संस्कृति मंत्रालय
संस्कृति मंत्रालय ने दिल्ली, अमृतसर और कोलकाता में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया
राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने भी देश भर में आयोजन किए
कार्यक्रमों में विभाजन के पीड़ितों को स्मरण किया गया और प्रभावित लोगों के धैर्य एवं दृढ़ता को सम्मानित किया गया
प्रविष्टि तिथि:
15 AUG 2026 10:56PM by PIB Delhi
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 14 अगस्त 2026 को दिल्ली, अमृतसर और कोलकाता में आयोजित विभिन्न स्मृति कार्यक्रमों के माध्यम से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। इन कार्यक्रमों में भारत के विभाजन से जुड़ी व्यापक मानवीय पीड़ा, विस्थापन और क्षति को स्मरण किया गया। इन आयोजनों का उद्देश्य विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लोगों की स्मृतियों को संरक्षित करना, उनके साहस और दृढ़ता का सम्मान करना तथा भावी पीढ़ियों को एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय गरिमा के महत्व की याद दिलाना था।

दिल्ली: कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में मुख्य आयोजन

नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में मुख्य आयोजन किया, जिसमें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी; एनडीएमसी के अध्यक्ष एवं सदस्य श्री मनोज कुमार द्विवेदी; राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के सचिव श्री के. महेश; तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एक गंभीर एवं भावपूर्ण स्मरण समारोह तथा विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें अभिलेखीय सामग्री, छायाचित्रों, मानचित्रों और व्यक्तिगत वृत्तांतों के माध्यम से विभाजन से जुड़ी मानवीय कहानियों और अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
14 अगस्त 2026 की सुबह प्रदर्शनी का उद्घाटन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के माननीय गृह, विद्युत, शहरी विकास, शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने किया। यह प्रदर्शनी सभी नागरिकों तथा विद्यार्थियों के लिए खुली थी, जिसमें सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्कूली बच्चों ने प्रदर्शनी का दौरा किया। इस पहल ने युवा आगंतुकों को विभाजन के इतिहास से जुड़ने तथा विस्थापन, बिछड़ने और क्षति का सामना करने वाले लोगों के अनुभवों को समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम में विस्थापित एवं विभाजन से प्रभावित समुदायों के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और योगदान को रेखांकित करने वाली एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का आधिकारिक प्रदर्शन/लोकार्पण भी किया गया। डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी द्वारा संकलित कविताओं के संग्रह “देहरी भई विदेश” (कविता संग्रह) का भी कार्यक्रम के दौरान परिचय कराया गया और औपचारिक रूप से लोकार्पण किया गया। इस संकलन में विभाजन की स्मृतियों, अनुभवों और मानवीय पक्षों पर आधारित काव्यात्मक अभिव्यक्तियों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के माननीय मुख्यमंत्री का संबोधन भी हुआ, जिसके बाद राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” का गायन किया गया।
आयोजन के बाद कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क और उसके आसपास एक मौन मार्च आयोजित किया गया, जो उन लोगों के प्रति एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने अपने प्राण गंवाए, अपने घरों से विस्थापित हुए या विभाजन की कठिनाइयों को सहन किया। मंत्रालय ने विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी के व्यापक प्रसार की भी व्यवस्था की, जिसके तहत प्रदर्शनी की सामग्री को रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने के लिए उपलब्ध कराया गया, जिससे यात्री और नागरिक भारत के इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ सकें। अतीत की त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो, इस संदेश को सुदृढ़ करने के लिए जनसेवा घोषणाएँ भी प्रस्तावित की गईं।






