युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन-2026 में पारदर्शी चयन, खिलाड़ी-केंद्रित प्रशासन और संस्थागत सुधारों का किया आह्वान
“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि खिलाड़ियों को खेल के मैदान में बनाए रखा जाए और देश में मजबूत लीग संस्कृति विकसित की जाए,” : डॉ. मनसुख मंडाविया
“किसी भी खिलाड़ी के साथ कभी भी अन्याय नहीं होना चाहिए,” : डॉ. मनसुख मंडाविया
प्रविष्टि तिथि:
07 AUG 2026 5:33PM by PIB Delhi
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) सम्मेलन-2026 की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के अधिकारी तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खेल प्रशासन को सुदृढ़ करना, खिलाड़ियों के कल्याण को बढ़ावा देना तथा आगामी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारियों की समीक्षा करना रहा।

सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) की अनुपालन स्थिति, खेल निकायों में सुशासन की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं तथा एशियाई खेल 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 और राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघों की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मंडाविया ने जोर देकर कहा कि खेल पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रत्येक हितधारक के लिए खिलाड़ियों के हित और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि किसी भी खिलाड़ी के साथ कभी भी अन्याय न हो। अन्याय कई रूपों में हो सकता है और जहां कहीं भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है…”
खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चयन ट्रायल निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से आयोजित किए जाने चाहिए।
डॉ. मंडाविया ने कहा, “खुले चयन ट्रायल पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में कैमरे पर रिकॉर्ड किए जाने चाहिए। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।”

भारतीय खेलों के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा, “प्रधानमंत्री ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि खिलाड़ियों को खेल के मैदान में बनाए रखा जाए और देश में मजबूत लीग संस्कृति विकसित की जाए। प्रत्येक राष्ट्रीय खेल महासंघ को पूरे वर्ष खिलाड़ियों के लिए अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना चाहिए।”
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय खेलों से डोपिंग को समाप्त करने के लिए व्यापक रणनीति की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है तथा सरकार डोपिंग रोधी पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संशोधनों पर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा, “हमें सामूहिक रूप से डोपिंग जैसी बुराई का मुकाबला करना होगा। केवल खिलाड़ियों के विरुद्ध कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं से लेकर सुविधा उपलब्ध कराने वालों तथा उपयोगकर्ताओं तक पूरी श्रृंखला की पहचान कर, एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था के माध्यम से कार्रवाई की जानी चाहिए। तभी हम खेलों से डोपिंग को प्रभावी ढंग से समाप्त कर सकेंगे।”
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डॉ. मनसुख मंडाविया ने आगे मजबूत स्वदेशी कोचिंग पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने तथा विदेशी कोचों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, “हमें उत्कृष्ट भारतीय कोचों का एक मजबूत भंडार तैयार करना होगा। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ हमें अपने कोचों के प्रशिक्षण में भी समान रूप से निवेश करना चाहिए और उन्हें सर्वोत्तम अवसर तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभव उपलब्ध कराना चाहिए। एक अच्छी तरह प्रशिक्षित कोच ही अंततः देश के लिए विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार करेगा।”

केंद्रीय खेल मंत्री ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के साथ मिलकर खेल प्रशासन के मानकों को सुदृढ़ करने, राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा एशियाई खेल 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 और राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए भारत की तैयारियों को और मजबूत करने के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
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पीके/केसी/वीएस
(रिलीज़ आईडी: 2296237)
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