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सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना
“भारत के विकेंद्रित अनाज भंडारण का सुदृढ़ीकरण”
प्रविष्टि तिथि:
03 SEP 2026 12:23PM by PIB Delhi
भारत के बढ़ते कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों ने देश भर में विकेंद्रित अनाज भंडारण अवसंरचना के महत्व को बढ़ा दिया है। वर्ष 2023 में शुरू की गई सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना का उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों में सुधार करना है। यह योजना मौजूदा सरकारी योजनाओं को एक साथ लाकर एक एकीकृत और सहकारिता संचालित दृष्टिकोण अपनाती है। इसे संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता प्रणालियों का समर्थन प्राप्त है। 9,750 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के साथ 11 राज्यों/पैक्स में प्रायोगिक परियोजनाओं के रूप में शुरू की गई इस योजना का निरंतर विस्तार हुआ है। जुलाई 2026 तक देश भर के 313 पैक्स में गोदाम निर्माण का कार्य पूरा हो चुका था जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इस अवसंरचना में गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और परिचालन व्यवहार्यता पर जोर दिया गया है।
बढ़ती कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भंडारण क्षमता का निर्माण
भारत की अनाज भंडारण व्यवस्था पारंपरिक भंडारण पद्धतियों, विकेंद्रित स्थानीय प्रणालियों और आधुनिक अवसंरचना के जरिए विकसित हुई है। इस एकीकृत दृष्टिकोण ने खाद्य संरक्षण को मजबूत कर देश की खाद्य सुरक्षा को सहारा दिया है। अनाज रखने के लिए भंडारगृहों और साइलो आधारित अवसंरचना के साथ ही मिट्टी के पात्र, भूमिगत भंडार और मिट्टी से लेपे गये भंडारण ढांचे जैसे पारंपरिक तरीके भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन बढ़ते कृषि उत्पादन और बढ़ती खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं ने देश भर में आधुनिक और विकेंद्रित भंडारण सुविधाओं की जरूरत को बढ़ा दिया है।
तीसरे अग्रिम अनुमान (2025-26) के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहा। यह इससे पहले के साल के 357.732 मिलियन टन के उत्पादन से लगभग 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत अधिक है। भारत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत दुनिया का सबसे बढ़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम भी चलाता है जिसके दायरे में लगभग 80 करोड़ लोग आते हैं। इन आवश्यकताओं को पूरा करना अनाज भंडारण सुविधाओं के एक मजबूत नेटवर्क पर निर्भर करता है। इस संबंध में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्यों की एजेंसियों द्वारा प्रबंधित केन्द्रीकृत भंडारण अवसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन विकेंद्रित सुविधाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं। सहकारिता मंत्रालय ने उत्पादन केंद्रों के नजदीक ही भंडारण की आवश्यकता पर जोर दिया है। ये सुविधाएं खरीद केंद्रों के बीच परिवहन लागत को घटाने, खाद्यान्न की बर्बादी कम करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूती देने पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

इस सिलसिले में सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना को 31 मई 2023 को एक प्रायोगिक परियोजना के तौर पर शुरू किया गया था। यह पहल सहकारिता के जरिए विकेंद्रित अनाज भंडारण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। सहकारी ढांचे पर आधारित इस पहल के उद्देश्य इस प्रकार हैः
- खाद्यान्न की बर्बादी घटाते हुए खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना।
- किसानों को ऐसे विकल्प देना जिनसे वे हड़बड़ी में बिक्री से बचते हुए फसल की बेहतर कीमत प्राप्त कर सकें।
- खरीद केंद्रों, भंडारगृहों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच परिवहन लागत को घटाना।
- कृषि गतिविधियों के विविधीकरण के माध्यम से पैक्स की भूमिका का विस्तार करना। पैक्स ग्रामीणों को अल्पावधि ऋण और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली गांव के स्तर की संस्थाएं हैं। वे ऋण भुगतान में भी मदद करती हैं।
