पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
मुंबई में 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह में भारत ने ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा
देश ने विकास से समझौता किए बिना मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की प्रतिबद्धताओं का पालन किया
महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे ने कहा राज्य सतत विकास द्वारा 2047 तक प्रधानमंत्री के विकसित भारत दृष्टियोजना पर काम कर रहा है
विश्व ओजोन दिवस 2026 पर भारत का नेट जीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना डैशबोर्ड आरंभ
अगली पीढ़ी के तकनीशियनों का प्रशिक्षण उद्योग मानकों के अनुरूप बनाने के लिए 12 रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग विनिर्माणकर्ताओं ने 248 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपनाया
प्रविष्टि तिथि:
16 SEP 2026 3:11PM by PIB Delhi
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज मुंबई में 32 वां विश्व ओजोन दिवस समारोह आयोजित किया, जिसका विषय था शीतल ग्रह हेतु वैश्विक कार्रवाई । कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह और महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे ने की।

ओजोन परत क्षरण रोकने और पृथ्वी को एक शीतल तथा अधिक संवहनीय ग्रह बनाए रखने के भारत के प्रयासों से संबंधित कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सचिव श्री तन्मय कुमार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम - यूएनडीपी की कंट्री हेड सुश्री एंजेला लुसिगी, जीआईजेड इंडिया की कंट्री डायरेक्टर और प्रमुख सुश्री उलरीके एबेलिंग, भारत और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, अकादमिक विशेषज्ञ और स्कूली विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर, विशिष्ट व्यक्तियों ने भारत के नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना -एनएपीसीसी डैशबोर्ड का शुभारंभ किया। डैशबोर्ड डिजिटल पेज या स्क्रीन होता है जो किसी सॉफ्टवेयर, वेबसाइट या ऐप की मुख्य जानकारी, डेटा और आंकड़ों को एक ही जगह पर ग्राफ, चार्ट या टेबल के रूप में दिखाता है। नेट ज़ीरो पोर्टल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और इन्हें दर्शाने के केंद्रीय संग्रह का कार्य करेगा और उद्योगों, संगठनों और सरकारी निकायों को स्वेच्छा से पंजीकरण करने और नेट-ज़ीरो उत्सर्जन (उत्सर्जन और अवशोषण के बीच पूर्ण संतुलन) की दिशा में प्रगति प्रदर्शित करने में सक्षम बनाएगा। इसके अलावा, एनएपीसीसी पोर्टल को भारत की व्यापक राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना प्रदर्शित करने के केंद्रीकृत डिजिटल गेटवे के रूप में आरंभ किया गया, जिसमें राष्ट्रीय मिशनों की निगरानी और विषयगत गहन जानकारी शामिल है।
(प्रेसविज्ञप्ति: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2310737®=48&lang=2 )

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि आर्थिक विकास के साथ ही पर्यावरण संरक्षण हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सक्रिय नेतृत्व दिखाते हुए विकास से समझौता किए बिना ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को रोकने की वैश्विक संधि -मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी की हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, अधिकारियों और नागरिकों द्वारा सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है।
श्री सिंह ने सरल, रोजमर्रा के कामों में पर्यावरण संरक्षण उपायों के लिए पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली- मिशन लाइफ की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि संसाधनों के व्यर्थ उपयोग के बजाय उनका सजग उपयोग कर लोग पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने लोगों से संवहनीय शीतलन के तीन उपाय अपनाने का आह्वान किया। इनमें एयर कंडीशनर की सर्विसिंग प्रमाणित और सुरक्षित रूप से रेफ्रिजरेंट का उपयोग करने वाले कुशल तकनीशियनों से करवाने; बिजली बचाने तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए एयर कंडीशनर मशीन का तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस पर सेट करने; और पर्यावरण अनुकूल रेफ्रिजरेंट के उपयोग वाले गुणवत्तापूर्ण ऊर्जा-कुशल उपकरण का चुनाव शामिल है।

महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे ने कहा कि महाराष्ट्र, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत भविष्य दृष्टियोजना साकार करने की दिशा में काम कर रहा है। इनमें कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना, सतत विकास और पर्यावरण अनुकूल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में तीव्र शहरीकरण और बढ़ते तापमान को देखते हुए, महाराष्ट्र ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने का रोडमैप और कार्य योजनाएं तैयार कर रहा है, साथ ही ऊर्जा कुशल और जलवायु अनुकूल शीतलन प्रणालियों और भवनों को भी बढ़ावा दे रहा है।

भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम -यूएनडीपी की प्रतिनिधि सुश्री एंजेला लुसिगी ने कहा कि ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उत्पादन और उपयोग चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने संबंधी अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि -मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का भारत द्वारा कार्यान्वयन दर्शाता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ आगे बढ़ सकते हैं। ओजोन क्षरण करने वाले पदार्थों को चरणबद्ध रुप से समाप्त करने की भारत की प्रगति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उसने अपना लक्ष्य प्रायः निर्धारित समय से पहले ही पूरे कर लिए हैं, साथ ही पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाली प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया है, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सुदृढ़ बनाया है और तकनीशियनों को नए रेफ्रिजरेंट के बारे में प्रशिक्षित किया है, जिससे हरित रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।