अमृतसर: पंजाब के अनुभव का स्मरण
भारत के विभाजन से प्रभावित लाखों लोगों के जीवन को स्मरण करते हुए तथा राष्ट्र के इतिहास के सबसे त्रासद अध्यायों में से एक के दौरान लोगों द्वारा झेले गए अपार कष्ट, विस्थापन और बलिदानों को याद करते हुए, कल अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (जीएनडीयू) में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम में माननीय केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल तथा राज्यसभा सांसद श्री तरुण चुघ भी उपस्थित रहे।
आयोजन के एक भाग के रूप में एक मौन मार्च आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। यह मार्च विभाजन के दौरान अपने प्राण, घर और आजीविका गंवाने वाले लोगों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया गया तथा इसने इतिहास को स्मरण रखने और उस दौर से गुजरने वाले लोगों की कहानियों को संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में चर्चित नाटक “जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई” की नाट्य प्रस्तुति भी की गई, जो विभाजन और उसके मानवीय प्रभाव पर आधारित है। इस नाटक का मंचन हरपाल तिवाना सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा किया गया, जिसने विभाजन की उथल-पुथल के बीच फँसे लोगों के दर्द, संघर्षशीलता और साझा मानवीय संवेदना को जीवंत कर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विभाजन की विभीषिका को याद रखने तथा उस दौर में पीड़ित लोगों की स्मृतियों और अनुभवों को संरक्षित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्मरण केवल अतीत को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास से सीख लेने और एकता, सद्भाव तथा शांति के मूल्यों को सुदृढ़ करने का माध्यम भी है।
इस अवसर पर विभाजन पर एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विभाजन के दौरान लोगों के अनुभवों और कठिनाइयों को दर्शाने वाली तस्वीरें, अभिलेखीय सामग्री, दस्तावेज और विवरण प्रदर्शित किए गए। इसमें बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने प्रदर्शित सामग्री को देखा और भारत के इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय की गहरी समझ प्राप्त की।
सैकड़ों विद्यार्थियों और नागरिकों की भागीदारी ने सामूहिक स्मरण की प्रबल भावना को प्रतिबिंबित किया तथा युवा पीढ़ी को विभाजन के ऐतिहासिक अनुभवों से जोड़ने के महत्व को पुनः रेखांकित किया।
जीएनडीयू में आयोजित कार्यक्रम विभाजन की मानवीय कीमत की एक भावपूर्ण स्मृति और इसकी भीषण कठिनाइयों को सहने वाले लोगों के साहस एवं संघर्षशीलता को श्रद्धांजलि था। इसने इस संदेश को भी सुदृढ़ किया कि अधिक एकजुट, शांतिपूर्ण और समावेशी भविष्य के निर्माण के लिए इतिहास को याद रखना आवश्यक है।




