इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
ईसीएमएस से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में तेजी: 38 संयंत्र चालू, 16 का निर्माण कार्य अंतिम चरण में
106 ईसीएमएस परियोजनाओं को स्वीकृति; ₹69,548 करोड़ के निवेश से लगभग 75 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे
ईसीएमएस जरूरी घटकों और कच्चे माल के पहली बार घरेलू विनिर्माण के जरिए 'स्वदेशी' मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा दे रहा है
ईसीएमएस की क्षमता घरेलू मांग को पूरा करते हुए उससे भी आगे निकलने के साथ, इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है
प्रविष्टि तिथि:
17 AUG 2026 7:41PM by PIB Delhi
पूर्व में ₹61,671 करोड़ के निवेश वाले 75 आवेदनों को स्वीकृति दिए जाने के क्रम में, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत ₹6,844 करोड़ के अनुमानित निवेश वाले 31 और प्रस्तावों को मंजूरी दी है। स्वीकृति पत्र सौंपने का यह कार्यक्रम नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ईएलसीआईएनए) के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिकी और आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिकी और आईटी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद, सचिव, माइटी श्री एस. कृष्णन, संयुक्त सचिव, माइटी श्री सुशील पाल और प्रेसिडेंट, ईएलसीआईएनए श्री शशिकुमार गंधम भी शामिल हुए।

इस कार्यक्रम में बोलते हुए, इलेक्ट्रॉनिकी और आईटी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) एक मजबूत और गहरी पैठ वाली 'स्वदेशी' इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला के विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। यह योजना सिर्फ असेंबली से आगे बढ़कर जरूरी घटकों और अहम कच्चे माल के घरेलू विनिर्माण की ओर बढ़ रही है। अब तक मंजूर की गईं 106 परियोजनाओं में से (जिनमें आज स्वीकृत 31 परियोजनाएं भी शामिल हैं), 38 संयंत्रों में विनिर्माण शुरू हो चुका है, जबकि 16 अन्य परियोजनाएं विनिर्माण या मशीनरी लगाने के अग्रिम चरण में हैं। हाल ही में मिली मंजूरी में फिल्टर, कॉइल और स्पीकर जैसे कई अहम घटकों के साथ-साथ एसिटिलीन ब्लैक और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे जरूरी कच्चे माल का पहली बार घरेलू विनिर्माण भी शामिल है।

यह योजना आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है और अब उत्पादन क्षमता देश की पूरी मांग को पूरा कर रही है। असल में, एनोड मटीरियल (110%), ऑप्टिकल ट्रांसीवर एसएफपी (350%) और रिले (200%) जैसे अहम क्षेत्रों में उत्पादन पहले ही मांग से ज्यादा हो गया है।
स्वीकृत 106 परियोजनाओं से 74,628 लोगों को प्रत्यक्ष और 2.5 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं में 15 राज्यों में कुल ₹69,548 करोड़ का निवेश मंजूर किया गया है। वहीं, अकेले आज स्वीकृत 31 परियोजनाओं से 9,588 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत का आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम बनाने का सफर और मजबूत होगा।
इन सभी को मिलाकर, मौजूदा स्वीकृतियों में ₹7,877 करोड़ का निवेश और ₹82,243 करोड़ का अनुमानित उत्पादन शामिल है, और इनसे 9,588 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, पहले से स्वीकृत कंपनी 'विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा लैमिनेट (कॉपर क्लैड) के विनिर्माण के लिए ₹1,033 करोड़ के अतिरिक्त निवेश को भी मंजूरी दी गई है।

वर्तमान स्वीकृतियों में 20 लक्ष्य खंड के उत्पादों का विनिर्माण शामिल है, जिसमें सब-असेंबली, बिना आवरण वाले घटक, आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद और पूंजीगत सामान आके हैं। इनमें शामिल हैं:
- 3 सब-असेंबली: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांसीवर -एसएफपी;
- 10 घटक: एनक्लोजर, कनेक्टर्स, ट्रांसड्यूसर, स्पीकर और माइक्रोफोन, रिले, एंटीना, कॉइल्स, फिल्टर, कैपेसिटर और मेटल शील्डिंग कवर;
- 6 आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद: एनोड सामग्री, रेअर अर्थ परमानेंट मैग्नेट, एसिटिलीन ब्लैक, इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स, कैपेसिटर और हर्मेटिक टर्मिनलों के लिए मेटालाइज्ड फिल्में; और
- पूंजीगत सामान और उनके हिस्से

