संस्‍कृति मंत्रालय
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सांस्कृतिक विरासत तक डिजिटल पहुंच

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 2:25PM by PIB Delhi

मार्च 2026 में लॉन्च किए गए उन्नत भारतीय संस्कृति पोर्टल (आईसीपी) संस्करण 2.0 के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत तक डिजिटल पहुंच को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्नत पोर्टल को आधुनिक, उन्‍नयन और सुरक्षित आर्किटेक्चर के साथ विकसित किया गया है ताकि भारत के सांस्कृतिक संसाधनों तक निर्बाध पहुंच प्रदान की जा सके। प्रमुख सुधारों में उन्नत खोज क्षमताएं, बहुभाषी समर्थन, बेहतर यूजर इंटरफेस और यूजर अनुभव, प्रोग्रेसिव वेब एप्लिकेशन (पीडब्ल्यूए) कार्यक्षमता, एआई-सक्षम चैट बॉट और संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक संस्थानों के साथ एकीकरण शामिल हैं।

पोर्टल एक्‍सेस, बहुभाषी उपलब्धता, यूजर इंटरफ़ेस, सार्वजनिक सहभागिता और डिजिटल कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रमुख प्रयासों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. आधुनिक और प्रतिक्रियाशील यूजर इंटरफेस की शुरुआत, जिसमें बेहतर नेविगेशन और पहुंच की सुविधा शामिल है।
  2. भाषिनी प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण के माध्यम से 22 भारतीय भाषाओं में सामग्री की उपलब्धता।
  3. बुद्धिमान खोज, सामग्री की खोज और बहुभाषी बातचीत को सक्षम बनाने वाले एआई-संचालित चैट बॉट, भारती की तैनाती।
  4. सांस्कृतिक संसाधनों को कुशलतापूर्वक प्राप्त करने के लिए उन्नत खोज और फ़िल्टरिंग सुविधाएँ।
  5. डेस्कटॉप, टैबलेट और मोबाइल उपकरणों पर पहुंच को सक्षम करने के लिए पोर्टल को प्रोग्रेसिव वेब एप्लिकेशन (पीडब्ल्यूए) के रूप में विकसित किया गया है।
  6. बेहतर प्रदर्शन, उन्‍नयन और सुरक्षा के लिए रिएक्ट और ड्रुपल 10 का उपयोग करते हुए एक डीकपल्ड आर्किटेक्चर को अपनाना।
  7. जनभागीदारी बढ़ाने के लिए नए विषयगत अनुभागों और सुनियोजित सांस्कृतिक संग्रहों को शामिल किया गया है।

भारतीय संस्कृति पोर्टल ने मानक मेटाडेटा विनिमय, एपीआई और संस्थागत सहभागिता के माध्यम से सांस्कृतिक संस्थानों के एकीकरण के लिए तंत्र स्थापित किए हैं। यह पोर्टल संस्कृति मंत्रालय और सहयोगी संगठनों के अधीन संग्रहालयों, पुस्तकालयों, अभिलेखागारों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों से डिजिटल संसाधनों को एकत्रित करके एक एकीकृत खोज मंच के रूप में कार्य करता है।

उन्नत पोर्टल का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और व्यापक जनसंपर्क को बढ़ावा देना है:

  1. विभिन्न संस्थानों से सांस्कृतिक संसाधनों तक पहुंच के लिए एक एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करना।
  2. उन्नत खोज, मेटाडेटा-आधारित खोज और डिजिटल संग्रहों तक पहुंच के माध्यम से अनुसंधान को सुगम बनाना।
  3. प्रामाणिक सांस्कृतिक जानकारी के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और आम जनता का समर्थन करना।
  4. संग्रहालयों, स्मारकों, पांडुलिपियों, कलाकृतियों और विरासत संग्रहों की आभासी खोज को सक्षम बनाना।
  5. विषयगत सामग्री के चयन के माध्यम से भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना।
  6. सांस्कृतिक संसाधनों के दीर्घकालिक डिजिटल संरक्षण और सुलभता को मजबूत करना।
  7. बहुभाषी पहुंच और बेहतर डिजिटल सहभागिता के माध्यम से व्यापक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  8. यह वेबसाइट विश्व भर में सुलभ है और सभी स्क्रीन साइज़ (डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन) में अनुक्रियाशील (रिस्पॉन्सिव) है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज यह जानकारी राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एचएन/एसके


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