विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्टार्टअप्स और निवेशकों के साथ संयुक्त गोलमेज बैठक की; भारत में जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार में निवेश को बढ़ावा देने और उनके विस्तार के लिए 'बायो-निवेश' का शुभारंभ किया


निवेश के बिना नवाचार अधूरा है, और नवाचार के बिना निवेश खुद को बनाए नहीं रख पाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बायो-निवेश; जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार, उद्यमिता और निवेशकों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा, जिससे प्रभावी विकास संभव हो सकेगा

जैव-प्रौद्योगिकी संचालित अगली औद्योगिक क्रांति में भारत को पीछे नहीं रहना चाहिए: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 03 SEP 2026 5:29PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज स्टार्टअप्स और निवेशकों के साथ एक संयुक्त गोलमेज बैठक की। साथ ही, उन्होंने बायो-निवेश का भी शुभारंभ किया। यह एक रणनीतिक प्लेटफॉर्म है जिसका उद्देश्य जैव-प्रौद्योगिकी नवोन्मेषकों और निवेश समुदाय के बीच जुड़ाव को मजबूत करना है, ताकि होनहार जैव-प्रौद्योगिकी नवोन्मेषकों को बड़े पैमाने पर ले जाने और व्यवसायीकरण के लिए निजी पूंजी के प्रवाह को तेज किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निवेश के बिना नवाचार अधूरा है, और नवाचार के बिना निवेश बना नहीं रह सकता। इसलिए, भारत के जैव-प्रौद्योगिकी संचालित विकास के लिए नवोन्मेषकों, निवेशकों, उद्योग जगत और सरकार के बीच करीबी जुड़ाव बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि बायो-निवेश उस सेतु को बनाने में मदद करेगा, जिसकी ज़रूरत संभावनापूर्ण विचारों को अनुसंधान और उद्यमिता से आगे बढ़कर उद्योग, बड़े पैमाने और बाज़ार तक ले जाने के लिए होती है।

बायो-निवेश में भाग लेने वाले नवोन्मेषकों और निवेशकों के साथ बातचीत के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि जैव-प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को "पांच साल में पांच बड़ी कंपनियां" बनाने के तरीके पर विचार करना चाहिए। अंतरिक्ष क्षेत्र के नवोन्मेषकों और उद्यमियों के साथ गोलमेज बैठक के दौरान हाल ही में हुई बातचीत में इसी तरह के एक विचार का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ बड़ी एंकर कंपनियां बनाने के लिए खास तौर पर संसाधन लगाने से ऐसा इकोसिस्टम बन सकता है, जिसकी छत्रछाया में दूसरे स्टार्टअप्स भी बढ़ सकते हैं और अपना विस्तार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक क्षेत्र से निकले विचार को दूसरे क्षेत्र में लागू करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है, जहां भी यह मुमकिन हो।

मंत्री ने कहा कि उद्देश्य ऐसा इकोसिस्टम बनाना होना चाहिए जिसमें विज्ञान और पूंजी, नवाचार और उद्योग तथा अनुसंधान और बाजार का संयोजन हो। उन्होंने कहा कि सरकार माहौल बना सकती है और शुरुआती जोखिम उठा सकती है, लेकिन वृद्धि बनाए रखने, कंपनियां खड़ी करने और तकनीक को बड़े पैमाने पर ले जाने में निजी पूंजी की अहम भूमिका होती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति ला सकती है और भारत को देर से शुरुआत करने वाली गलती नहीं दोहरानी चाहिए, जैसा कि आईटी क्रांति के समय हुआ था, जब देश लगभग एक दशक पीछे रह गया था। उन्होंने कहा कि बायो-निवेश जैसी पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारत तकनीक संचालित विकास के अगले चरण से पैदा होने वाले मौकों का फायदा उठाने के लिए तैयार रहे।

मंत्री ने कहा कि बायो-निवेश दृष्टिकोण सरकार के व्यापक "पूरी सरकार और पूरा राष्ट्र" वाले नज़रिए को प्रतिबिंबित करता है, क्योंकि जैव-प्रौद्योगिकी में नवाचार और निवेश के लिए कई मंत्रालयों और क्षेत्रों के बीच तालमेल की जरूरत होती है। उन्होंने बीआईआरएसी और बायो-निवेश टीम को बधाई दी कि उन्होंने अलग-अलग हितधारकों को एक साझा मंच दिया है और एक ऐसा एजेंडा आगे बढ़ाया जो सिर्फ़ जैव-प्रौद्योगिकी विभाग तक ही सीमित नहीं है।

हाल की नीतिगत पहलों के अनुभवों के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को खोलने से निवेशकों और उद्यमियों के बीच काफी रुचि पैदा हुई है। उन्होंने परमाणु क्षेत्र को भी निजी कंपनियों के लिए खोलने का भी जिक्र किया, यह कहते हुए कि नीति की घोषणा से ही मजबूत निवेश रुचि उत्पन्न हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधि भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव दिखाते हैं कि सक्षम नीति निर्णय कैसे उन क्षेत्रों में भी निवेश की इच्छा पैदा कर सकते हैं जहाँ पहले निजी भागीदारी सीमित थी।