कोलकाता: बंगाल के अनुभव का स्मरण
कोलकाता में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से 13 और 14 अगस्त 2026 को न्यूटाउन कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय कार्यक्रम के ज़रिए किया गया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर 13 अगस्त 2026 को कोलकाता में “भारत का विभाजन: स्मृति, क्षति और संघर्षशीलता” शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री श्री दीपक बर्मन ने किया और 1,000 से अधिक विद्यार्थियों ने इसका अवलोकन किया। इससे युवा पीढ़ी को अभिलेखीय सामग्री तथा विभाजन के दौरान लोगों के जीवन के वास्तविक अनुभवों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला। यह प्रदर्शनी दो दिवसीय कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में जारी रही और विभाजन के दौरान बंगाल के विशिष्ट अनुभवों पर केंद्रित रही, जिसमें विस्थापन, पलायन एवं पुनर्वास तथा क्षेत्र पर पड़े गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव शामिल थे।
14 अगस्त के कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल श्री आर. एन. रवि मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त विभाग के माननीय प्रभारी मंत्री श्री स्वपन दासगुप्ता; पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य तथा पर्यटन विभाग की माननीय राज्य मंत्री श्रीमती पूर्णिमा चक्रवर्ती; पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. सौमित्र मोहन; तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) के महानिदेशक श्री के. एस. मुरली सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, प्रतिष्ठित विद्वान, कलाकार, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को विभाजन के कारण हुई पीड़ा के प्रति संवेदनशील बनाना था, बिना घृणा की विरासत को आगे बढ़ाए, तथा इतिहास से शांति, सामाजिक सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और मानवीय गरिमा के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता ग्रहण करना था। कार्यक्रम के तहत विभाजन पर आधारित चार फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया।
इस अवसर पर उन लोगों के अनुभवों को भी रेखांकित किया गया, जिनके घर, परिवार और समुदाय विभाजन के कारण बिखर गए थे। व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ के तहत 1946 में कलकत्ता में हुई सांप्रदायिक हिंसा और उसके बाद बंगाल में उत्पन्न उथल-पुथल को स्मरण किया गया, साथ ही भय और अविश्वास के दौर में साहस, संवाद और मेल-मिलाप के महत्व पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में विभाजन के इतिहास को संघर्षशीलता, नवसृजन और राष्ट्र-निर्माण के इतिहास के रूप में भी रेखांकित किया गया। सीमित साधनों और अनिश्चित भविष्य के साथ आए शरणार्थी आगे चलकर शिक्षक, उद्यमी, पेशेवर, कलाकार, श्रमिक, लोक सेवक और संस्थान-निर्माता बने तथा पश्चिम बंगाल के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विभाजन से पहले के महत्वपूर्ण वर्षों के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान तथा बंगाल को अविभाजित रूप से पाकिस्तान में शामिल किए जाने के प्रस्ताव के उनके विरोध को भी कार्यक्रम में रेखांकित किया गया। साथ ही, बंगाली हिंदुओं के भविष्य और हितों की रक्षा के लिए एक अलग प्रांत के गठन की उनकी वकालत को भी प्रमुखता से उल्लेखित किया गया।
कार्यक्रम का समापन मोमबत्ती मार्च के साथ हुआ, जिसमें विभाजन के पीड़ितों और इसमें बचे लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा आधुनिक पश्चिम बंगाल और भारत के निर्माण में विभाजन से प्रभावित परिवारों के अमूल्य योगदान को स्वीकार किया गया। पश्चिम बंगाल के सभी जिला मुख्यालयों में भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया।









