिकों की रचनात्मक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान
प्रविष्टि तिथि:
22 SEP 2026 5:54PM by PIB Delhi
उर्वरक विभाग द्वारा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाए जा रहे स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) अभियान – 2026 को गति देते हुए आज विभाग में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक श्री कुंतल सेन शर्मा (वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार), उर्वरक विभाग की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में उर्वरक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, उर्वरक उद्योग समन्वय समिति (एफआईसीसी) के प्रतिनिधियों सहित सभी उर्वरक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू), सहकारी समितियों और संयुक्त उद्यम/निजी उर्वरक कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन, प्लांट प्रमुखों और नामित स्वच्छता नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य 17 सितंबर से शुरू हुए 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के प्रारंभिक चरण के प्रभावों का आकलन करने के साथ विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता को बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान से जोड़ना रहा।
अभियान के 5 प्रमुख वैचारिक स्तंभ:
समीक्षा बैठक के दौरान वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार ने 11 निर्धारित गतिविधियों को 5 मुख्य स्तंभों को शत-प्रतिशत लागू करने पर विशेष जोर दिया।
- स्वच्छता ही सेवा: कार्यालय परिसरों, कार्यस्थलों, आवासीय कॉलोनियों और सांस्कृतिक/सार्वजनिक महत्व के स्थलों की गहन सफाई और सौंदर्यीकरण।
- कबाड़ से कला: सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए अनुपयोगी व औद्योगिक/कार्यालयी कचरे को सुंदर, उपयोगी और कलात्मक वस्तुओं में बदलना। उर्वरक विभाग और सभी उर्वरक कंपनियों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए कबाड़ समझे जाने वाले वस्तुओं से बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उर्वरक विभाग ने सभी संबद्ध कंपनियों व उपक्रमों को ‘कबाड़ से कला’ पहल के तहत अपनी रचनात्मक प्रविष्टियां 28 सितंबर तक जमा करने के निर्देश दिए हैं। जिससे कार्यस्थल पर उनकी रचनात्मक प्रतिभा को उचित पहचान और प्रोत्साहन मिल सके।
- खेल और खेल भावना: इस अभियान के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों/बच्चों के बीच टीम भावना, अनुशासन और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए खेलकूद और फिटनेस प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है।
- संवाद: जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सेमिनार, विचार-विमर्श और जन-जागरूकता सत्रों का आयोजन किए जाने प्रस्तावित हैं।
- ज्ञान यात्रा: पर्यावरण सुरक्षा और नागरिकों के बीच जिम्मेदारी का अहसास जगाने के संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए रैली भी आयोजित की जाएंगीं। इन रैलियों में ज्यादा से ज्यादा युवाओं और स्थानीय लोगों को जोड़ा जा रहा है।
'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' – 1 अक्टूबर को महा-श्रमदान:
बैठक में 1 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी महा-श्रमदान को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसके अंतर्गत सभी उर्वरक उपक्रमों, संयंत्रों और क्षेत्रीय कार्यालयों में ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के तहत सभी कार्मिक मिलकर स्वच्छता श्रमदान करेंगे।
आंतरिक ऑडिट और कर्मचारी सहभागिता:
अभियान के दौरान उर्वरक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार 'सफाई ऑडिट' कर रहे साथ ही, जमीनी स्तर के सुझावों को नीतिगत सुधारों में शामिल करने के लिए कार्मिकों को 'एक सुझाव स्वच्छता की ओर' पहल के तहत सक्रिय रूप से अपने विचार विभाग के साथ साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
डिजिटल निगरानी और राष्ट्रीय स्तर की रिपोर्टिंग:
अभियान की पारदर्शिता और दैनिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए सभी कंपनियों और इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन की गतिविधियों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें, वीडियो और आंकड़े विशेष 'एसएचएस-2026 पोर्टल' पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। साथ ही, वास्तविक समय की जानकारी साझा करने के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर भी समन्वय बनाए रखा जाए। यह संपूर्ण डेटा राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा और केंद्रीकृत रिपोर्टिंग का आधार बनेगा।
उर्वरक विभाग का मानना है कि प्रशासनिक प्रतिबद्धता और कार्मिकों की सक्रिय भागीदारी के समन्वय से ही 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान को जन-आंदोलन का वास्तविक रूप दिया जा सकता है।
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नीरज भट्ट/ शत्रुघन प्रसाद
cmc.fertilizers[at]gmail[dot]com
(रिलीज़ आईडी: 2313579)
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