- किसानों के लिए उच्च आय के अवसरों को बढ़ावा देना।
एकीकृत अवसंरचना और संमिलन फ्रेमवर्क
सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना का उद्देश्य पैक्स स्तर पर एकीकृत कृषि अवसंरचना का निर्माण करना है। यह प्रणाली वर्तमान सरकारी योजनाओं के मेल के माध्यम से संचालित होती है:
- कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना: फसल कटाई के बाद की अवसंरचना के निर्माण और उन्नयन के लिए वित्तपोषण और ब्याज में छूट की सुविधा देती है।
- कृषि विपणन अवसंरचना योजना (एएमआई): खाद्यान्न भंडारण सुविधाओं के निर्माण के लिए बैक-एंडेड पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है।
- कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम): कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना और कृषि मशीनों तक पहुंच को सुगम बनाती है।
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमइ): सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक रूप देने और विकास को बढ़ावा देती है।
इन योजनाओं के एक साथ आने से पैक्स एकीकृत ग्रामीण सेवा केंद्रों के रूप में विकसित हो पाते हैं, जिससे कृषि अवसंरचना मजबूत होती है, मूल्य श्रृंखलाओं में सुधार होता है और किसानों की आय बढ़ती है।
सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत प्रमुख सुविधाएं और सेवाएं शामिल हैं:
- कस्टम हायरिंग सेंटर: ये पैक्स को किसानों को किराए पर देने के लिए कृषि मशीनरी खरीदने में मदद करते हैं। इन उपकरणों में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, टिलर और अन्य कृषि मशीनें शामिल हो सकती हैं।
- उचित दर की दुकानें: ये स्थानीय समुदायों के भीतर अनाज वितरण और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की बिक्री में मदद करती हैं।
- प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां: ये अनाज की सफाई, छंटाई और सुखाने जैसी प्राथमिक प्रसंस्करण का काम करती हैं, जिससे उपज की गुणवत्ता और बाजार में उसकी मांग बेहतर होती है।
- खरीद केंद्र: ये राज्य एजेंसियों और भारतीय खाद्य निगम के लिए पैक्स द्वारा अनाज की खरीद में मदद करते हैं।
- साइलो-आधारित/भंडारण अवसंरचना योजना: इस योजना में सहकारी भंडारण मॉडल के तहत 50 मीट्रिक टन, 100 मीट्रिक टन और 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले साइलो/गोदाम स्थापित किए जाते हैं।

कार्यान्वयन फ्रेमवर्क योजना के तहत भाग लेने वाली पैक्स के लिए संस्थागत और पात्रता मानदंड भी तय किए गए हैं।
पैक्स का चयन और संस्थागत फ्रेमवर्क
"मार्गदर्शिका" (मानक संचालन प्रक्रिया) के अनुसार, जिला सहकारी विकास समितियों द्वारा पैक्स की पहचान की जाती है और उन्हें स्वीकृति प्रदान की जाती है। पैक्स का चयन उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां अनाज भंडारण की मांग होती है।
यह योजना अवसंरचना के विकास के लिए भूमि से संबंधित शर्तें भी निर्धारित करती है। बेहतर होगा कि पैक्स के पास अपनी ज़मीन हो। भूमि जलभराव वाली नहीं होनी चाहिए और न ही वन क्षेत्र में स्थित होनी चाहिए। भूमि के उपयोग के लिए पैक्स सदस्यों की सहमति आवश्यक है। लीज (पट्टे) पर ली गई भूमि के लिए, लीज की अवधि 20 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

कार्यान्वयन की प्रक्रिया:
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना की कार्यान्वयन एजेंसी है। इसे लागू करने में राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तरों पर तालमेल से मदद मिलती है। राष्ट्रीय स्तर पर: एक अंतर-मंत्रालयी समिति योजना के समग्र कार्यान्वयन की निगरानी करती है। परिचालन समन्वय: राष्ट्रीय स्तरीय समन्वय समिति भाग लेने वाले संस्थानों और एजेंसियों के बीच कामकाज के तालमेल में मदद करती है। राज्य और जिला स्तर पर राज्य सहकारी विकास समितियां और जिला सहकारी विकास समितियां राज्य और जिला स्तर पर कार्यान्वयन और समन्वय में मदद करती हैं।
वित्तीय सहायता और परियोजना की व्यवहार्यता
