संस्‍कृति मंत्रालय
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संस्कृति मंत्रालय ने 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' (वाईवाईबीएम) के विकास के तहत दो बड़े कार्यक्रमों - 'शिल्पकार समागम' (2-3 सितंबर 2026) और 'वेंडर विकास कार्यक्रम' (7-8 सितंबर 2026) - का सफलतापूर्वक आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 09 SEP 2026 9:44PM by PIB Delhi

'मेक इन इंडिया' के विजन को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक पहल के तौर पर शुरू किए गए दो कार्यक्रम संग्रहालय (म्यूजियम) क्षेत्र में भारत और विदेश के कारीगरों, शिल्पकारों, डिजाइनरों, वास्तुकारों, संग्रहालय पेशेवरों, विनिर्माताओं और उद्योग के प्रमुख लोगों को एक साथ लाए हैं। भारतीय उद्यमों, कारीगरों और विनिर्माताओं को दुनिया के जाने-माने संग्रहालय विशेषज्ञों से जोड़कर, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भारत के संग्रहालय उद्योग इकोसिस्टम को मजबूत और संगठित करना, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और सहयोग के नए मौके पैदा करना था।

उन्होंने भारत की उस क्षमता पर भी जोर दिया जिसके तहत वह न केवल संग्रहालय विकास, सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रचनात्मक अर्थव्यवस्था (क्रिएटिव इकोनॉमी) के लिए तेज़ी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है, बल्कि संग्रहालय से जुड़े सामान, तकनीक, सेवा और प्रदर्शनी (एग्जिबिशन) समाधान के डिजाइन, विनिर्माण और निर्यात के लिए भविष्य का वैश्विक हब भी बन सकता है।

इन कार्यक्रमों ने 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' को एक अहम सांस्कृतिक संस्थान और सभ्यता-संस्कृति से जुड़े संग्रहालय के तौर पर विकसित करने में भी योगदान दिया। यह एक ऐसा म्यूजियम है जो स्वभाव से भारतीय और मानकों के लिहाज से पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय है और जो भारत के लोगों की परंपराओं, रचनात्मकता और आकांक्षाओं को दर्शाता है।

शिल्पकार समागम: भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं को भविष्य के संग्रहालय से जोड़ना

नई दिल्ली की नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) में आयोजित 'शिल्पकार समागम' में देश भर के बेहतरीन शिल्पकार, कारीगर समुदाय, शिल्प गुरु, डिजाइनर, वास्तुकार (आर्किटेक्ट), संग्रहालय पेशेवर और सांस्कृतिक संस्थान एक साथ आए।

दो दिन के इस कार्यक्रम ने एक ऐसे साझा मंच के तौर पर काम किया, जहां इस बात पर चर्चा हुई कि भारत की समृद्ध और विविध शिल्प परंपराओं को संग्रहालय के आर्किटेक्चर, इंटीरियर, गैलरी और सार्वजनिक जगहों में किस तरह सार्थक ढंग से शामिल किया जा सकता है। चर्चाओं में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, भौतिक संस्कृतियां (मैटेरियल कल्चर), टिकाऊ तौर-तरीकों, समुदाय-आधारित शिल्पकारी और बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में विरासत से जुड़ी कलाओं के आधुनिक इस्तेमाल की भूमिका पर ध्यान दिया गया।

इस कार्यक्रम में कई तरह की शिल्प कलाओं पर आधारित सत्र, इंटरैक्टिव कार्यशाला, प्रस्तुतीकरण और खास बातचीत शामिल थी। इनमें टेक्सटाइल, मेटलवर्क, वुडक्राफ्ट, पत्थर की नक्काशी, सिरेमिक, बांस और बेंत का काम, सजावटी कला, पारंपरिक पेंटिंग, आर्किटेक्चरल क्राफ्ट और नए डिजाइन जैसे कई क्षेत्र शामिल थे।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' को सिर्फ चीजों को जमा करने की जगह के तौर पर नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्थान के रूप में देखा जा रहा है। यह संस्थान भारत की सभ्यता की निरंतरता, सामूहिक यादों और रचनात्मक परंपराओं को दर्शाता है। इस संग्रहालय का उद्देश्य कारीगरों और शिल्प समुदायों के लिए ऐसे मौके बनाना है, जिनसे वे एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक लैंडमार्क बनाने में सीधे योगदान दे सकें और साथ ही आज के दौर में पारंपरिक ज्ञान की अहमियत को भी दिखा सकें।

