विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
क्रिस्टलीय ठोस में असामान्य तरंग-जैसी ऊष्मा संचार का पता चलना उद्योगों में अपशिष्ट ऊष्मा को ऊर्जा में बदलने की दिशा में बड़ी सफलता का संकेत
प्रविष्टि तिथि:
14 SEP 2026 5:59PM by PIB Delhi
हाल ही में अध्ययन किए गए कॉपर चाल्कोजेनाइड पदार्थ, जिसे थैलियम कॉपर सेलेनाइड (टीआईसीयू5एसइ3) कहा जाता है, में असामान्य ऊष्मा संचार प्रणाली का तरीका देखा गया है। यह खोज विद्युत् संयंत्र, सीमेंट उद्योगों, इस्पात संयंत्र, ऑटोमोबाइल, डेटा सेंटर और बैटरी हीट मैनेजमेंट सिस्टम में वेस्ट हीट को थर्मोइलेक्ट्रिक ऊर्जा परिवर्तन के माध्यम से अपशिष्ट ऊष्मा को कुशलतापूर्वक बिजली में बदलने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
परंपरागत सुपरआयनिक पदार्थ अत्यधिक गतिशील आयनों के माध्यम से कम जालक तापीय चालकता प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन अत्यधिक आयन स्थानांतरण से संरचनात्मक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है और इसके ऊष्माविद्युत प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सीमित आयन प्रसार, जहाँ आयनिक गति एक जटिल क्रिस्टलीय संरचना के भीतर ही सीमित रहती है, ऊष्मा परिवहन को कम करने के साथ-साथ संरचनात्मक स्थिरता बनाए रखने और गैर परंपरागत ऊष्मा-संचार तंत्रों को बढ़ावा देने का एक तरीका प्रदान करता है।
क्रिस्टलीय पदार्थों में, आम तौर पर यह माना जाता है कि गर्मी का संचार कण जैसे 'फोनॉन' के ज़रिए होता है, और फोनॉन का 'मीन फ्री पाथ' (एमएफपी) आमतौर पर परमाणुओं के बीच की दूरी से काफी ज़्यादा होता है। इसके उलट, कांच में ज़्यादा अव्यवस्था और 'एनहार्मोनिसिटी' (एक ऐसी घटना जिसमें परमाणुओं का कंपन असममित हो जाता है और सामान्य पैराबोलिक व्यवहार से काफी हट जाता है, जिससे गर्मी का संचार बाधित होता है) के कारण एमएफपी घटकर लगभग परमाणुओं के बीच की दूरी के बराबर रह जाता है, जिससे सामान्य फोनॉन संचार रुक जाता है।
हालांकि, यह पारंपरिक तरीका तब तेजी से अपर्याप्त हो जाता है जब प्रबल अपरंपरागत कंपन और संरचनात्मक अव्यवस्था लंबी दूरी के क्रिस्टलीय क्रम को बनाए रख सकती है, जबकि अत्यधिक स्थानीयकृत, निकट दूरी वाले कंपन मोड प्रदर्शित करती है जो एक दूसरे के साथ मजबूती से परस्पर क्रिया करते हैं।
इस मध्यवर्ती व्यवस्था में, तापीय ऊर्जा का परिवहन न केवल कण-जैसे फोनान संचरण के माध्यम से, बल्कि विभिन्न कंपन मोड के बीच तरंग-जैसी संबद्धता के माध्यम से भी हो सकता है, जिससे अत्यधिक कम जालक तापीय चालकता संभव होती है। ऐसी अत्यधिक कम तापीय चालकता वाले पदार्थ थर्मल बैरियर कोटिंग्स, थर्मोइलेक्ट्रिक ऊर्जा परिवर्तन और थर्मल डिकोहेरेंस-मुक्त क्वांटम तकनीक में अत्यधिक महत्व रखते हैं।
जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान) के शोधकर्ताओं और अन्य शोध टीम के सदस्यों ने नए अध्ययन किए गए कॉपर चाल्कोजेनाइड पदार्थ, (टीआईसीयू5एसइ3) में एक असामान्य तरंग-जैसी तापीय परिवहन प्रणाली की खोज की है, जो उच्च-प्रदर्शन थर्मोइलेक्ट्रिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
टीआईसीयू5एसइ3 के जटिल क्रिस्टल ढांचे से यह उम्मीद थी कि यह कॉपर परमाणुओं की लंबी दूरी तक आवाजाही के बजाय उनकी गति को सीमित करेगा। इससे यह जांचने का मौका मिला कि क्या यह सीमित गतिशील व्यवहार, बिना किसी संरचनात्मक अस्थिरता के, मज़बूत अपरंपरागत कंपन पैदा कर सकता है और गर्मी के बहाव को रोक सकता है।
जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र की नई रसायन इकाई के प्रोफ़ेसर कनिष्क बिस्वास और पीएचडी कर रही उनकी छात्र, सुश्री सायंतोनी चौधरी और डॉ. अनिमेष भुई के नेतृत्व में किए गए इस काम को प्रतिष्ठित जर्नल 'साइंस एडवांसेज' में प्रकाशित किया गया। इसमें प्रयोगों के ज़रिए संरचनात्मक और थर्मोइलेक्ट्रिक गुणों की जाँच की गई और गर्मी के असामान्य प्रवाह के कारण को समझने के लिए उन्नत सैद्धांतिक गणनाएं की गईं।
उन्होंने दिखाया कि कॉपर सबलैटिस की जटिल क्रिस्टल संरचना और उसमें मौजूद सीमित गतिक विकार बहुत ज़्यादा एनहार्मोनिसिटी पैदा करते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप मुख्य रूप से तरंग-समान फोनॉन संचार होता है और अंतर्निहित रूप से अति-निम्न लैटिस तापीय चालकता प्राप्त होती है।

चित्र 1: एक डायग्राम जो टीआईसीयू5एसइ3 में जटिल, गांठ जैसी संरचना को दिखाता है। यह संरचना कॉपर की गति को सीमित करती है, जिससे असामान्य रूप से गर्मी का संचार होता है और बहुत ज़्यादा थर्मोइलेक्ट्रिक का प्रदर्शन होता है।
यह असामान्य तापीय संचार, अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक संचार के साथ मिलकर, शुद्ध त्रि-अंगी चाल्कोगेनाइड्स के बीच उच्चतम थर्मोइलेक्ट्रिक प्रदर्शनों में से एक (1.7 का थर्मोइलेक्ट्रिक फिगर ऑफ मेरिट, ज़ेडटी) प्रदान करता है। इस असामान्य व्यवहार का मूल कारण टीआईसीयू5एसइ3 का विशिष्ट क्रिस्टल ढांचा है। यह यौगिक एक टेट्रागोनल संरचना में क्रिस्टलीकृत होता है और क्रिस्टलोग्राफिक सी-अक्ष के साथ खुले चैनलों के साथ एक जटिल त्रि-आयामी क्लोवरलीफ गांठ-जैसा ढांचा बनाता है।
इस जटिल ढांचे से जुड़ा अंतर्निहित बंधन पदानुक्रम इन सीमित गतिक व्यवहारों को जन्म देता है। कॉपर के इस सीमित गतिक व्यवहार की उपस्थिति की जांच करने के लिए, टीम ने उन्नत प्रथम-सिद्धांत सैद्धांतिक गणनाओं और मॉलिक्यूलर-डायनामिक्स सिमुलेशन को निष्पादित करने हेतु जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु की थ्योरीटिकल साइंसेज यूनिट के प्रो. उमेश वी. वाघमारे और उनके पोस्टडॉक डॉ. प्रसाद वी. मटुकुमिल्ली के साथ सहयोग किया।

चित्र 2: प्रोफेसर कनिष्क बिस्वास (बाएं) और सायंतोनी चौधरी (दाएं) जेएनसीएएसआर, बैंगलोर।
आणविक-गतिकी सिमुलेशन (समय के साथ परमाणु गतियों का कंप्यूटर सिमुलेशन) से पता चलता है कि कॉपर परमाणु सुपरआयनिक कॉपर चैल्कोजेनाइड्स की तरह लंबी दूरी तक तरल-जैसी विसरण के बजाय स्थानीयकृत स्थानबद्ध गतिक विकार प्रदर्शित करते हैं। यह सीमित गति मुख्य रूप से प्रबल जालक असामंजस्य का स्रोत है। इसके प्रत्यक्ष परिणाम स्वरूप, ऊष्मा तरंग-समान सुसंगति के माध्यम से प्रसारित होने लगती है, जिसमें फोनन अच्छी तरह से परिभाषित कणों के रूप में गति करने के बजाय स्थानीयकृत कंपन अवस्थाओं के बीच सुरंग बनाते हैं। यह पता लगाने के लिए कि ये असामान्य कंपन ऊष्मा का संचार कैसे करते हैं, शोधकर्ताओं ने पारंपरिक फोनन-गैस मॉडल से आगे बढ़कर ऊष्मीय परिवहन के एकीकृत औपचारिकता का उपयोग किया। यह ढांचा कण-समान फोनन प्रसार और विभिन्न फोनन शाखाओं के बीच तरंग-समान सुसंगति दोनों पर विचार करता है।
इस कार्य का महत्व केवल थर्मोइलेक्ट्रिक प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं है, यह स्थापित करता है कि कैसे संरचनात्मक जटिलता और सीमित आयन गतिशीलता तापीय प्रबंधन और उच्च-प्रदर्शन वाले थर्मोइलेक्ट्रिक ऊर्जा रूपांतरण के लिए एक अपरंपरागत तंत्र को जन्म दे सकती हैं।
प्रकाशन लिंक: DOI:10.1126/sciadv.aeh9096
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पीके/केसी/एसके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2310247)
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