पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
जलमार्ग में नौवहन योग्य गहराई का रखरखाव
प्रविष्टि तिथि:
07 AUG 2026 5:04PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय जलमार्ग(एनडब्ल्यू)-1(गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली), एनडब्ल्यू-2(ब्रह्मपुत्र नदी) और एनडब्ल्यू-16(बराक नदी) के नौवहन चैनलों में नौगम्य गहराई बनाए रखने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण(आईडब्ल्यूएआई) और ड्रेसिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीसीआई) के बीच समझौता ज्ञापन(एमओयू)/परिचालन ढांचे पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसका विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
अनुलग्नक
नौवहन योग्य गहराई बनाए रखने के लिए आईडब्ल्यूएआई और डीसीआई के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन(एमओयू)/परिचालन ढाँचे
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राष्ट्रीय जलमार्ग(एनडब्ल्यू)
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समझौता ज्ञापनों(एमओयू) का विवरण
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1. एनडब्ल्यू-1
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मल्टीमॉडल टर्मिनल हलदिया तक जाने वाले 'हलदिया एक्सेस चैनल' में नौवहन मार्ग को बनाए रखने का विकास कार्य भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण(आईडब्ल्यूएआई) द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता(एसएमपीके) को सौंपा गया है। इसके अलावा, एसएमपीके और डीसीआई के बीच परिचालन व्यवस्था के तहत, एसएमपीके की निगरानी एवं पर्यवेक्षण में डीसीआई द्वारा अनुरक्षण ड्रेजिंग का कार्य किया जा रहा है।
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2. एनडब्ल्यू-2 और पूर्वोत्तर क्षेत्र(एनईआर) में अन्य राष्ट्रीय जलमार्ग(एनडब्ल्यू)
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समझौता ज्ञापन(एमोयू) के तहत, आईडब्ल्यूएआई ने एनडब्ल्यू-2 पर बांग्लादेश सीमा से जोगीघोपा और जोगीघोपा से पांडु तक तथा एनडब्ल्यू-16 पर भांगा से बदरपुर तक के हिस्सों में ड्रेजिंग के माध्यम से फेयरवे के अनुरक्षण के लिए डीसीआई को तीन वर्ष की अवधि के लिए ड्रेजिंग कार्य सौंपे हैं।
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वर्तमान में, नीचे दिए गए विवरण के अनुसार अनुरक्षण ड्रेजिंग का कार्य करने के लिए कुल 34 कम गहराई वाले(शैलो-डेप्थ) ड्रेजरों को तैनात किया गया है:
एनडब्ल्यू-1: जहाजों के सुरक्षित और कुशल आवागमन के लिए आवश्यक नौवहन गहराई सुनिश्चित करने हेतु, अनुबंध ड्रेजिंग के माध्यम से संपूर्ण नौवहन मार्ग का विकास किया जा रहा है। एनडब्ल्यू-1 पर रखरखाव ड्रेजिंग के लिए ड्रेजिंग अनुबंध एजेंसियों के माध्यम से 17 ड्रेजर और 7 विभागीय ड्रेजर काम में लगाए गए हैं।
एनडब्ल्यू-2 और एनडब्ल्यू-16: आवश्यक नौगम्य गहराई के नौवहन चैनलों के रखरखाव के लिए, पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुल 07 ड्रेजर तैनात किए गए हैं, जिनमें डीसीआई के साथ अनुबंध के तहत एनडब्ल्यू-2 पर 05 ड्रेजर और एनडब्ल्यू-16 पर 02 ड्रेजर तैनात हैं।
एनडब्ल्यू-3(केरलम में पश्चिम तटीय नहरें): एनडब्ल्यू-3 पर एडापल्लीकोटा और कोल्लम के बीच के भाग में संकीर्ण नहरों की ड्रेजिंग और उन्हें चौड़ा करने का काम एक निजी ड्रेजर की तैनाती के साथ अनुबंध के माध्यम से शुरू किया गया है। इसके अलावा, केरलम(केरल) में एनडब्ल्यू-3 के विभिन्न स्थानों पर रखरखाव ड्रेजिंग के लिए 02 विभागीय ड्रेजर तैनात किए गए हैं।
नौगम्य मार्गों(फेयरवे) के रखरखाव को आसान बनाने के लिए एनडब्ल्यू-1 पर त्रिवेणी से वाराणसी तक चरणबद्ध तरीके से ड्रेजिंग का काम किया जा रहा है। त्रिवेणी से बाढ़ तक के हिस्से में 3.0 मीटर की न्यूनतम उपलब्ध गहराई बनाए रखने के लिए निश्चित गहराई अनुबंधों के तहत ड्रेजिंग की जा रही है, जबकि बाढ़ से वाराणसी तक के हिस्से में न्यूनतम 2.5 मीटर की एलएडी बनाए रखने के लिए मात्रा-आधारित अनुबंधों के तहत ड्रेजिंग किया जा रहा है। मात्रा-आधारित ड्रेजिंग अनुबंधों के तहत, 42.68 लाख घन मीटर तलछट की ड्रेजिंग की गई है, जिसमें से 22.81 लाख घन मीटर बिहार में आने वाले हिस्से से संबंधित है।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण(आईडब्ल्यूएआई) हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षणों, नदी की आकृति विज्ञान(मॉर्फोलॉजी) और यातायात आवश्यकताओं के आधार पर एनडब्ल्यू-1 पर एक दीर्घकालिक, नदी खंड-विशिष्ट नौवहन मार्ग विकास ढांचे का पालन करता है। इस ढांचे में प्रदर्शन-आधारित और मात्रा-आधारित ड्रेजिंग अनुबंध शामिल हैं, जिन्हें जहां भी तकनीकी रूप से संभव हो, बंडाल्लिंग, चैनल ट्रेनिंग और नौवहन सहायकों की तैनाती जैसे नदी संरक्षण उपायों द्वारा सहायता दी जाती है। पूरे वर्ष सुरक्षित और विश्वसनीय नौवहन को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से, नदी के व्यवहार और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के अनुसार हस्तक्षेपों को अनुकूलित करने के लिए इस रणनीति की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। फेयरवे विकास के अनुबंध तीन साल की अवधि के लिए दिए गए हैं, जिसे आगे दो और वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रावधान है।
आईडब्ल्यूएआई ने नौगम्य मार्गों के रखरखाव के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए शैलो-ड्राफ्ट ड्रेजर, आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण प्रणालियों और निरंतर चैनल निगरानी को अपनाया है। ड्रेजिंग कार्यों की योजना नौवहन आवश्यकताओं और प्रचलित नदी स्थितियों के आधार पर बनाई जाती है और उन्हें प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें आवश्यकतानुसार सहायक नदियों के जलमार्ग भी शामिल हैं। जलोढ़ नदियों की गतिशील आकृति विज्ञान, मौसमी गाद जमाव और पर्यावरण रूप से विनियमित हिस्सों को ध्यान में रखते हुए, सतत नदी प्रबंधन सुनिश्चित करते हुए वाणिज्यिक और क्रूज जहाजों के आवागमन में व्यवधान को कम-से-कम करने के लिए ड्रेजिंग कार्य एक संतुलित तरीके से किए जाते हैं।
यह जानकारी केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोणोवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीकेपी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2296270)
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