सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय 'सेवा दिवस' पर 'आशीर्वाद का दिया' समारोह आयोजित करेगा
केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, मादक पदार्थों की लत छोड़ चुके 200-250 लोगों के साथ मिलकर 'आशीर्वाद का दिया' जलाएंगे
मादक पदार्थों के सेवन से उबरने में इलाज और पुनर्वास के परिवर्तनकारी प्रभाव को उजागर करने की पहल
प्रविष्टि तिथि:
16 SEP 2026 7:42PM by PIB Delhi
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय कल शाम राष्ट्रीय राजधानी के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में 'आशीर्वाद का दीया' समारोह आयोजित करेगा।
यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा 'सेवा दिवस' के अवसर पर शुरू किए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के हिस्से के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार इस समारोह का नेतृत्व करेंगे और सफलतापूर्वक इलाज एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को पूरा कर चुके 200–250 नशा-मुक्त हुए व्यक्तियों के साथ 'आशीर्वाद का दीया' प्रज्वलित करेंगे।
इसमें शामिल लाभार्थियों को दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के इलाकों में नशा-मुक्ति कार्यक्रम के तहत काम करने वाले 'सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग' के 'अनुदान-प्राप्त संस्थानों' और 'नशा-मुक्ति केंद्रों' से सहायता प्राप्त हुई है। उनकी भागीदारी लोगों को नशीले पदार्थों की लत से उबरने में मदद करने वाले संस्थागत सहयोग के सकारात्मक प्रभाव, उम्मीद और हिम्मत को दिखाएगी।
मंत्रालय में मादक पदार्थ निवारण प्रभाग के संयुक्त सचिव डॉ. संदीप आर. राठौड़ ने कहा कि यह कार्यक्रम मादक पदार्थों की मांग को कम करने और प्रभावित व्यक्तियों के इलाज, पुनर्वास तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में फिर से जोड़ने के प्रति मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा। उन्होंने बताया कि नशा-मुक्त हुए व्यक्तियों की भागीदारी के माध्यम से, मंत्रालय का उद्देश्य समुदायों को प्रेरित करना, पुनर्वास कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणामों को प्रदर्शित करना और इस संदेश को मजबूत करना है कि निरंतर देखभाल और सामूहिक सहयोग के जरिए नशे से मुक्ति संभव है।

डॉ. राठौड़ ने बताया कि 'आशीर्वाद का दीया' पहल का मकसद सेवा, सम्मान और कृतज्ञता के मूल्यों को बढ़ावा देना है, साथ ही सरकार की प्रमुख योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित करना भी है।

उन्होंने कहा कि दीया जलाना सशक्तिकरण, मज़बूती और गरिमा का प्रतीक होगा। इससे एक स्वस्थ और समावेशी राष्ट्र बनाने में योगदान देने का मंत्रालय का संकल्प और मज़बूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल सेवा-उन्मुख शासन और 'सेवा दिवस' की भावना के प्रति सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
संयुक्त सचिव ने कहा कि एनएपीडीडीआर के तहत मंत्रालय राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और सरकारी अस्पतालों को निवारक शिक्षा, जागरूकता पैदा करने, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

नशा मुक्त भारत अभियान ऐप
डॉ. राठौड़ ने बताया कि देश भर में जागरूकता गतिविधियों के ज़रिए यह अभियान 34.55 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों तक पहुँचा है, जिनमें 13.71 करोड़ से ज़्यादा युवा और 10.65 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं। सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए 1.68 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम) भी इस अभियान से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, देश भर में 31.40 लाख से अधिक जागरूकता और आउटरीच गतिविधियां आयोजित की गईं।
एनएमबीए पोर्टल: https://www.dosje.gov.in/organisation/nasha-mukt-bharat-abhiyaan/
नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण
संयुक्त सचिव ने आगे कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के छठे वर्ष के समारोहों में जनता की व्यापक भागीदारी देखी गई। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां देखभाल और पुनर्वास का विस्तार करने, मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ समुदायों को एकजुट करने, गांव के विकास को आगे बढ़ाने और छात्रों को शिक्षा जारी रखने में सहायता करने के मंत्रालय के प्रयासों को दर्शाती हैं।
डॉ. राठौड़ ने बताया कि अब तक देश भर में कुल 3.42 लाख से ज़्यादा नशा मुक्ति शपथ (ई-शपथ सहित) ली जा चुकी हैं।

एनएमबीए शपथ मादक पदार्थों के सेवन के पीड़ितों तक पहुँचने और स्वेच्छा से उनकी मदद करने की एक पहल है। इस शपथ का उद्देश्य लोगों में नशे से दूर रहने की जिम्मेदारी की भावना जगाने के लिए जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना है। साथ ही, इसका उद्देश्य एकता और प्रतिबद्धता की भावना को बढ़ावा देना है ताकि सभी संबंधित पक्ष एक साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम कर सकें। इसके अलावा, यह प्रतिज्ञा युवाओं को नशा-मुक्त समाज बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए सशक्त बनाने का प्रयास करती है।
एनएमबीए ई-शपथ
एनएमबीए ई-शपथ का लिंक है: https://nashamukt.dosje.gov.in/epledge
डॉ. राठौड़ ने आगे बताया कि 1.67 लाख से अधिक मास्टर स्वयंसेवकों, सामुदायिक नेताओं और कर्मियों को नशा मुक्ति की पहचान और देखभाल से जुड़े विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से नशीले पदार्थों पर निर्भरता की पहचान करने और देखभाल की आवश्यकता वाले व्यक्तियों की मदद करने की सामुदायिक क्षमता मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि इलाज की सुविधा बढ़ाने के लिए पिछले दो सालों में 755 से ज़्यादा नए नशा-मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें ज़िला नशा-मुक्ति केंद्र , व्यसन उपचार सुविधाएं (एटीएफ) और जेलों में बने नशा-मुक्ति केंद्र शामिल हैं।
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पीके/केसी/एसके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2311129)
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