प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को संबोधित किया
प्रधानमंत्री ने कहा अंतरिक्ष की संभावनाएं असीम और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
श्री मोदी ने कहा- हमारे विकल्प स्पष्ट होने चाहिए, टकराव की जगह सहयोग, अल्पकालिक लाभ की जगह संवहनीयता और निष्कर्षण की जगह समावेशन
हम अंतरराष्ट्रीय विधि व्यवस्था, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित सुरक्षित, शांतिपूर्ण और संधारणीय अंतरिक्ष क्षेत्र का समर्थन करते हैं
हमारी अंतरिक्ष यात्रा के केंद्र में रहे इसरो को उत्कृष्टता और लागत कुशल मिशनों के लिए वैश्विक सराहना मिली है
प्रधानमंत्री ने कहा, पेरिस में आयोजित अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन एक स्पष्ट संदेश दे: हम समस्त मानवता, आगामी पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष का मिलकर अन्वेषण करेंगे, साथ नवाचार करेंगे और मिलकर इसकी रक्षा करेंगे
प्रविष्टि तिथि:
10 SEP 2026 3:51PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा फ्रांस के पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को समयोचित पहल करने और उनके सौहार्दपूर्ण निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया। श्री मोदी ने इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रथम अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हो रही है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ब्रह्मांड के प्रति मानवता के अटूट आकर्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरिक्ष ने सदियों से मानव कल्पना को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि यह सीमा अब पृथ्वी पर जलवायु और फसलों से लेकर महासागरों और समुदायों तक के दैनिक जीवन को संचालित करती है। श्री मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष की संभावनाएं असीम हैं और इसके प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्री मोदी ने ब्रह्मांड की बढ़ती जटिलता का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रहों की कक्षाओं में अब भीड़भाड़ बढती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विकसित होने के साथ ही इसमें अधिक संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि वैश्विक साझेदारियों में अल्पकालिक लाभों के बजाय दीर्घकालिक संवहनीयता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि हमारे विकल्प स्पष्ट होने चाहिए: टकराव के स्थान पर सहयोग, अल्पकालिक लाभ के स्थान पर संवहनीयता और निष्कर्षण के स्थान पर समावेशन अपनाया जाना चाहिए।
अंतरिक्ष के प्रति भारत का दार्शनिक दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य है। उन्होंने एकता की इस भावना को पृथ्वी से परे एक सुरक्षित अंतरिक्ष क्षेत्र सुनिश्चित करने का पक्ष रखा। श्री मोदी ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय विधि व्यवस्था, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित सुरक्षित, शांतिपूर्ण और संधारणीय अंतरिक्ष क्षेत्र का समर्थन करते हैं।
प्रधानमंत्री ने पारदर्शी अनुसंधान के महत्व का उल्लेख करते हुए इस बात पर बल दिया कि भारत की वैश्विक यात्रा सार्वभौमिक कल्याण के दर्शन को पूर्णतया प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि सूचना का नैतिक साझाकरण यवैश्विक प्रगति के लिए सर्वोपरि है। श्री मोदी ने कहा कि वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा के साथ जनहित में होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और नौवहन में उपग्रह प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक लाभों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन उन्नत क्षमताओं से किसानों और मछुआरों सहित आम लोग सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस यात्रा के केंद्र में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो ने उत्कृष्टता और लागत प्रभावी मिशनों से वैश्विक सराहनाएं अर्जित की हैं।
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रक्षेपण सेवाओं में भारत की विस्तृत भागीदारी का विवरण देते हुए घरेलू रॉकेटों द्वारा 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करने का उल्लेख किया। उन्होंने इन सहयोगात्मक वैज्ञानिक प्रयासों की व्यापक वैश्विक उपयोगिता पर बल देते हुए कहा कि इसरो की प्रौद्योगिकियां और साझेदारियां न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए उपयोगी सिद्ध हो रही हैं।
इस संस्थागत सफलता का श्रेय देश के मानव संसाधन के अथक प्रयास को देते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की पीढ़ियों के समर्पण और कड़ी मेहनत के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उनके ही अथक प्रयासों से अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों के बीच इसरो को गौरवपूर्ण स्थान मिला है। श्री मोदी ने कहा कि दिन-रात काम करते हुए उन्होंने हर मिशन और हर सफलता के साथ इसरो की वैश्विक प्रतिष्ठा बढाई है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में हासिल महत्वपूर्ण उपलब्धियों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि आदित्य-एल1 अभी सूर्य के रहस्यों को उजागर कर रहा है, जबकि भारत का एक अंतरिक्ष यात्री पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचा था। ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान ने एक नया वैश्विक मानक स्थापित किया। श्री मोदी ने कहा कि चंद्रयान-3 अभियान से भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश बना।
अंतरिक्ष में भारत की महत्वाकांक्षी भविष्योन्मुखी लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, प्रधानमंत्री ने 2035 तक स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक एक अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की योजनाओं की घोषणा की। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि इन प्रयासों में हमारा स्पष्ट मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है और इन दीर्घकालिक प्रयासों का एक ही व्यापक उद्देश्य है कि इनका लाभ समस्त मानवता तक पहुंचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में घरेलू वाणिज्यिक पारितंत्र तेजी से विकसित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी संस्थागत एजेंसियों के साथ ही तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने उभरते स्टार्टअप और स्थापित संगठनों के बीच गतिशील तालमेल की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि उद्यमशीलता की ऊर्जा अब इसरो की उत्कृष्टता के साथ जुड़ रही है।
प्रधानमंत्री ने फ्रांस के साथ दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर कहा कि 1960 के दशक में थुम्बा में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के आरंभ से ही फ्रांस अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक विश्वसनीय सहयोगी रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वर्तमान संयुक्त पहल में उच्च स्तरीय अनुसंधान से ठोस सामाजिक लाभ प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है। श्री मोदी ने कहा कि आज दोनों देशों का सहयोग पृथ्वी अवलोकन और उन्नत प्रौद्योगिकियों तक व्याप्त है, जो वैज्ञानिक उत्कृष्टता को मानवीय उद्देश्यों के साथ जोड़ता है।
प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों को खुला निमंत्रण देते हुए भारत की आगामी अंतरिक्ष अन्वेषण अभियानों में वैश्विक समुदाय से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रह्मांड की खोज के अगले चरण में पूरी दुनिया के भागीदारों को अग्रणी भूमिका निभाने के लिए साथ मिलकर काम करने का स्वागत किया। श्री मोदी ने कहा कि हम फ्रांस और दुनिया को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में सहयात्री बनने के लिए आमंत्रित करते हैं।
अपने वीडियो संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने सम्मेलन के सभी विशिष्ट प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोगात्मक अन्वेषण और नवाचार द्वारा खगोलीय पर्यावरण की रक्षा करने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि पेरिस में आयोजित अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन एक स्पष्ट संदेश दे: हम सब मिलकर समस्त मानवता और आगामी पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण करेंगे, मिलकर नवाचार करेंगे और अंतरिक्ष की रक्षा करेंगे।
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पीके/केसी/एकेवी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2308830)
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