सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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केंद्र सरकार ने एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों की रक्षा और समावेशन को बढ़ावा देने के उपायों की पुनर्पुष्टि की


उपायों में कानूनी संरक्षण, राशन कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य देखभाल और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की सुरक्षा शामिल हैं

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 7:57PM by PIB Delhi


केंद्र सरकार ने एलजीबीटीक्यू+ समुदाय, जिसमें इंटरसेक्स व्यक्ति भी शामिल हैं, के अधिकारों, कल्याण और सामाजिक समावेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी, प्रशासनिक तथा कल्याणकारी उपायों की एक नई श्रृंखला के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
संसद के राज्यसभा सदस्य श्रीमती रजथी के लिखित प्रश्न के उत्तर में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की शिक्षा, रोजगार, पहचान-पत्र और अन्य अधिकारों में भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जा रहे उपायों का वर्णन किया।
सरकार की प्रतिक्रिया में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की सुरक्षा, सेवाओं तक पहुंच और सामाजिक समावेशन को सुदृढ़ करने के लिए बहु-मंत्रालयीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया, जिसमें खाद्य सुरक्षा, वित्तीय सेवाएँ, स्वास्थ्य देखभाल, भेदभाव से सुरक्षा तथा सुरक्षा और गरिमा शामिल हैं।

 

 


मंत्रालय ने बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम, 2019, जिसमें 2026 में संशोधन किया गया है, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संरक्षण और कल्याण के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इस अधिनियम में जन्मजात असमानताओं वाले इंटरसेक्स व्यक्तियों को ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा में शामिल किया गया है। अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियम भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं और कल्याणकारी उपायों व अन्य अधिकारों तक पहुँच की सुविधा प्रदान करते हैं।
खाद्य और जन वितरण विभाग ने सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया है कि मौजूदा प्रावधानों के तहत, समलैंगिक/क्वीयर संबंध में साथी को राशन कार्ड के प्रयोजनों के लिए उसी परिवार/गृहस्थी का हिस्सा माना जाए। 
राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों से यह भी कहा गया है कि वे राशन कार्ड जारी करने में ऐसे साथियों को भेदभाव का सामना न करना पड़े, इसके लिए आवश्यक कदम उठाएँ।
वित्तीय सेवाएँ विभाग ने एक परामर्श जारी किया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि क्वीयर ( असामान्य वर्ग)समुदाय के व्यक्तियों के लिए संयुक्त बैंक खाता खोलने पर कोई रोक नहीं है। इस परामर्श में यह भी अनुमति दी गई है कि क्वीयर संबंध में व्यक्ति को खातेधारक के निधन की स्थिति में खाते की शेष राशि प्राप्त करने के लिए नामांकित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्य संबंधी मामलों में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पक्षकारों सहित राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को संचार जारी किए हैं। इन उपायों में जागरूकता गतिविधियाँ, परिवर्तन उपचार (conversion therapy) का निषेध, सेक्स रियासाइनमेंट सर्जरी की उपलब्धता, पाठ्यक्रमों में परिवर्तन, टेली-कंसल्टेशन सुविधाएँ, विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों का संवेदनशीलता प्रशिक्षण और जिन मामलों में निकट संबंधी, ओसपास का अगला संबंधी या परिवारिक सदस्य उपलब्ध नहीं है, वहाँ शव दावे से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
संचालक सामान्य स्वास्थ्य सेवा (DGHS) ने भी राज्य स्वास्थ्य विभागों और अन्य संबंधित पक्षकारों को एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के प्रति भेदभाव घटाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने संबंधी संचार जारी किया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने लिंग विभेदन (डिसऑर्डर ऑफ सेक्सुअल डिफरिएशन) वाले शिशुओं और बच्चों के लिए आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप संबंधी दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें जटिलताओं के बिना एक चिकित्सकीय रूप से सामान्य जीवन जीने में सक्षम बनाना है। मंत्रालय क्वीयर समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से सम्बंधित मुद्दों का समाधान करने वाले दिशानिर्देशों पर भी काम कर रहा है।
गृह मंत्रालय ने जेलों में क्वीयर समुदाय के लिए भेंट-अनुमति (visitation) अधिकारों के संबंध में सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया है। एक अन्य परामर्श यह सुनिश्चित करने के संबंध में भी जारी किया गया है कि क्वीयर समुदाय के सदस्यों को हिंसा, उत्पीड़न या दबाव की धमकियों का सामना न करना पड़े तथा सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी उपाय लागू किए जाएँ।

 

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