वित्त मंत्रालय
सीबीआईसी ने भारत के अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (एईओ) कार्यक्रम के 10 वर्ष पूरे होने पर समारोह आयोजित किया; आगे की दिशा तय की और विश्वनीय व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
एईओ कार्यक्रम भारत के सीमा-शुल्क प्रशासन को विश्व सीमा-शुल्क संगठन के सेफ (एसएएफई) मानक ढांचे के अनुरूप आधुनिक, विश्वसनीय और व्यापार-सुगमकारी प्रणाली में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है: सीबीआईसी अध्यक्ष
सीबीआईसी के सदस्य (सीमा-शुल्क) ने कहा कि वर्तमान एईओ ढांचे की शुरुआत के बाद से सीमा-शुल्क प्रशासन लेन-देन-केंद्रित दृष्टिकोण से जोखिम-आधारित और विश्वास-उन्मुख प्रशासन मॉडल में परिवर्तित हुआ है
प्रविष्टि तिथि:
16 SEP 2026 3:21PM by PIB Delhi
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने आज नई दिल्ली में "एईओ@10: विकास को गति देना, विश्वास बढ़ाना, व्यापार को इष्टतम करना" विषय पर आयोजित एक विशेष समारोह के माध्यम से भारत के अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (एईओ) कार्यक्रम के एक दशक पूरे होने का उत्सव मनाया।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े हितधारकों, विश्व सीमा-शुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ) के विशेषज्ञों और अधिकृत आर्थिक ऑपरेटरों ने भाग लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की उपलब्धियों की समीक्षा की गई और इसके भविष्य के लिए आगे की कार्ययोजना पर विचार किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए सीबीआईसी के अध्यक्ष श्री विवेक चतुर्वेदी ने भारत के सीमा-शुल्क प्रशासन को विश्व सीमा-शुल्क संगठन के सेफ (एसएएफई) मानक ढांचे के अनुरूप एक आधुनिक, विश्वसनीय और व्यापार-सुगम प्रणाली में बदलने में एईओ कार्यक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारत के व्यापार सुगमता ढांचे का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है। इसके माध्यम से स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा मजबूत हो रही है तथा सीमा-पार वस्तुओं की आवाजाही को अधिक तेज और पूर्वानुमान-योग्य बनाया जा रहा है सीबीआईसी अध्यक्ष ने अगले दशक के लिए पांच प्रमुख विचारों को रेखांकित किया:
- प्रौद्योगिकी-संचालित व्यापार सुगमता
- एमएसएमई के लिए व्यापक और प्रभावी समावेशन
- निर्बाध अंतर-एजेंसी समन्वय
- विस्तारित पारस्परिक मान्यता व्यवस्थाओं के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व, और
- अप्रत्यक्ष करों से संबंधित विभिन्न कार्यक्षेत्रों के बीच समन्वय
हितधारक-केंद्रित सुधारों के प्रति सीबीआईसी की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष महोदय ने एईओ पोर्टल पर एक संरचित फीडबैक फॉम शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश एईओ इकाइयों और अन्य हितधारकों से निरंतर और व्यवस्थित सुझाव प्राप्त करना है।

डब्ल्यूसीओ के सेफ (एसएएफई) मानक ढांचे के स्तंभ-2 और सीबीआईसी नागरिक चार्टर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वसनीय इकोसिस्टम के निर्माण में व्यापार जगत समान भागीदार है और फीडबैक की प्रतिक्रिया निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने प्रात्र विनिर्माता आयातक (ईएमआई) योजना का भी उल्लेख किया, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट भाषण में रेखांकित किया था। उन्होंने इसे अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम बताया, जो समय से पहले अनुपालन करने वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करता है और उन्हें एईओ के उच्च स्तरो तक पहुंचने का स्वाभाविक मार्ग प्रदान करता है।
अपने संबोधन में सीबीआईसी के सदस्य (सीमा-शुल्क) ने वर्तमान एईओ ढांचे की शुरुआत परिपत्र संख्या 33/2016-सीमा शुल्क के माध्यम से किए जाने के बाद सीमा-शुल्क प्रशासन में आए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सीमा-शुल्क प्रशासन लेनदेन-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर जोखिम-आधारित और विश्वास-उन्मुख प्रशासन मॉडल में परिवर्तित हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक अनुपालन सुशासन को बढ़ावा देता है तथा आपूर्ति श्रृंखला जोखिम और लेन-देन लागत को कम करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा भारत के व्यापार इकोसिस्टम की सुदृढ़ता के लिए सबसे ज्यादा महत्व रखती है। उन्होंने बताया कि कोलकाता में आयोजित वार्षिक सीमा-शुल्क परामर्शदात्री समूह की बैठक में हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं तथा व्यापार जगत से प्राप्त अभ्यावेदनों ने कई व्यापार-अनुकूल प्रक्रियागत सुधारों के प्रस्ताव तैयार करने में योगदान दिया है। इनमें निम्नलिखित उपाय शामिल हैं, जिन पर वर्तमान में विचार किया जा रहा है- सभी क्षेत्रों में समान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत मानक संचालन प्रक्रिया; आवेदकों और क्षेत्रीय एईओ कार्यक्रम प्रबंधकों के लिए स्पष्ट जांच-सूची; कमियों के संबंध में एकल-कमी दृष्टिकोण; समयबद्ध प्रक्रिया; कमी संबंधी सूचनाओं की एक प्रति आवेदक को भी उपलब्ध कराना; वित्तीय सुदृढ़ता के संबंध में स्थिति को और स्पष्ट करना; राष्ट्रीय व्यापार सुगमता कार्य योजना के अनुरूप समर्पित ग्राहक संबंध प्रबंधकों तथा प्रशिक्षित सत्यापनकर्ताओं को और सशक्त करना।

