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आर्थिक चुनौतियों से लेकर अकादमिक करियर तक: एनएफएससी सहायता ने डॉ. जानकी सुंदरराजन को कैसे सशक्त बनाया
प्रविष्टि तिथि:
28 AUG 2026 3:31PM by PIB Delhi
सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले पूर्णकालिक शोधार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के खर्चों का वहन करना कठिन हो सकता है। समय पर मिलने वाली फेलोशिप सहायता इस बोझ को कम कर सकती है और शोधार्थियों को अधिक आत्मविश्वास एवं एकाग्रता के साथ अपनी शैक्षणिक आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बना सकती है।
अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप (एनएफएससी) योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता के प्रभाव को प्रदर्शित करते हुए तमिलनाडु के डिंडीगुल की 32 वर्षीय शोधार्थी डॉ. जानकी सुंदरराजन ने आर्थिक और शैक्षणिक बाधाओं को पार कर अपनी पीएचडी पूरी की तथा अध्यापन और अनुसंधान में अपना करियर बनाया।
एनएफएससी योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने से पहले डॉ. जानकी को 2019 से 2024 तक अपनी पीएचडी की अवधि के दौरान शोध संबंधी खर्चों और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रबंधन में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पूर्णकालिक शोधार्थी होने के नाते व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्थिर वित्तीय सहायता के अभाव में अपने शोध को जारी रखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।
उन्हें शोध सामग्री और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच प्राप्त करने, सम्मेलनों में भाग लेने, क्षेत्रीय अध्ययन करने, आंकड़े एकत्र करने, शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए यात्रा करने तथा प्रकाशन संबंधी गतिविधियां करने में भी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। सीमित वित्तीय सहायता के कारण वह अपने डॉक्टरेट शोध पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थीं।
इन बाधाओं के बावजूद डॉ. जानकी अपनी शैक्षणिक यात्रा के प्रति प्रतिबद्ध रहीं। उनका लक्ष्य पीएचडी पूरी करके शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित शिक्षाविद और शोधकर्ता बनना था। विशेष रूप से उनका ध्यान शिक्षक शिक्षा, डिजिटल शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान पर था।
डॉ. जानकी एक सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आती हैं, जहां आर्थिक सीमाओं के बावजूद शिक्षा को महत्वपूर्ण माना जाता था। उनके परिवार ने उनकी उच्च शिक्षा की यात्रा में लगातार उनका प्रोत्साहन किया, लेकिन पूर्णकालिक शोध से जुड़े खर्चों को वहन करने से परिवार पर काफी आर्थिक दबाव पड़ा।
उन्होंने सितंबर 2019 में एनएफएससी योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त करना शुरू किया। इस योजना के तहत उन्हें प्रति माह 35,000 रुपये की वरिष्ठ अनुसंधान फेलोशिप प्राप्त हुई।

इस फेलोशिप ने उन्हें शोध सामग्री, इंटरनेट सुविधा, आंकड़ा संग्रह, शैक्षणिक यात्राओं और प्रकाशन संबंधी गतिविधियों से जुड़े खर्चों का प्रबंधन करने में सहायता की। इससे आर्थिक तनाव कम हुआ और वह अधिक आत्मविश्वास एवं समर्पण के साथ अपनी पीएचडी पूरी करने पर प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकीं।
वित्तीय सहायता से आगे बढ़कर एनएफएससी फेलोशिप ने उनकी डॉक्टरेट यात्रा के दौरान उन्हें स्थिरता और प्रेरणा प्रदान की। इसने उनकी शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्य और पेशेवर विकास में सहायता की तथा उनके परिवार पर वित्तीय बोझ को कम किया।
एनएफएससी योजना के अंतर्गत प्राप्त सहायता से उनमें बिना किसी रुकावट के अपनी पीएचडी रिसर्च जारी रखने का आत्मविश्वास बढ़ा। इससे उन्हें शैक्षणिक गतिविधियों, शोध पत्र प्रकाशनों और पेशेवर विकास पर अधिक ध्यान देने में सहायता मिली। इस सहायता ने उनके पेशेवर विकास के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत आत्मविश्वास को भी मजबूत किया।
डॉ. जानकी वर्तमान में गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान (डीम्ड विश्वविद्यालय) में एक अतिथि शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। इस फेलोशिप ने उनके शैक्षणिक करियर को मजबूत किया है और उन्हें अध्यापन एवं अनुसंधान के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के अपने लक्ष्य के और करीब पहुंचने में सक्षम बनाया है।
डॉ. जानकी ने फेलोशिप सहायता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा,
“एनएफएससी फेलोशिप ने मुझे आर्थिक स्थिरता प्रदान की और बिना किसी रुकावट के अपने पीएचडी शोध को जारी रखने का आत्मविश्वास दिया। इससे मेरे परिवार पर वित्तीय बोझ कम हुआ, मेरे शोध और पेशेवर विकास में सहायता मिली तथा अध्यापन एवं अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने की मेरी राह मजबूत हुई।”
दृढ़ संकल्प और एनएफएससी योजना के अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से डॉ. जानकी ने पूर्णकालिक शोध के दौरान आर्थिक चुनौतियों का सामना करने से लेकर अपनी पीएचडी पूरी करने और अकादमिक करियर बनाने तक की यात्रा पूरी की। उनकी यह यात्रा शोध संबंधी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और पेशेवर अवसरों को मजबूत करने में फेलोशिप सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
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पीके/केसी/आईएम/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2304406)
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