पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

मौसम पूर्वानुमान के लिए एआई और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियां

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 2:16PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने अपने संस्थानों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तीन वैश्विक मौसम मॉडलों को परिचालन में ला दिया है। ये मॉडल मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं को गंभीर मौसम संबंधी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने और पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार करने में सहायता करते हैं। मंत्रालय के वैज्ञानिकों ने स्‍वदेशी एआई और मशीन लर्निंग आधारित अनुप्रयोग भी विकसित किए हैं। इनका उपयोग प्रेक्षण संबंधी आकड़ों को संसाधित करने, मौसम की निगरानी तथा चक्रवात, भारी वर्षा और देश भर में, जिसमें ओडिशा भी शामिल है, होने वाली अन्‍य प्राकृतिक आपदाओं जैसी गंभीर मौसम संबंधी घटनाओं के तात्‍कालिक पूर्वानुमान में सुधार के लिए किया जा रहा है।

इसके अलावा मंत्रालय के अधीन भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बहु-आपदा प्रारंभिक चेतावनी निर्णय सहायता प्रणाली (एमएचईडब्‍ल्‍यू-डीएसएस) विकसित की है। यह एक वेब-जीआईएस-आधारित प्‍लेटफॉर्म है, जो ओडिशा सहित पूरे देश में गंभीर मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए उपयोग किया जाता है। ये प्लेटफ़ॉर्म सार्वजनिक रूप से निम्‍नलिखित यूआरएल पर उपलब्ध है: https://imdgeospatial.imd.gov.in/। एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस में भू स्‍थानिक प्रौद्योगिकियों, मौसम संबंधी प्रेक्षणों, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों तथा प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान को एकीकृत किया गया है। इससे चक्रवात, भारी वर्षा, तूफान और अन्य गंभीर मौसम संबंधी घटनाओं के संबंध में समय पर निर्णय लेने में सहायता मिलती है। यह प्रणाली प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रौद्योगिकी, आकड़ों और संस्थागत समन्वय को एक साथ लाती है। इसे विस्‍तार क्षमता, अंतर-संचालीयता और उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवा प्रदान को ध्‍यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इससे विभिन्‍न क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में निर्बाध रूप से इसका संचालन संभव होता है। यह केंद्र और राज्य सरकार के प्राधिकरणों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, समुदायों तथा उद्योगों को क्षेत्र-विशिष्ट परामर्श भी उपलब्‍ध कराता है, जिससे चरम मौसम संबंधी घटनाओं के लिए बेहतर तैयारी की जा सके। वैज्ञानिक पूर्वानुमानों को कार्रवाई योग्य चेतावनियों और परामर्शों में परिवर्तित करके एमएचईडब्ल्य-डीएसएस जन-सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा प्रबंधन और आपदा तैयारी में सहायता करता है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने अपने संस्थानों के माध्यम से विभिन्‍न राष्‍ट्रीय संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों और सहयोगात्मक व्यवस्थाओं पर हस्‍ताक्षर किया है। इनका उद्देश्‍य तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना, आकड़ों के आदान-प्रदान को सुगम बनाना तथा अनुसंधान, शिक्षा और क्षमता निर्माण संबंधी पहलों को समर्थन देना है। ओडिशा के संस्थानों के साथ किए गए सहयोगात्मक अनुसंधान संबंधी समझौता ज्ञापनों का विवरण नीचे तालिका में दिया गया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय/संस्थान समझौता ज्ञापनों के माध्यम से मौसम और महासागर-राज्य पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाने के लिए मानसून विज्ञान, मौसम और जलवायु, महासागर विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करते हैं।

क्र.सं.

संस्थान/संगठन

समझौता ज्ञापन/एलओए

1

आईएमडी, मौसम भवन और इंदिरा गांधी प्रौद्योगिकी संस्थान, ओडिशा

समझौता ज्ञापन

2

आईएमडी और शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान डीम्ड यूनिवर्सिटी (एसओएडीयू), ओडिशा

समझौता ज्ञापन

3

एमडी और आईसीएआर- सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर, भुवनेश्वर, ओडिशा

समझौता ज्ञापन

4

एमडी और एस. जी. फाउंडेशन, ओडिशा

समझौता ज्ञापन

5

आईएमडी और उड़ीसा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर, ओडिशा

एलओए

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय पूरे देश में केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं को एक समान रूप से लागू करता है। इसलिए निधियों का आवंटन राज्य/केन्‍द्र शासित प्रदेश-वार नहीं किया जाता है। अनुसंधान और सहयोगात्‍मक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता मंत्रालय की विभिन्‍न योजनाओं और कार्यक्रमों के अंतर्गत अनुमोदित प्रस्‍तावों तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रदान की जाती है। यह सहायता पात्र शैक्षणिक और अनुसंधान संस्‍थानों को मंत्रालय के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में अनुसंधान, विकास और क्षमता निर्माण संबंधी गतिविधियां संचालित करने के लिए दी जाती है।

सरकार पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय की केन्‍द्रीय क्षेत्र की छाता योजना ‘मिशन मौसम’ लागू कर रही है। इसका उद्देश्‍य भारत को ‘मौसम-तैयार और जलवायु-स्‍मार्ट राष्‍ट्र’ बनाना है। इसका लक्ष्‍य पृथ्‍वी-तंत्र के प्रेक्षण और पूर्वानुमान प्रणालियों को सुदृढ़ करना, उच्‍च प्रभाव वाली मौसम संबंधी घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी व्‍यवस्‍था में सुधार करना तथा निर्बाध मौसम एवं जलवायु सेवाएं उपलब्‍ध कराना है। इसके माध्‍यम से ओडिशा सहित पूरे देश में जलवायु अनुकूलन क्षमता और आपदा-तैयारी को मजबूत किया जा रहा है। मिशन मौसम के अंतर्गत पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय उन्‍नत प्रौद्योगिकियों और उच्‍च रिजोल्‍यूशन वाली प्रेक्षण प्रणालियों के विकास एवं तैनाती के माध्‍यम से देश की मौसम निगरानी और वायुमंडलीय प्रेक्षण क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है। इनमें बेहतर समयगत और स्‍थानिक कवरेज वाली प्रणालियां भी शामिल हैं, जिनका विस्‍तार ओडिशा सहित देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में किया जा रहा है।

केन्‍द्रीय पृथ्‍वी विज्ञान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने यह जानकारी आज राज्‍यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आईएम/पीके


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