सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
नशे की लत से आत्मनिर्भरता तक: राजू की स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरणादायक यात्रा
प्रविष्टि तिथि:
11 SEP 2026 5:26PM by PIB Delhi
नशे की लत से किसी भी व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके पारिवारिक संबंधों, रोजगार और समाज में उसकी भूमिका प्रभावित हो सकती है। समय पर उपचार, परामर्श (काउंसलिंग) और निरंतर पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) सहायता से व्यक्ति नशे की लत से बाहर निकल सकता है और आत्मविश्वास तथा स्थिरता के साथ अपने जीवन को फिर से संवार सकता है।
गुजरात के अहमदाबाद जिले का 23 वर्षीय लाभार्थी राजू (बदला हुआ नाम) सुव्यवस्थित नशामुक्ति और रिहैबिलिटेशन सहायता का प्रेरक उदाहरण है। गुजरात केलावणी ट्रस्ट द्वारा संचालित नया जीवन-आईआरसीए में उपचार और काउंसलिंग प्राप्त करने के बाद राजू नशे की लत से उबरने में सफल रहा।
आज राजू नशामुक्त जीवन जी रहा है और उसके व्यक्तिगत तथा पेशेवर जीवन में धीरे-धीरे स्थिरता आ रही है।
राजू अनुसूचित जाति समुदाय से है और उसने इंटरमीडिएट/डिप्लोमा स्तर तक की पढ़ाई की है। उसे बचपन में पर्याप्त भावनात्मक सहयोग, देखभाल या अपनापन नहीं मिला, जिससे वह कम उम्र से ही भावनात्मक रूप से सवेदनशील हो गया। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों और सहयोग के अभाव का असर उसके जीवन पर पड़ा और वह धीरे-धीरे नशे की लत में पड़ गया।
दत्तक पिता के निधन के बाद उसकी परिस्थितियां और भी चुनौतीपूर्ण हो गईं। नशे की लत के कारण उसे अपना घर छोड़ना पड़ा। बाद में जब उसने अपनी सगी मां से मदद मांगी, तो उनके परिवार वालों ने उसे ठुकरा दिया। समाज में बदनामी और अकेलेपन से वह मानसिक रूप से और कमजोर हो गया।
उसे नौकरी में अस्थिरता, आर्थिक असुरक्षा, समाज में अस्वीकार्यता का सामना करना पड़ा और सुधार के लिए आवश्यक सहारा भी नहीं मिला। हालांकि उसे कुछ समय के लिए सुरक्षा गार्ड की नौकरी मिली, लेकिन अस्थिर हालात और लत की वजह से वह लंबे समय तक नौकरी नहीं कर पाया।
इन चुनौतियों के बावजूद, राजू नशीले पदार्थों की लत से उबरना, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना, पक्की नौकरी पाना तथा परिवार और समाज में दोबारा स्वीकार्यता हासिल करना चाहता था। लेकिन, मज़बूत सहारा नहीं मिल पाने का असर उसके मानसिक स्वास्थ्य और लत छोड़ने की संभावनाओं पर पड़ा।

24 जुलाई 2024 को अहमदाबाद के नया जीवन-आईआरसीए में राजू को भर्ती कराना, उसकी ज़िंदगी का एक अहम मोड़ साबित हुआ। सेंटर में उसे नशा-मुक्ति का उपचार और काउंसलिंग की सुविधाएं मिलीं, जिनमें निजी काउंसलिंग, पारिवारिक काउंसलिंग और नियमित फ़ॉलो-अप सहयोग शामिल था।
सही तरीके से की गई काउंसलिंग, रिहैबिलिटेशन सेवाओं और लगातार सहयोग की वजह से राजू नशे की लत से उबर पाया और अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सका। बाद के उपायों से उसके लत छोड़ने की प्रक्रिया के साथ ही उसके फिर से समाज की मुख्यधारा में जुड़ने में मदद मिली।
राजू इस समय नशा-मुक्त होकर जीवन जी रहा है और धीरे-धीरे अपना आत्मविश्वास तथा स्थिरता वापस पा रहा है। वह पूर्णकालिक नौकरी कर रहा है और उसकी नई नौकरी में वेतन में वृद्धि हुई है, जिससे उसकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता बढ़ गई है।
राजू का सफ़र दर्शाता है कि कैसे सही समय पर नशा-मुक्ति का उपचार, काउंसलिंग, रिहैबिलिटेशन और लगातार फ़ॉलो-अप से किसी कमज़ोर व्यक्ति को नशे की लत से उबरने और अपनी अधिक स्थिर निजी और प्रोफेशनल ज़िंदगी संवारने में मदद मिल सकती है।
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पीके/केसी/एमके
(रिलीज़ आईडी: 2309278)
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