जैव प्रौद्योगिकी पर, मंत्री ने कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ अधिक जुड़ाव और दोनों पक्षों में सोच बदलने की आवश्यकता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी की अपनी विशेषताएँ हैं, जैसे लंबी विकास प्रक्रियाएँ, विशेष आवश्यकता वाले नियामक रास्ते और महत्वपूर्ण पूँजी आवश्यकताएँ, जबकि सफल नवाचार दीर्घकालिक मूल्य और स्वास्थ्य, समाज और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

मंत्री ने निवेशकों से कहा कि वे तात्कालिक वित्तपोषण दौर तक ही सीमित न रहें, बल्कि तकनीक, बौद्धिक संपदा, विकास का रतीका, बाजार की संभावनाओं और भारत में वैश्विकं प्रतिस्पर्धी कंपनियों के निर्माण की संभावना का भी मूल्यांकन करें। उन्होंने नवोन्मेषकों को शुरुआत में ही निवेशकों के साथ जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया, यह बताते हुए कि सही निवेशक न केवल पूंजी बल्कि रणनीतिक ज्ञान, साझेदारी, उत्पादन क्षमता, बाजार तक पहुंच और वैश्विक नेटवर्क भी ला सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती जैव अर्थव्यवस्था उसके युवा वैज्ञानिकों, उद्यमियों और नवाचार इकोसिस्टम की संभावनाओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अगले चरण को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संभावनापूर्ण जैव-प्रौद्योगिकी नवाचारों को वह पूंजी, साझेदारी और बाजार तक पहुंच मिल सके जो उन्हें प्रयोगशाला से बड़े पैमाने पर और बड़े पैमाने से वैश्विक बाजार तक ले जाने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ सार्वजनिक वित्तपोषण हर संभावनाशील नवाचार को बाज़ार और पैमाने तक नहीं पहुँचा सकता, और सरकारी समर्थन का उद्देश्य प्रारंभिक चरण के जोखिम को कम करके, तकनीकी क्षमता को दिखाकर और नवाचारों को निजी पूंजी के लिए निवेश योग्य बनाकर उत्प्रेरक की भूमिका निभाने की होनी चाहिए।

मंत्री ने अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड का भी ज़िक्र किया, जिसका बजट 1 लाख करोड़ है, और जिसके तहत बीआईआरएसी को जैव-प्रौद्योगिकी और संबंधित क्षेत्रों के लिए द्वितीय-स्तर के कोष प्रबंधक के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ढांचा तकनीक विकासकर्ता, स्टार्टअप और कंपनियों के लिए लंबी अवधि की धैर्यपूर्ण पूंजी मुहैया कराएगा, जो रणनीतिक जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम कर रही हैं, खासकर उन परियोजनाओं के लिए जो तकनीक के उपयोग, पैमाना बढ़ाने और नवाचार-आधारित निर्माण के लिए तैयार हैं।

पहले बायो-निवेश में 20 उच्च संभावना वाले जैव-प्रौद्योगिकी /डीप-टेक स्टार्टअप्स और लगभग 50 निवेशकों के एक विशिष्ट समूह एक साथ आये। इस प्लेटफॉर्म को एक दो-तरफा जुड़ाव तंत्र के रूप में डिजाइन किया गया है, जो पारंपरिक स्टार्टअप प्रस्ताव या निवेशक-जुडाव प्रारूप से बढ़कर है, जिससे नवोन्मेषक निवेश की दृष्टि को समझ सकें और निवेशकों को जैव-प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिक, नियामक और विकास मार्गों की गहरी जानकारी मिल सके।

पहले सत्र में स्टार्टअपनिवेशक का प्रत्यक्ष जुडाव हुआ, जिसमें 20 स्टार्टअप्स को नवाचार, विकास चरण, बाजार संभावना, पैमाना विस्तार और नियामक तैयारियों के आधार पर चुना गया। दूसरे सत्र में मंत्री ने प्रतिभागी निवेशकों और स्टार्टअप्स के साथ बातचीत की, जिसमें पूंजी तक पहुँच, वाणिज्यीकरण, पैमाना विस्तार और नवाचार-आधारित वृद्धि के लिए सहायक उपायों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, डीजी-बीआरआईसी और अध्यक्ष, बीआईआरएसी; डॉ. धनंजय तिवारी, वरिष्ठ सलाहकार, डीबीटी और प्रबंध निदेशक, बीआईआरएसी; प्रशांत प्रकाश, संस्थापक भागीदार, एक्सेल इंडिया तथा निवेशक और स्टार्टअप समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बायो-निवेश को अंततः निवेश प्रस्ताव देने या बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि बनायी गयी साझेदारी, जुटाए गए निवेश, उपयोग की गयी तकनीकों और बाजार में लाए गए उत्पादों से आंका जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा व्यक्त किया कि यह प्लेटफ़ॉर्म भारत में नवाचार-निवेश इंटरफेस को मजबूत करने और जैव-प्रौद्योगिकी नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक और भारत से दुनिया तक पहुंचाने में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक माध्यम बनेगा।

बायो-निवेश को एक आवर्ती प्लेटफ़ॉर्म के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें विभिन्न शहरों में आगामी संस्करण प्रस्तावित हैं ताकि सहभागिता को बढ़ाया जा सके, क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी नवाचार इकोसिस्टम को निवेश नेटवर्क से जोड़ा जा सके और नवोन्मेषकों और निवेशकों के बीच सतत सहभागिता बनाई जा सके।


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पीके / केसी / जेके


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