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बादल फटने की घटनाएं

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2026 4:05PM by PIB Delhi

हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता को देखते हुए एक बहुक्षेत्रीय केंद्रीय टीम (एमएससीटी) का गठन किया गया है। इस टीम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए); केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की; भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), इंदौर और अन्य संबंधित एजेंसियों के विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है।

इस टीम को हिमाचल प्रदेश में बढ़ती चरम मौसम संबंधी घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक और जमीनी स्थितियों का विश्लेषण करने, विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित और जांचने तथा ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मौसम विशेषज्ञों, वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य अधिकारियों द्वारा दिए गए आकलन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। बर्फ के तेजी से पिघलने और ग्लेशियर द्वारा लाई गई मिट्टी जैसे मलबे के ढेर की अस्थिरता के कारण उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेमौसम ढलान ढह रहे हैं और जल प्रवाह अधिक हो रहा है। एमएससीटी के अध्ययन के अनुसार, मानवजनित कारकों ने भी इस क्षेत्र में बढ़ते जोखिम में योगदान दिया है।

यह बात गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कही।

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पीके/केसी/एके/एनजे

 


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