शिल्पकार समागम की एक खास बात यह थी कि इसमें पूरे भारत की अलग-अलग शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 से ज्यादा माहिर कारीगरों और शिल्पकारों के काम का प्रदर्शन किया गया और प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों में भारत की जीवंत विरासत की समृद्धि दिखाई गई और कारीगरों, डिजाइनरों, आर्किटेक्ट्स और संग्रहालय योजनाकारों के बीच सीधी बातचीत का मौका मिला, जिससे संग्रहालय के इंटीरियर और सार्वजनिक जगहों में पारंपरिक शिल्पों को शामिल करने के मौकों की पहचान करने में मदद मिली।

शिल्पकार समागम के मुख्य परिणाम

पूरे भारत से 150 से ज्यादा मास्टर कारीगरों, शिल्पकारों और संस्थाओं की भागीदारी।

अलग-अलग शिल्प परंपराओं और ज्ञान प्रणालियों का प्रतिनिधित्व।

संग्रहालय दीर्घा (म्यूजियम गैलरी), सार्वजनिक जगहों, आगंतुक सुविधाओं और लैंडस्केप के हिस्सों में शिल्प से जुड़े संभावित सुधारों की पहचान।

कारीगर समुदायों और डिजाइन टीमों के साथ लगातार जुड़े रहने के लिए थीम-आधारित कामकाजी समूह बनाना।

संग्रहलाय परियोजना में टिकाऊ सामग्री के इस्तेमाल, पारंपरिक निर्माण तरीकों और समुदाय की भागीदारी पर सुझावों का दस्तावेजीकरण।

वेंडर विकास कार्यक्रम: विश्व स्तरीय संग्रहालय के लिए वैश्विक भागीदारी बनाना

इसके बाद, मंत्रालय ने 7-8 सितंबर 2026 को वेंडर विकास कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, विनिर्माताओं, तकनीक प्रदाताओं और विशेषज्ञ एजेंसियों को एक साथ लाया गया, जिनके उत्पादों और विशेषज्ञता संग्रहालय के विकास में योगदान दे सकते थे।

इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों को 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' के दायरे, विजन, तकनीकी जरूरतों और गुणवत्ता के मानकों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, उन्हें परियोजना सलाहकारों, डिजाइनरों और हितधारकों के साथ बातचीत करने के लिए एक व्यवस्थित मंच भी मिला।

वेंडर विकास कार्यक्रम में आज के दौर के संग्रहालय विकास से जुड़ी परियोजनाओं, सामग्रियों और तकनीक से जुड़े समाधानों का खास प्रदर्शन भी किया गया। हिस्सा लेने वाली कंपनियों ने म्यूजियम-ग्रेड डिस्प्ले केस, लाइटिंग व्यवस्था, संरक्षण सामग्री, डिजिटल तकनीक, इमर्सिव मीडिया समाधान, वे-फाइंडिंग प्रणआली, खास इंटीरियर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपोनेंट्स का प्रदर्शन किया, जिससे हितधारक उत्पादों का मूल्यांकन कर सकें और विस्तृत तकनीकी चर्चा कर सकें।

इस कार्यक्रम में शामिल कंपनियों ने दुनिया के बेहतरीन संग्रहालय की योजना, निर्माण और संचालन के लिए जरूरी कई खास क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। इनमें म्यूजियम-ग्रेड डिस्प्ले और संरक्षण शोकेस व्यवस्था, खास ग्लेजिंग समाधान, आर्किटेक्चरल और प्रदर्शनी लाइटिंग, ऑडियो-विज़ुअल और इमर्सिव मीडिया तकनीक, इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्टोरीटेलिंग टूल, संरक्षण और कलेक्शन-केयर टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और निगरानी सिस्टम, प्रदर्शनी निर्माण और सीनोग्राफ़ी, रास्ता बताने और साइनेज समाधान, संग्रहालय के खास इंटीरियर और फिनिश, स्मार्ट बिल्डिंग सिस्टम, पर्यावरण नियंत्रण इंफ्रास्ट्रक्चर और विजिटर एंगेजमेंट के उन्नत एडवांस्ड प्लेटफॉर्म शामिल थे। इन अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों की भागीदारी से आधुनिक संग्रहालय तकनीक, उत्पादों और सेवाओं की व्यापक जानकारी मिली। साथ ही, 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' के लिए नवाचार, गुणवत्ता मानकों, स्थानीयकरण के मौकों और दुनिया के बेहतरीन तौर-तरीकों को अपनाने पर विस्तार से चर्चा करने का मौका भी मिला। इन चर्चाओं के ज़रिए, कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे समाधान खोजना था जो एक ऐसी संग्रहालय सुविधा बनाने में मदद करें जो तकनीकी रूप से उन्नत हो, आगंतुकों पर केंद्रित हो और संरक्षण के प्रति संवेदनशील हो-और जो दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक संस्थानों में से एक के अनुकूल हो।

