पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
स्वदेशी चेतावनी प्रणालियाँ
प्रविष्टि तिथि:
13 AUG 2026 2:17PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केन्द्र (एनसीएस) अपने राषट्रीय भूकंपीय नेटवर्क (एनएसएन) के ज़रिए देश भर में आने वाले भूकंपों की 24x7 आधार पर सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है। वर्तमान में इस नेटवर्क में देशभर में स्थित 174 भूकंपीय वेदशालाएं शामिल हैं।
चेतावनी की पद्धति सामान्यत: प्रारंभिक और गैर-विनाशकारी प्राथमिक तरंगों का स्रोत क्षेत्र में लगाए गए सेंसरों द्वारा पता लगाने पर आधारित होती है। इससे किसी विनाशकारी भूकंप के आने की स्थिति में चेतावनी जारी करना संभव होता है। भूकंप के स्रोत से लक्षित स्थान की दूरी के आधार पर वहां अधिक तीव्र भू-कंपन पहुंचने से कुछ सेकंड पहले चेतावनी जारी की जा सकती है। एनसीएस को आवंटित निधि का उपयोग वर्तमान में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने के लिए पायलट चरण में किया जा रहा है।
बादल फटना अत्यधिक स्थानीयकृत और कम अविध की अत्यधिक वर्षा की घटनाएं हैं। ये वायुमंडलीय परिस्थितियों और स्थानीय स्थलाकृति के बीच जटिल अंत:क्रियाओं से प्रभावित होती है, विशेषकर हिमालय जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में। इनके स्थानीय स्वरूप और सीमित प्रेक्षण संबंधी आंकड़ों के कारण हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की घटनाओं में कथित वृद्धि के कारणों को स्थापित करने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन, द्वारा अभी तक कोई निर्णायक अध्ययन नहीं किया गया है। हालांकि, आईएमडी विभिन्न मौसम संबंधी आपदा से संबंधित घटनाओं के लिए अलग-अलग समयगत और स्थानिक स्तरों पर निगरानी करता है तथा प्रभाव-आधारित प्रारंभिक चेतावनी सेवाएं उपलब्ध कराता है, ताकि आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रबंधन की सहायता की जा सके। पूर्वानुमान और चेतावनियां विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन तथा अन्य हितधारकों के उपयोग के लिए साझा की जाती हैं। इनमें गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए), उपायुक्त/जिला मजिस्ट्रेट, केन्द्र सरकार के विभाग एवं मंत्रालय तथा मीडिया शामिल हैं। इसका उद्देश्य आपदा से निपटने के लिए तैयारी और तवरित प्रतिक्रिया को समर्थन देना है।
देशभर में, जिसमें हिमालयी राज्य भी शामिल हैं, मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार तथा आपदा-तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न आधुनिकीकरण परियोजनाएं लागू की गई हैं और वर्तमान में मिशन मौसम भी चल रहा है। वर्तमानमें में आईएमडी के पास पूरे भारत में 50 डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) का नेटवर्क है, जिसमें इसरो (आईएसआरओ) और आईआईटीएम द्वारा संचालित रडार भी शामिल हैं। देशभर में जिला-वार और ब्लॉक-वार वर्षा निगरानी प्रणालियों के अंतर्गत 1,008 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और 6,885 वर्षामापी केन्द्र हैं। प्रेक्षण नेटवर्क के विस्तार के अतिरिक्त पिछले दशक के दौरान संख्यात्मक मॉडलिंग क्षमता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
आईएमडी ने कई विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान और निगरानी मॉड्यूल विकसित किए हैं और परिचालन में लाए हैं, जिनका उपयोग पर्वतीय राज्यों की मौसम पूर्वानुमान सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है। इनका विवरण इस प्रकार है:
- ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम (जीएफएस), भारत फोरकास्ट सिस्टम (बीएफएस), वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग (डब्ल्यूआरएफ), हाई-रिज़ॉल्यूशन रैपिड रिफ्रेश (एचआरआरआर), इलेक्ट्रिक वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग (ईडब्ल्यूआरएफ), प्रायोगित एआई मॉडल, मल्टी-मॉडल एन्सेंबल (एमएमई) आदि जैसे न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन (एनडब्ल्यूपी) मॉडलों की एक शृंखला चलाई जा रही है, ताकि पूरे देश के लिए वर्षण, आंधी-तूफान एवं आकाशीय बिजली, तेज हवा, लू/शीत लहर, कोहरा तथा अन्य खतरनाक मौसम संबंधी घटनाओं के लिए विशेष ‘गंभीर मौसम चेतावनी उत्पाद’ प्रदान किए जा सकें, जिनका पर्वतीय राज्यों के लिए भी व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।
- इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा आईएमडी को तकनीकी भागीदार बनाकर ‘लाइटनिंग सेफ्टी का शमन प्रोजेक्ट (एमपीएलएस)’ नामक एक केन्द्र प्रायोजित पहल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। एमपीएलएस वर्तमान में क्रियान्वित की जा रही है और इसमें निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
- समुदाय-आधारित जोखिम मूल्यांकन और बिजली पूर्व चेतावनी प्रणाली (एलईडब्लयूएस) का सुदृढीकरण;
- जागरूकता, शिक्षा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण;
- तैयारी और शमन;
- बिजली गिरने से संबंधित अनुसंधान और विकास
- बिजली जोखित प्रबंधन इकाई की स्थापना।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने ‘दामिनी’ (डीएएमआईएनआई) मोबाइल ऐप विकसित किया है, जो 17 क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन करता है और जनता को स्थान-विशिष्ट बिजली गिरने की चेतावनी/सूचनाएं, वास्तविक समय में बिजली गिरने की जानकारी और सुरक्षा संबंधी परामर्श प्रदान करता है।
केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आईएम/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2299093)
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