संस्कृति मंत्रालय
संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने पुरातत्व संस्थान में नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्घाटन किया
प्रविष्टि तिथि:
15 SEP 2026 7:20PM by PIB Delhi
संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने आज ग्रेटर नोएडा स्थित पुरातत्व संस्थान, पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिसर में नव नियुक्त वरिष्ठ संरक्षण सहायकों और संरक्षण सहायकों के लिए आयोजित प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह देशभर के विभिन्न एएसआई मंडलों से नव नियुक्त 53 वरिष्ठ संरक्षण सहायकों (एसआर. सीए) और संरक्षण सहायकों (सीए) के लिए एक माह का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम है। संशोधित पाठ्यक्रम में पुरातत्व संबंधी मूल कार्य-प्रणालियों को प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया के साथ समन्वित किया गया है, जिसमें अधिकारियों को सरकारी वित्तीय नियमों (जीएफआर), प्रशासनिक विधि, स्थापना संबंधी प्रक्रियाओं, जनशक्ति प्रबंधन और विभागीय जांच का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए सचिव महोदय ने संस्थान को अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए रणनीतिक बदलाव की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने भारत के संरक्षित स्मारकों को आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। “स्मारक अर्थव्यवस्था” को रेखांकित करते हुए सचिव महोदय ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत पर्यटन, स्थानीय परिवहन, आतिथ्य, कारीगर बाजारों, प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रमों और विरासत संबंधी क्यूरेटेड भ्रमण आदि को बढ़ावा देकर प्रत्यक्ष रूप से या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से रोजगार सृजित करने और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाती है।
सचिव महोदय ने अधिकारियों से निर्णायक नेतृत्व अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सही भावना से की गई पहलों के लिए संस्थागत संसाधन कोई बाधा नहीं हैं। उन्होंने आगे राष्ट्रीय हित (देश हित) को प्रथम, संस्थागत दायित्व (संस्था हित) को द्वितीय और समाज तथा परिवार को तृतीय प्राथमिकता देने की कार्य-संस्कृति को रेखांकित किया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक श्री यदुबीर सिंह रावत ने “न्यूनतम हस्तक्षेप और अधिकतम संरक्षण” की मार्गदर्शक संरक्षण विचारधारा को दोहराया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस प्रशिक्षण मॉड्यूल के बाद शीघ्र ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवारत कार्मिकों और राज्य पुरातत्व विभागों के अधिकारियों के लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम (रिफ्रैशर कोर्स) आयोजित किए जाएंगे।
यह पहल पुरातत्व संस्थान के अत्याधुनिक 25 एकड़ के परिसर का पूर्ण उपयोग करने के लिए चलाए जा रहे पुनरुद्धार अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पुरातत्व में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीए) के अपने पारंपरिक 15-छात्रों के बैच से आगे बढ़ते हुए, संस्थान को अब एक प्रमुख पुरातत्व प्रशिक्षण संस्थान के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, जो पूर्ण रूप से विकसित होने पर विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थानों के समकक्ष होगा। परिसर को क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा और युवा विद्यार्थियों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और कार्यों के बारे में शिक्षित करने के लिए उपयोग किया जाएगा।
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(रिलीज़ आईडी: 2310663)
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