वेंडर विकास कार्यक्रम के मुख्य नतीजे

  • भारत और विदेशों की लगभग 200 कंपनियों और संगठनों की भागीदारी, जो संग्रहालय, सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजाइन, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • 10 प्रमुख विशेष डोमेन और तकनीक श्रेणी में प्रतिनिधित्व, जिसमें संग्रहालय शोकेस, संरक्षण प्रणाली, लाइटिंग, ऑडियो-विजुअल तकनीक, इमर्सिव मीडिया, सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रदर्शनी निर्माण, स्मार्ट बिल्डिंग प्रणाली और विजिटर एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • भाग लेने वाली कंपनियों द्वारा 70 खास क्षमताओं पर केंद्रित प्रस्तुतियां और तकनीकी पिच, जिसमें 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' के लिए प्रासंगिक उत्पाद, तकनीक, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव, विनिर्माण क्षमताएं और नवीन समाधान दिखाए गए।
  • भाग लेने वाली कंपनियों, परियोजना सलाहकारों, डिजाइनरों और हिदधारकों के बीच 200 द्विपक्षीय बैठकें, जिससे तकनीकी विशेषताओं, डिजाइन एकीकरण, खरीद के तरीकों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हो सकी।
  • 'मेक इन इंडिया' सहयोग, स्थानीयकरण के अवसरों, तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रम और रणनीतिक साझेदारी पर केंद्रित 80 चर्चाएं, जिनका उद्देश्य विशेष संग्रहालय उत्पादों, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना था।
  • महत्वपूर्ण संग्रहालय इंफ्रास्ट्रक्चर श्रेणी में संभावित भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों की पहचान, जिसमें डिस्प्ले प्रणाली, संरक्षण तकनीक, स्पेशलाइज्ड लाइटिंग, डिजिटल और इमर्सिव अनुभव, सुरक्षा सिस्टम, पर्यावरण नियंत्रण और प्रदर्शनी फिट-आउट शामिल हैं।
  • 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' के लिए भविष्य की खरीद, नवाचार, सहयोग और कार्यान्वयन की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक व्यापक वेंडर इकोसिस्टम डेटाबेस बनाना।
  • भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में उद्योग की भागीदारी के लिए नए अवसर पैदा करना, साथ ही म्यूजियम और हेरिटेज सेक्टर में नवाचार, क्षमता-निर्माण और वैश्विक-गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देना।
  • संस्कृति मंत्रालय, परियोजना सलाहकार, उद्योग हितधारकों और तकनीक प्रदाताओं के बीच निरंतर जुड़ाव के लिए एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म की स्थापना, ताकि संग्रहालय विकास और कार्यान्वयन के अगले चरणों में आगे बढ़ सके।

 

भविष्य के संग्रहालय की ओर

संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि ये दोनों कार्यक्रम 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' के सबके सहयोग से होने वाले विकास में अहम पड़ाव हैं। कारीगरों, डिजाइनरों, विनिर्माताओं, तकनीक प्रदाताओं और संस्कृति से जुड़े लोगों को एक साथ लाकर, मंत्रालय यह पक्का करना चाहता है कि संग्रहालय भारत की सांस्कृतिक विरासत को दिखाए और साथ ही संग्रहालय के डिजाइन, जानकारी देने के तरीके और आने वालों के अनुभव में दुनिया के सबसे अच्छे तरीकों को भी अपनाए।

जैसे-जैसे यह परियोजना विकास के अगले चरणों की ओर बढ़ेगा, इन चर्चाओं से वाईवाईबीएम की प्लानिंग और उसे लागू करने की प्रक्रिया में मदद मिलती रहेगी। इसने भारत और दुनिया के प्रमुख लोगों और संस्थाओं को एक साथ लाकर, साझेदारी, ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार को बढ़ावा देकर एक बड़े संग्रहालय को बढ़ावा देने की मुहिम को भी गति दी है। वैश्विक जानकारी और अनुभव को भारत के तेजी से बढ़ते सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण क्षमताओं से जोड़कर, यह पहल भारत को न केवल संग्रहालय विकास के लिए एक बड़े बाजार के तौर पर, बल्कि विश्व स्तरीय संग्रहालय समाधानों और अनुभवों के डिजाइन, उत्पादन और निर्यात के भविष्य के केंद्र के तौर पर भी स्थापित करने में मदद कर रही है।

'युगे युगीन भारत म्यूजियम' की कल्पना एक खास राष्ट्रीय संस्थान के तौर पर की गई है, जो विश्व-स्तरीय प्रदर्शनियों, शानदार अनुभवों, आधुनिक तकनीक और भारत की जीवित सांस्कृतिक परंपराओं को म्यूजियम के ताने-बाने में शामिल करके हजारों सालों की भारत की कहानी को पेश करेगा।

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पीके/केसी/एमपी 


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