सरकार ने योजना के तहत परियोजना की व्यवहार्यता में सुधार के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें एएमआई योजना के तहत सब्सिडी को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 33.33 प्रतिशत करना, मार्जिन मनी की आवश्यकता को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना और गोदाम बनाने की लागत के नियमों में बदलाव करना शामिल है।
पात्र योजनाओं के तहत ब्याज सहायता और ऋण सहायता प्रणाली के माध्यम से भी वित्तीय सहायता मिलती है। एएमआई योजना के तहत, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) पात्र परियोजनाओं के लिए सब्सिडी देने वाली एजेंसी के तौर पर काम करता है। राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पैक्स के लिए मुख्य ऋणदाता संस्थानों के रूप में कार्य करते हैं। ये संस्थान कार्यान्वयन ढांचे के तहत ऋण स्वीकृत करने और उसे जारी करने के लिए जिम्मेदार हैं।
यह योजना भाग लेने वाली सहकारी समितियों पर वित्तीय बोझ को कम करने के लिए नाबार्ड की विशेष पुनर्वित्त सुविधा का भी उपयोग करती है। जब इसे एआईएफ के तहत मिलने वाली 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के साथ जोड़ा जाता है, तो इस योजना के तहत पैक्स के लिए प्रभावी ऋण ब्याज दर घटकर केवल 1 प्रतिशत रह जाती है।
भारतीय खाद्य निगम को भी निर्धारित शर्तों के अधीन योजना के तहत निर्मित पात्र गोदामों को अनिवार्य रूप से किराए पर लेने के लिए अधिकृत किया गया है। यह उपाय भंडारण परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता को बढ़ाता है और पैक्स की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
इस ढांचे के चालू होने के बाद, कार्यान्वयन एक चरणबद्ध विस्तार रणनीति के माध्यम से आगे बढ़ा है।
प्रायोगिक परियोजना से विस्तार तक
यह योजना एक चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति के माध्यम से आगे बढ़ी है, जिसकी शुरुआत प्रायोगिक परियोजना से हुई और फिर इसे बड़े पैमाने पर विस्तार दिया गया। प्रायोगिक चरण के तहत, 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदाम निर्माण का कार्य पूरा किया गया, जिससे 9,750 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ। ये प्रायोगिक परियोजनाएं महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा में लागू की गईं। इन प्रायोगिक परियोजनाओं ने काम-काज के लिए एक ज़रूरी आधार तैयार किया है और सहकारी स्तर पर स्थानीय भंडारण अवसंरचना की व्यवहार्यता को साबित किया है।
इस आधार पर आगे बढ़ते हुए, इसके लागू होने का दायरा काफी बढ़ गया है। जुलाई 2026 तक, इस योजना के तहत 1012 पैक्स या सहकारी समितियों की पहचान की गई थी। जुलाई 2026 तक, 313 पैक्स में गोदामों का निर्माण भी पूरा हो चुका था, जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक की भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ।

यह प्रगति अवधारणा से बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की ओर बदलाव को दर्शाती है।
सहकारी भंडारण का क्रियान्वयन: नेरपिंगलाई पैक्स
महाराष्ट्र के अमरावती स्थित नेरपिंगलाई पैक्स ने सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत 3,000 मीट्रिक टन क्षमता का एक गोदाम बनाया है। इस परियोजना को कृषि विपणन अवसंरचना और कृषि अवसंरचना कोष योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त हुई। नाबार्ड की पुनर्वित्त (रीफाइनेंस) सहायता से, इस परियोजना के लिए प्रभावी ऋण ब्याज दर घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई। लगभग 300 किसान इस गोदाम में सोयाबीन की करीब 32,000 बोरियां जमा कर रहे हैं। समिति ने जमा की गई उपज के बदले लगभग 4.50 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि भी प्रदान की है और किसानों को मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने से बचाया जा सका है। पैक्स को किराए से सालाना लगभग 7.68 लाख रुपये और वार्षिक ब्याज आय के माध्यम से करीब 54 लाख रुपये की आय होने की उम्मीद है। इस गोदाम ने आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए भंडारण तक पहुंच में सुधार किया है और सहकारी समिति के आय आधार को मजबूत किया है। इस पहल से रोजगार के स्थानीय अवसर भी पैदा हुए हैं। यह दर्शाता है कि कैसे विकेंद्रीकृत भंडारण अवसंरचना किसान सहायता प्रणालियों और ग्रामीण सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ कर सकती है।