सदस्य (सीमा-शुल्क) ने यह भी बताया कि अनुपालन के बोझ को कम करने की इसी भावना के अनुरूप ईएमआई योजना के तहत दस्तावेज़ी आवश्यकताओं को पहले ही युक्तिसंगत बनाया जा चुका है। यह कार्य 3 सितंबर, 2026 के परिपत्र संख्या 39/2026सीमा-शुल्क के माध्यम से किया गया है। इससे परिणाम स्वरूप अपलोड किए जाने वाले दस्तावेजों की संख्या दस से घटाकर तीन कर दी गई है, जो 15 सितंबर, 2026 से प्रभावी है।
इस अवसर पर एक स्मरणीय प्रकाशन “भारत में एईओ का एक दशक: विश्वसनीय व्यापार साझेदारी का उत्सव” का भी विमोचन किया गया। इसमें पिछले दस वर्षों के दौरान भारत के एईओ कार्यक्रम के विकास, प्रमुख उपलब्धियों और प्रभाव का दस्तावेजीकरण किया गया है। इसमें सीबीआईसी अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय साजेदारों तथा व्यापार एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के योगदान को शामिल किया गया है। एईओ कार्यक्रम पर एक हितधारक प्रतिक्रिया सर्वेक्षण की भी घोषणा की गई, ताकि उद्योग जगत से संरचित सुझाव प्राप्त किए जा सकें और भविष्य के सुधारों की दिशा तय करने में उनका उपयोग किया डा सके। इसके अतिरिक्त चयनित व्यवसायों को नए एईओ प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इन प्रमाणपत्रों के माध्यम से सुरक्षित और अनुपालन-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मान्यता दी गई।

इससे पहले अपने स्वागत भाषण में प्रधान आयुक्त एवं राष्ट्रीय एईओ कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. कविता भटनागर ने कार्यक्रम की शुरुआत से अबतक हुई उल्लेखनीय प्रगती पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक विश्वसनीय और सुदृढ़ व्यापारिक वातावरण के निर्माण के लिए सीमा-शुल्क विभाग और व्यापारिक समुदाय के बीच निरंतर सहयोग के महत्व पर बल दिया।

फेडरेशन ऑफ फ्रेट फॉरवर्डर्स एसोसिएशनस इन इंडिया (एफएफएफएआई) सहित प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने, लेन-देन लागत कम करने और आपूर्ति श्रृंखला की पूर्वानुमेयता बढ़ाने में एईओ कार्यक्रम के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। प्रमुख एईओ इकाइयों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इसके ठोस लाभों पर प्रकाश डाला। इसमें शीघ्र सीमा-शुल्क निकासी, परिचालन दक्षता में सुधार तथा वैश्विक व्यापार जगत के विश्वास में वृद्धि जैसे लाभ शामिल हैं।

पिछले एक दशक के दौरान भारत का एईओ कार्यक्रम सीबीआईसी की व्यापार सुगमता पहलों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। यह अनुपालन करने वाले व्यवसायों को सरल सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं और जोखिम-आधारित व्यापार सुगमता के माध्यम सेप्रोत्साहित करता है, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला की मजबूत सुरक्षा को बनाए रखता है। आज की स्थिति के अनुसार कुल 5,967 इकाइयों को एईओ कार्क्रम के तहत टी1, टी2, टी3 और एलओ श्रेणियों में प्रमाणित किया जा चुका है। इनमें आयातक, निर्यातक, विनिर्माता, सीमा-शुल्क दलाल, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर और गोदाम संचालक शामिल हैं ।
कार्यक्रम ने धीरे-धीरे लॉजिस्टिक्स श्रृंखला के अपने दायरे का विस्तार किया है, आवेदन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया है, समर्पित एईओ प्रकोष्ठ स्थापित किए हैं और एमएसएमई के लिए विशेष व्यापार-सुगमकारी प्रावधान लागू किए हैं। भारत द्वारा दुनिया भर के विश्वसनीय व्यापारिक साझेदारों के साथ अपने जुड़ाव का लगातार विस्तार किए जाने के बीच सीबीआईसी हितधारक-केंद्रित सुधारों, प्रौद्योगिकी को अपनाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा व्यापार जगत से निरंतर फीडबैक के माध्यम से एईओ कार्यक्रम को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन प्रयासों से विकसित भारत @2047 के उद्देश्यों में योगदान मिलेगा तथा भारत को वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए एक अधिक पसंदीदा गंतव्य बनाने में सहायता मिलेगी।
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पीके/केसी/आईएम/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2311038)
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