भारत में जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी जीआईजेड की कंट्री डायरेक्टर और प्रमुख सुश्री उलरीके एबेलिंग ने कहा कि भारत और जर्मनी जलवायु-अनुकूल शीतलन समाधानों को बढ़ावा देने और एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, और फोम बनाने वाले उद्योगों में कूलेंट या रेफ्रिजरेंट के रूप में प्रयुक्त होने वाले हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन के चरणबद्ध समाप्ति प्रबंधन योजना के तीसरे चरण (2025-2030) के कार्यान्वयन सहयोग के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें प्रशीतन और वातानुकूलन सेवा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने शीतलन क्षेत्र में प्रशिक्षण क्षमता बेहतर बनाने के साथ ही वर्ष 2030 तक 25 हजार तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य के साथ एयर कंडीशनिंग तकनीशियनों के लिए राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्रमाणन प्रणाली स्थापित करने के प्रयासों का उल्लेख किया।

कार्यक्रम में 12 प्रशीतन एवं वायु कंडीशनिंग विनिर्माणकर्ताओं ने 248 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों- आईटीआई को अपनाने की घोषणा की। यह समझौता प्रशीतन एवं वायु कंडीशनिंग विनिर्माणकर्ताओं, ओजोन सेल, क्षेत्रीय निदेशालय, प्रशिक्षण महानिदेशालय -डीजीटी और राज्य निदेशालय के बीच हुए चार-पक्षीय समझौते के तहत किया गया है। इस का उद्देश्य तकनीशियनों की अगली पीढ़ी के लिए प्रशिक्षण ढ़ांचे को सुदृढ़ बनाना है। संस्थागत साझेदारी का लक्ष्य कक्षा में दिए जाने वाले शिक्षण को उद्योग मानकों के अनुरूप बनाना है। यह समन्वय पर्यावरण अनुकूल, कम वैश्विक तापवृद्धि क्षमता प्रौद्योगिकियों में कुशल कार्यबल तैयार करेगा, जो मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और भारत शीतलन कार्य योजना -आईसीएपी के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं के लिए सहायक होगा।

इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के ओजोन सेल के अध्ययनों पर आधारित प्रकाशन जारी किए गए। कार्यक्रम में विद्यालय स्तर के राष्ट्रीय पोस्टर और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताओं के विजेताओं के साथ ही राष्ट्रीय ऑनलाइन क्विज़ प्रतियोगिता के विजेताओं की भी घोषणा की गई। इस अवसर पर भारत के सक्रिय औद्योगिक बदलाव तथा पृथ्वी को शीतल और अधिक संवहनीय ग्रह के रूप में सुरक्षित रखने की दिशा में किए गए अग्रणी प्रयासों पर एक वीडियो फिल्म भी दिखायी गई।

भारत 1992 से ओजोन परत संरक्षण से संबंधित वियना कन्वेंशन और ओजोन परत क्षरण वाले पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और इसके सभी संशोधनों का पक्षकार रहा है। उसने विभिन्न ओजोन क्षयकारी पदार्थों की मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अनुसूची के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताएं पूरी की हैं। क्लोरोफ्लोरोकार्बन -सीएफसी, कार्बन टेट्राक्लोराइड -सीटीसी और हैलॉन को नियंत्रित अनुप्रयोगों के लिए पहले ही चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया गया है, जबकि वह अभी मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की त्वरित चरणबद्ध समाप्ति अनुसूची के अनुसार कार्बन, हाइड्रोजन, क्लोरीन और फ्लोरीन से बने कृत्रिम रासायनिक यौगिकों के समूह हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन- एचसीएफसी को चरणबद्ध रुप से हटा रहा है। उसने एचसीएफसी के 2015, 2020 और 2025 के चरणबद्ध समाप्ति लक्ष्यों को पहले ही पूरा कर लिया है।
भारत ने सितंबर 2021 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के किगाली संशोधन का अनुसमर्थन किया था। यह संशोधन भारत में 26 दिसंबर 2021 से लागू है। सहमति के अनुरूप भारत 2032 से आगे चार चरणों में एचएफसी उत्पादन और खपत में चरणबद्ध रुप से कमी लाएगा, जिसमें आधार मानक स्तर के मुकाबले 2032 में 10 प्रतिशत, 2037 में 20 प्रतिशत, 2042 में 30 प्रतिशत और 2047 में 85 प्रतिशत की कमी की जाएगी।
***
पीके/केसी/एकेवी/केएस
(रिलीज़ आईडी: 2310922)
आगंतुक पटल : 67