स्वीकृत परियोजनाएं 10 राज्यों - गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड - में फैले हुए हैं, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक बनाने का दायरा और बढ़ रहा है। कुछ आवेदकों ने कई जगहों या राज्यों में निवेश करने का प्रस्ताव दिया है।
सब-असेंबली श्रेणी में, मिंडा इंस्ट्रूमेंट लिमिटेड और टीएक्सबी ऑप्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड को डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली बनाने की मंजूरी दी गई है। स्काईक्वाड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लायंसेज प्राइवेट लिमिटेड को कैमरा मॉड्यूल सब-असेंबली बनाने की मंजूरी दी गई है।
ऑप्टिकल ट्रांसीवर - एसएफपी के निर्माण के लिए, एसएफओ टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, जीएक्स क्वांटम फोटोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड और ह्यूबर सुहनेर इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को मंजूरी दी गई है।
घटक श्रेणी में, विनिर्माण के लिए मंजूरी निम्नानुसार दी गई है:
- एम्फेनॉल इंटरकनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एन्नोवी मोबिलिटी सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और रोसेनबर्गर इंटरकनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के लिए कनेक्टर;
- एलाइड इंजीनियरिंग वर्क्स लिमिटेड और ग्रुनेर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के लिए रिले;
- सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और सेंसटा टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के लिए ट्रांसड्यूसर;
- सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को फिल्टर;
- ग्लोब कैपेसिटर प्राइवेट लिमिटेड को कैपेसिटर;
- सिर्मा एसजीएस टेक्नोलॉजी लिमिटेड को कॉइल्स;
- वांग्डा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को मेटल शील्डिंग कवर;
- ब्रांडवर्क्स प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड को स्पीकर और माइक्रोफोन;
- ब्रिटानिया आरएफआईडी टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को एंटीना; और
- माइक्रोमैक्स प्रिसिजन मोल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड को संलग्नक (एनक्लोजर्स);
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करने के लिए, नीचे दिए गए आपूर्ति श्रृंखला उत्पादों के विनिर्माण के लिए भी मंजूरी दी गई है:
- ली-आयन (Li-ion) सेल्स के लिए एक जरूरी घटक, एनोड मटीरियल - एप्सिलॉन सी2जीआर प्राइवेट लिमिटेड को;
- रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स - क्वांटम मैग्नेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को;
- ली-आयन सेल्स के लिए एक कंडक्टिव एडिटिव, एसिटिलीन ब्लैक – पीसीबीएल केमिकल लिमिटेड को;
- इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स (इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स) - एक्यूटस केमिकल्स लिमिटेड को; और
- कैपेसिटर के लिए मेटलाइज्ड फिल्म्स - कैपफिल्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को।
- हर्मेटिक टर्मिनल्स - सीलबंद बैरियर के जरिए लीक-प्रूफ इलेक्ट्रिकल रास्ते बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी घटक – जेजे ग्लैस्ट्रोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को।
इसके अलावा, पहले से स्वीकृत एक आवेदक, विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड के लैमिनेट (कॉपर क्लैड) के निर्माण के लिए 1,033 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी गई है।
साथ ही, मौजूदा स्वीकृतियों में पूंजीगत सामान और उनके कलपुर्जों के क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है। पांच आवेदकों - ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड, वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, एक्यूरेट गेजिंग एंड इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और इंड स्फिंक्स प्रिसिजन लिमिटेड - को भी मंजूरी दी गई है।
इन स्वीकृतियों के साथ, कुल मिलाकर, 15 राज्यों में 30 उत्पादों को कवर करने वाले 106 आवेदनों को ईसीएमएस के तहत मंजूरी दे दी गई है, जिसमें 69,548 करोड़ रुपये का अपेक्षित निवेश, 5,34,101 करोड़ रुपये का अनुमानित उत्पादन और 74,628 व्यक्तियों के लिए अपेक्षित प्रत्यक्ष रोजगार शामिल है।
ये स्वीकृतियां घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेंगी, मूल्य संवर्धन को गहरा करेंगी, आयात पर निर्भरता कम करेंगी और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण करेंगी, जिससे भारत एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस)
सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला इकोसिस्टम को मजबूत करने और देश में इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों का एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने के लिए ईसीएमएस शुरू की है।
इसका उद्देश्य प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी), पैसिव कंपोनेंट, इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंपोनेंट, सब-असेंबली, कैमरा मॉड्यूल, ऑप्टिकल ट्रांसीवर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए जरूरी पूंजीगत सामान जैसे अहम घटकों में निवेश को आकर्षित करना है।
यह योजना 'स्वदेशी' इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला के विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसमें सिर्फ असेंबली से आगे बढ़कर जरूरी कलपुर्जों और कच्चे माल के घरेलू विनिर्माण पर जोर दिया जा रहा है। अब तक स्वीकृत 106 परियोजनाओं में से (जिनमें 17 अगस्त को स्वीकृत 31 परियोजनाएं भी शामिल हैं), 38 संयंत्रों में विनिर्माण शुरू हो चुका है, जबकि 16 अन्य परियोजनाओं में निर्माण या मशीनरी लगाने का काम काफी आगे बढ़ चुका है। हाल ही में मिली मंजूरी में फील्टर, कॉइल और स्पीकर जैसे जरूरी पुर्जों के साथ-साथ एसिटिलीन ब्लैक और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे ज़रूरी कच्चे माल की पहली बार घरेलू विनिर्माण भी शामिल है।
यह योजना 'आत्मनिर्भरता' और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रही है, जिसमें एनक्लोजर की क्षमता घरेलू मांग का लगभग 100% पूरा करने में सक्षम है। ईसीएमएस के तहत स्वीकृत निवेश अब ₹69,548 करोड़ हो गया है, जो पहले इस योजना के तहत सोचे गए ₹59,350 करोड़ के निवेश से ज़्यादा है।
इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ईएलसीआईएनए), जिसे 1967 में इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर को समर्थन करने वाले भारत के पहले उद्योग संगठन के तौर पर स्थापित किया गया था, ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और सरकार व अन्य हितधारकों के सामने उद्योग के हितों का प्रतिनिधित्व करने में लंबे समय से अहम भूमिका निभाई है।
पूरे इवेंट का वीडियो यहां देखें।
ज़्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
****
पीके / केसी/ एमपी /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2300695)
आगंतुक पटल : 44