सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
आर्थिक तंगी से अकादमिक सशक्तिकरण तक: श्री मंटू धर की शोध यात्रा
प्रविष्टि तिथि:
18 SEP 2026 5:09PM by PIB Delhi
फेलोशिप सहायता आर्थिक अनिश्चितता को कम कर सकती है और शोधार्थियों को अपने डॉक्टोरल शोध पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर देती है। निरंतर वित्तीय सहायता मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा जारी रखने, सार्थक शोध करने और अपनी अकादमिक आकांक्षाओं को साकार करने में सक्षम हो सकते हैं।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर के रहने वाले 35 वर्षीय शोधार्थी श्री मंटू धर अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली राष्ट्रीय फेलोशिप योजना के तहत सहायता प्राप्त कर पीएच.डी. कर रहे हैं। फेलोशिप, मकान किराया भत्ता (एचआरए) और आकस्मिक अनुदान के माध्यम से मिली सहायता ने गंभीर आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्हें अपना शोध जारी रखने में मदद की है।
फेलोशिप सहायता मिलने से पहले श्री मंटू धर को उच्च शिक्षा से जुड़े प्रवेश शुल्क और अन्य खर्चों को पूरा करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उनका परिवार कम आय वाले एकमात्र कमाने वाले सदस्य पर निर्भर था, जिसके कारण किताबों, शोध सामग्री और नियमित शैक्षणिक खर्चों के लिए संसाधन सीमित थे। भरोसेमंद आर्थिक सहायता के अभाव में उनके लिए अपने शोध पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करना मुश्किल था।

उनके पास उन्नत शोध सुविधाओं और उचित अकादमिक मार्गदर्शन तक भी सीमित पहुंच प्राप्त थी। उनके परिवार में किसी को उच्च शिक्षा के क्षेत्र का अनुभव नहीं होने के कारण डॉक्टोरल अध्ययन की प्रक्रिया उनके लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण थी। उनके घर, संस्थान और पुस्तकालय के बीच लंबी दूरी ने शैक्षणिक संसाधनों तक उनकी पहुंच को और सीमित किया तथा पढ़ाई में लगने वाले समय और खर्च को बढ़ा दिया।
वर्ष 2022 में श्री मंटू धर को एनएफसी योजना के तहत सहायता मिलनी शुरू हुई। उन्हें फेलोशिप सहायता, मकान किराया भत्ता और आकस्मिक सहायता के रूप में कुल 2,96,186 रुपये प्राप्त हुए हैं। इस सहायता से उन्हें किताबों और अध्ययन सामग्री सहित आवश्यक शैक्षणिक एवं शोध संबंधी खर्च पूरे करने में मदद मिली और परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम हुआ। इससे उन्हें अपना शोध पूरा करने पर अधिक स्थिरता के साथ ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।
मदद और सहयोग के बारे में श्री मंटू धर ने कहा, “एनएफसी की सहायता ने मुझे अपना शोध जारी रखने और अपने अकादमिक लक्ष्यों के करीब पहुंचने में मदद की।”
आज श्री मंटू धर नए आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी पीएच.डी. की पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। उनका लक्ष्य अपना शोध पूरा करना और अपने अकादमिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाना है। उनकी यात्रा दर्शाती है कि समय पर मिलने वाली फेलोशिप सहायता किस तरह शोधार्थियों को आर्थिक और शैक्षणिक बाधाओं को दूर करने तथा गरिमा, स्थिरता और उद्देश्य के साथ उच्च स्तरीय शोध जारी रखने में मदद कर सकती है।
*****
पीके/केसी/केजे
(रिलीज़ आईडी: 2312167)
आगंतुक पटल : 47