सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय
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समयबद्ध श्रम शक्ति सवेक्षण (PLFS) के जरिए पहले के रोजगारी-बेरोजगारी सर्वेक्षण (EUS) की तुलना में पद्धतिगत सुधार दर्ज हुआ, इनमें शहरी क्षेत्रों के लिए रोटेशनल पैनल सैम्पलिंग डिज़ाइन शामिल है


जनवरी 2025 से सर्वेक्षण डिज़ाइन को सशक्त बनाया गया है ताकि अखिल-भारत स्तर पर मासिक अनुमान और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए त्रैमासिक अनुमान—साथ ही वार्षिक अनुमान भी—संभव हो सका

प्रविष्टि तिथि: 10 AUG 2026 4:49PM by PIB Delhi

रोज़गार-बेरोज़गारी सर्वेक्षण (EUS), जिन्हें पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित किया जाता था, जो वर्ष 2011-12 तक देश में श्रम बाज़ार आँकड़ों के प्रमुख स्रोत होते थे ।  समयानुकूल श्रम बाज़ार संकेतकों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए, तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) की सिफारिशों के आधार पर, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2017 में पीरियॉडिक लेबर फ़ोर्स सर्वे (PLFS) शुरू किया, जिसे सर्वेक्षण पद्धति और नमूना डिज़ाइन विकसित करने के लिए गठित विशेषज्ञ समितियों द्वारा विचार-विमर्श के बाद लागू किया गया।

PLFS ने पहले के EUS की तुलना में पद्धतिगत सुधार लागू किए, जिनमें शहरी क्षेत्रों के लिए रोटेशनल पैनल सैम्पलिंग डिज़ाइन, कम्प्यूटर-असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (CAPI) जिसमें अंतर्जात वैधता जांच (इन-बिल्ट वैलिडेशन चेक्स) हैं, जिनमें काम किए गए घंटों की जानकारी का संकलन, और आवधिक श्रम बल अनुमान पैदा करने के लिए सैम्पलिंग डिज़ाइन व पूछताछ अनुसूची में परिवर्तन शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, जनवरी 2025 से सर्वेक्षण डिज़ाइन को भी सशक्त बनाया गया है ताकि अखिल-भारत स्तर पर मासिक अनुमान और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए त्रैमासिक अनुमान—साथ ही वार्षिक अनुमान भी—प्रदान किए जा सकें।

PLFS में अपनाई गई रोजगार, बेरोज़गारी और श्रमबल भागीदारी से संबंधित संकल्पनाएँ और परिभाषाएँ पहले के EUS में जो अपनाई गई वह अभी भी बनी हुई हैं और ये दांतावाला समिति (अर्थात् बेरोज़गारी अनुमानों पर विशेषज्ञ समिति) की सिफारिशों तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम सांख्यिकीकारों की सम्मेलन (ICLS) द्वारा अपनाए गए प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित हैं। तदनुसार, पी एल एफ एस  दीर्घकालिक श्रम बाज़ार प्रवृत्तियों के विश्लेषण का समर्थन जारी रखता है।

इसके अलावा, पी एल एफ एस  के परिणामों को वार्षिक रिपोर्टों, त्रैमासिक बुलेटिनों और मासिक बुलेटिनों के माध्यम से प्रकाशित करते समय, सांख्यिकी मंत्रालय ने उपयोगकर्ताओं को PLFS और पहले के EUS अनुमानों के बीच प्रत्यक्ष तुलना करते समय उचित सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि सर्वेक्षण डिज़ाइन और पद्धति में मौजूद अंतर अनुमान को प्रभावित कर सकते हैं।

मंत्रालय लगातार अर्थशास्त्रियों, शोधकर्ताओं, विषय-विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ संवाद करता है, और प्राप्त प्रतिक्रियाओं को सर्वेक्षण पद्धति, सैम्पलिंग डिज़ाइन, प्रश्नावली डिज़ाइन, डेटा संग्रह और प्रसार प्रथाओं में सुधार के समय विचार में लिया जाता है ताकि श्रम बाज़ार सांख्यिकी की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और प्रासंगिकता बढ़ सके।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) के राज्य मंत्री, योजना मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) के राज्य मंत्री तथा संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा दी गई।

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पीके केसी एमएम

 


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