स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदम
259 मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं, 24 रेफरल प्रयोगशालाओं तथा 305 मोबाइल खाद्य परीक्षण इकाइयों के जरिये खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन मजबूत बनाया गया
खाद्य परीक्षण बुनियादी ढांचा को मजबूत करने के लिए 'सोफटेल योजना' के तहत 47 राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियमित समीक्षा तथा प्रवर्तन संबंधी उपायों से खाद्य सुरक्षा कानूनों को मजबूती से लागू किया गया
उपभोक्ता जागरूकता अभियानों, डीएआरटी पुस्तक तथा फूड सेफ्टी मैजिक बॉक्स के माध्यम से खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान तथा सुरक्षित एवं जागरूक खाद्य विकल्प अपनाने को प्रोत्साहन
प्रविष्टि तिथि:
07 AUG 2026 5:17PM by PIB Delhi
देशभर में खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सरकार ने खाद्य परीक्षण बुनियादी ढांचे के विस्तार, क्षमता निर्माण, नियामकीय निगरानी तथा उपभोक्ता जागरूकता से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाना है।
इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करने तथा उनके विनिर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं आयात का विनियमन करने का दायित्व सौंपा गया है, ताकि मानव उपभोग के लिए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून, 2006 का कार्यान्वयन एवं प्रवर्तन केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों की साझा जिम्मेदारी है।
खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एफएसएसएआई विभिन्न मंचों, जैसे केन्द्रीय सलाहकार समिति (सीएसी) की बैठकों तथा अंतर-राज्यीय क्षेत्रीय परिषद के माध्यम से सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के कार्य-निष्पादन तथा रिक्त पदों की नियमित समीक्षा करता है।
खाद्य एवं खाद्य उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य नमूनों के परीक्षण हेतु 259 एनएबीएल मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को अधिसूचित किया है। इनमें राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों की प्रयोगशालाएं, सरकारी संस्थानों की प्रयोगशालाएं तथा एनएबीएल-मान्यता प्राप्त निजी प्रयोगशालाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अपील संबंधी खाद्य नमूनों के परीक्षण के लिए 24 रेफरल खाद्य प्रयोगशालाओं को भी अधिसूचित किया गया है। देशभर में 305 मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं (फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स) भी संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से मौके पर ही खाद्य पदार्थों का परीक्षण, त्वरित जांच किटों का वितरण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया जाता है।
देश में खाद्य परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की योजना (सॉफटेल), जिसमें मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की व्यवस्था भी शामिल है, एफएसएसएआई द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, सूक्ष्मजीवविज्ञान सुविधाओं की स्थापना तथा मोबाइल खाद्य परीक्षण वैन की तैनाती की जाती है। इस योजना के तहत 47 राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों से संरचनात्मक आधुनिकीकरण किया गया है।
देश में लगभग 98 प्रतिशत खाद्य कारोबार संचालक (एफबीओ) राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून, 2006 के प्रावधानों का प्रवर्तन एवं कार्यान्वयन मुख्यतः संबंधित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है। एफएसएस कानून, 2006 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों एवं विनियमों में निर्धारित मानकों, सीमाओं और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण नियमित रूप से निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्षित प्रवर्तन अभियान, निरीक्षण तथा खाद्य नमूनों का संग्रह एवं परीक्षण करते हैं। न्यायालयों में जब भी कोई मामला दायर किया जाता है, तो उसका उत्तर खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून, 2006 तथा उसके अंतर्गत समय-समय पर बनाए गए नियमों एवं विनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए प्रस्तुत किया जाता है।
उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने अनेक अभियान शुरू किए हैं। इनमें "#नोटूएडल्ट्रेशन" तथा अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर "हाऊ टू चैक फॉर एडल्ट्रेशन" वीडियो अभियान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान करने के तरीकों की जानकारी देना है। इसी प्रकार, "# हर लेबल कुछ कहता है" अभियान के माध्यम से नागरिकों को फूड लेबल की जानकारी के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है, ताकि वे स्वस्थ भोजन का चयन कर सकें और जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। इस पहल के अंतर्गत उपभोक्ताओं को पोषण संबंधी जानकारी (कैलोरी, वसा, शर्करा, प्रोटीन), सामग्री की सूची, एलर्जी संबंधी चेतावनियां तथा निर्माण एवं उपयोग-समाप्ति तिथि जैसी महत्वपूर्ण सूचनाओं के बारे में शिक्षित किया जाता है। इन अभियानों के तहत विज्ञापन, शैक्षणिक सामग्री तथा ऑनलाइन माध्यमों से व्यापक जन-जागरूकता फैलायी जाती है।
इसके अतिरिक्त, एफएसएसएआई ने डीएआरटी (डिटेक्ट एल्डट्रेशन विद रैपिड टेस्ट) नामक पुस्तक जारी की है, जिसमें 44 सरल परीक्षणों का विवरण दिया गया है। इन परीक्षणों को घर पर ही पानी तथा आयोडीन टिंचर जैसे साधारण घोलों की सहायता से दूध एवं दुग्ध उत्पादों, खाद्य तेलों, चीनी एवं मिष्ठान्न, खाद्यान्न एवं उनके उत्पादों, मसालों एवं स्वादवर्धकों में मिलावट की जांच के लिए किया जा सकता है। इनमें खाद्य पदार्थों की प्रामाणिकता की पुष्टि हेतु संवेदी मूल्यांकन संबंधी परीक्षण भी शामिल हैं। यह पुस्तक शुद्ध एवं मिलावटी खाद्य पदार्थों के बीच अंतर को चित्रों के माध्यम से स्पष्ट करती है तथा एफएसएसएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
एफएसएसएआई ने फूड सेफ्टी मैजिक बॉक्स भी विकसित किया है, जो एक कॉम्पैक्ट एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल परीक्षण किट है। इसमें सात प्रकार की खाद्य वस्तुओं में सामान्य मिलावट की पहचान के लिए सरल एवं त्वरित परीक्षण विधियां उपलब्ध हैं। इस किट का उपयोग खाद्य सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों के तहत विद्यालयों में किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से दूध, मसाले, खाद्य तेल तथा अनाज जैसे दैनिक उपयोग के खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान करना सिखाना है।
यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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(रिलीज़ आईडी: 2296319)
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