देशभर में आईजीएनसीए के कार्यक्रम
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 के देशव्यापी आयोजन के तहत, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने अपने क्षेत्रीय केंद्रों में शैक्षणिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की। इन कार्यक्रमों ने स्मृतियों के दस्तावेजीकरण, युवा पीढ़ी को जोड़ने तथा विभाजन के मानवीय अनुभवों पर चिंतन के लिए मंच प्रदान किए।
जम्मू-कश्मीर: विभाजन में बचे लोगों की स्मृतियाँ और परिचर्चा
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के जम्मू-कश्मीर क्षेत्रीय केंद्र ने जिला प्रशासन, राजौरी और बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय, राजौरी के सहयोग से “विभाजन में बचे लोगों की स्मृतियाँ: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर परिचर्चा” का आयोजन किया। कार्यक्रम में 1947 और 1965 के दौरान पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से विस्थापित लोगों की स्मृतियों, संघर्षों और अनुभवों के दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया। जम्मू के संभागीय आयुक्त श्री रमेश कुमार, आईएएस, मुख्य अतिथि थे, जबकि नगरोटा की माननीय विधायक श्रीमती देवयानी सिंह राणा; बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. जावेद इकबाल; तथा राजौरी के उपायुक्त श्री अभिषेक शर्मा, आईएएस, उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 99 वर्षीय श्री बख्शी योग राज छिब्बर की गवाही रही, जिन्होंने विभाजन की अपनी प्रत्यक्ष स्मृतियाँ साझा कीं। इसके साथ ही अन्य विस्थापित परिवारों के अनुभव भी प्रस्तुत किए गए। विभाजन पर एक प्रदर्शनी तथा जिला प्रशासन, राजौरी द्वारा निर्मित एक वृत्तचित्र भी प्रस्तुत किया गया। जम्मू क्षेत्र के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के इतिहासकारों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
बेंगलुरु: विद्यार्थियों का जुलूस और वृत्तचित्र प्रदर्शन
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के बेंगलुरु क्षेत्रीय केंद्र ने 14 अगस्त 2026 को विजया भारती विद्यालय में एक जुलूस का आयोजन किया, जिसमें 500 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने विभाजन के पीड़ितों और उनकी कठिनाइयों की स्मृति में तिरंगा लेकर एकता, शांति और राष्ट्रीय एकजुटता के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम की शुरुआत विभाजन से प्रभावित लोगों के अनुभवों और स्मृतियों को दर्शाने वाले एक वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद डॉ. जी. बी. हरीशा ने विभाजन के मानवीय पहलुओं और इसके स्मरण के महत्व पर विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में आईजीएनसीए के बेंगलुरु क्षेत्रीय केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक श्री डी. महेंद्र और प्रख्यात शिक्षाविद् एवं शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. पी. वी. कृष्ण भट्ट उपस्थित रहे।
रांची: पदयात्रा, प्रदर्शनी, विशेष व्याख्यान और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के कवियों का सम्मेलन
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के रांची क्षेत्रीय केंद्र ने रांची विश्वविद्यालय के सहयोग से “विस्थापन” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें पदयात्रा, विभाजन प्रदर्शनी, विशेष व्याख्यान और तृतीय जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कवि सम्मेलन शामिल थे। रांची विश्वविद्यालय की उप-कुलपति प्रो. सरोज शर्मा मुख्य अतिथि थीं, जबकि पद्मश्री बलबीर दत्त, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक ने विशेष व्याख्यान दिया और रामकृष्ण मिशन आश्रम, रांची के सचिव स्वामी भावेशानंद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, व्यक्तिगत स्मृतियों, दृश्य दस्तावेजीकरण तथा जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की कविता को एक साथ प्रस्तुत करते हुए विस्थापन, स्मृति, पहचान, क्षति और संघर्षशीलता के पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। प्रदर्शनी में विभाजन से संबंधित दृश्य एवं दस्तावेजी सामग्री प्रस्तुत की गई, जबकि विभिन्न जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा परंपराओं के कवियों ने सामूहिक स्मृति और जीवन के वास्तविक अनुभवों को संरक्षित करने में देशज भाषाओं की भूमिका को रेखांकित किया।






इन कार्यक्रमों के अलावा, 14 अगस्त 2026 को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया, जो विभाजन के पीड़ितों की पीड़ा को स्मरण और विभाजन से मिली सीख को संरक्षित रखने की साझा राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करता है।

स्मरण रहे, जिससे इतिहास कभी दोहराया न जाए
विभाजन के परिणामस्वरूप आधुनिक इतिहास में जबरन विस्थापन की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक घटित हुई, जिसमें लाखों लोग नवगठित सीमाओं के आर-पार विस्थापित हुए। इस त्रासदी ने पंजाब, बंगाल, दिल्ली और कई अन्य क्षेत्रों के समुदायों को प्रभावित किया तथा परिवारों की पीढ़ियों पर अपनी स्थायी छाप छोड़ी।
संस्कृति मंत्रालय ने दिल्ली, अमृतसर और कोलकाता में आयोजित अपने कार्यक्रमों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि ये स्मृतियाँ भारत की सामूहिक चेतना का हिस्सा बनी रहें। इन आयोजनों में त्रासदी के स्मरण से आगे बढ़कर उससे सीख लेने, घृणा और विभाजन को अस्वीकार करने, सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने तथा एकता और मानवीय गरिमा के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करने पर बल दिया गया।
इन कार्यक्रमों ने नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी को विभाजन के इतिहास से जुड़ने और भारत के इतिहास के सबसे त्रासद अध्यायों में से एक का प्रत्यक्ष अनुभव करने वाले लोगों के अनुभवों को समझने का अवसर प्रदान किया। इस प्रकार, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 का आयोजन उन लोगों के प्रति एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि, विभाजन में बचे लोगों की संघर्षशीलता की स्वीकृति और इस बात की याद दिलाने वाला अवसर बना कि इतिहास की सीख भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहनी चाहिए।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2300089)
आगंतुक पटल : 102
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