रपिंगाली पीएसीएस गोदाम और सोसाइटी सदस्य स्रोत:सहकारिता मंत्रालय
गुणवत्ता मानदंड, ब्रांडिंग और पारदर्शिता
यह योजना इस पहल के तहत निर्मित भंडारण अवसंरचना के लिए एक जैसी ब्रांडिंग दिशा-निर्देश प्रदान करती है। प्रत्येक भंडारण संरचना पर स्वीकृत 'ग्रेन स्टोरेज लोगो' और निर्धारित रंग योजना (कलर स्कीम) को प्रदर्शित करना अनिवार्य है। इसका मकसद इस पहल की एक पहचान बनाना और इससे जुड़े लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है।

गुणवत्ता आश्वासन:
यह मॉडल गोदाम निर्माण और रखरखाव के लिए गुणवत्ता मानदंड निर्धारित करता है। भंडारण संरचनाओं को भंडारण विकास और विनियामक प्राधिकरण के मानदंडों का पालन करना चाहिए और उन्हें स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होना चाहिए। साथ ही अनाज को खराब होने से बचाने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हवा आने-जाने की सही व्यवस्था होनी चाहिए।
डिज़ाइन विशिष्टताओं और सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता ऑडिट की आवश्यकता होती है। पैक्स सदस्यों से परियोजना की प्रगति की निगरानी करने की अपेक्षा की जाती है, जबकि परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) कार्यान्वयन दृष्टिकोण के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए निर्माण गतिविधियों और व्यय पर अपडेट साझा करते हैं।
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के तहत निर्मित अवसंरचना दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ, जवाबदेह और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनी रहे।
भारत के विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण नेटवर्क को मज़बूत करना
सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि अवसंरचना को बेहतर बनाने की एक एकीकृत पहल है। पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियां) स्तर पर भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण को जोड़कर, यह योजना उत्पादन केंद्रों के करीब ही खाद्यान्न प्रबंधन को मज़बूत करती है।
यह पहल खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करती है, बर्बादी कम करती है और ग्रामीण सहकारी संस्थाओं को मज़बूत बनाती है। इस योजना का चरणबद्ध विस्तार मौजूदा योजनाओं के तालमेल, संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तंत्र के ज़रिए किया जा रहा है। यह ढांचा देश में विकेंद्रीकृत कृषि अवसंरचना और दीर्घकालिक खाद्यान्न प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एक सहकारिता-आधारित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
संदर्भ
सहकारिता मंत्रालय
https://www.cooperation.gov.in/en/worlds-largest-grain-storage-plan-cooperative-sector-0
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2146718®=3&lang=2
https://www.cooperation.gov.in/sites/default/files/2025-08/DGSP%20English%20Margdarshika%20SOP.pdf
https://www.cooperation.gov.in/en/worlds-largest-decentralized-grain-storage-program-cooperative-sector-ensure-food-security
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2241928®=3&lang=1
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय तथा आईसीएआर
http://www.ftic.co.il/2016NewDelhiPDF/PP047-052-A008-SESSION02.pdf
https://agriwelfare.gov.in/Documents/Time_Series_3rdAE_2025_26_En.pdf
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
https://dfpd.gov.in/WriteReadData/AnnualRecordUploadDocuments/b9c640b8-5889-4ffd-a62d-5b56c5d4f029_Food%20AR%202024-25%20English%20small%20size.pdf
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2210211
वित्त मंत्रालय
https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf
पीआईबी बैकग्राउंडर
https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2172351®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2215759®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150721®=48&lang=1
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