जल शक्ति मंत्रालय
जल जीवन मिशन के तहत गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति के लिए कई पहल की गईं
प्रविष्टि तिथि:
06 AUG 2026 5:10PM by PIB Delhi
जल जीवन मिशन (जेजेएम)– हर घर जल का शुभारंभ अगस्त 2019 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से किया गया था, ताकि ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता वाला और नियमित व दीर्घकालिक आधार पर पीने योग्य नल का पानी उपलब्ध कराया जा सके। जेजेएम के तहत, मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, पाइपलाइन जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के बीआईएस:10500 मानकों को बेंचमार्क के रूप में अपनाया गया है।
मिशन की शुरुआत में, देश में केवल 3.24 करोड़ (16.72 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास ही नल के पानी का कनेक्शन होने की जानकारी थी। 18 जुलाई 2026 तक, 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.89 करोड़ (82.09 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है।
जल जीवन मिशन (जेजेएम) के अंतर्गत, घरों तक नल का पानी पहुंचाने की योजना बनाते समय, रासायनिक संदूषण से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे पानी की गुणवत्ता की समस्या वाले गांवों में सुरक्षित वैकल्पिक जल स्रोतों या बड़े पैमाने पर पानी पहुंचाने की व्यवस्था के आधार पर पाइप जलापूर्ति योजनाओं को बनाएं और उन्हें कार्यान्वित करें। इसके अलावा, जेजेएम के अंतर्गत शुरू की जाने वाली कोई भी जल आपूर्ति योजना संबंधित राज्य सरकार की स्रोत खोज समिति की अनुशंसा पर ही स्वीकृत की जाती है। यह समिति यह प्रमाणित करती है कि योजना के लिए पहचाने गए जल स्रोत में, निर्धारित मानकों के अनुरूप जल आपूर्ति को निरंतर बनाए रखने के लिए पर्याप्त क्षमता है।
पेयजल राज्य का विषय होने के कारण, जल जीवन मिशन के अंतर्गत आने वाली योजनाओं सहित पेयजल आपूर्ति योजनाओं की प्लानिंग, डिज़ाइन, स्वीकृति, कार्यान्वयन, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों की होती है। भारत सरकार राज्यों को वित्तीय, नीतिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों में मदद करती है।
विभिन्न हितधारकों के परामर्श से, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मार्गदर्शन के लिए दिसंबर 2024 में 'ग्रामीण घरों में पाइप से पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता की निगरानी के लिए संक्षिप्त पुस्तिका' जारी की गई थी। इस पुस्तिका में पेयजल के नमूनों की विभिन्न परीक्षण बिंदुओं जैसे स्रोत, शोधन संयंत्र, भंडारण और वितरण बिंदुओं पर व्यापक जांच करने और जहां आवश्यक हो वहां सुधारात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि घरों में आपूर्ति किया जाने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता (बीआईएस:10500) का है। अनुशंसित सुधारात्मक उपायों में केमिकल से दूषित पानी के स्रोतों को तत्काल बंद करना; संबंधित अधिकारियों और प्रभावित समुदायों को परिणामों की जानकारी देना; पाइप से जलापूर्ति बहाल होने तक, 24 घंटे के भीतर सुरक्षित स्रोत या वैकल्पिक तरीकों से जेजेएम दिशा-निर्देशों के अनुसार (कम से कम 8-10 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराना; आपात स्थिति के शोधन उपायों लागू करना; साथ ही 7 दिनों के भीतर ओएचटी की सफाई और पाइपलाइन में रिसाव की जांच जैसे काम करना; सभी बुनियादी और क्षेत्र-विशिष्ट रसायन के साथ-साथ बैक्टीरियोलॉजिकल मापदंडों का परीक्षण करना; और अगर पानी सुरक्षित पाया जाता है, तो रासायनिक संदूषकों के मामले में सुरक्षित स्रोत से जलापूर्ति बहाल करना शामिल है। दूसरी ओर, यदि बैक्टीरिया से दूषित होने का मामला सामने आता है, तो तत्काल (24 घंटे के भीतर) कदम उठाने चाहिए। इनमें उचित कीटाणुशोधन, अधिकारियों और प्रभावित समुदायों को तुरंत सूचित करना, और टैंकरों (8-10 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) के माध्यम से सुरक्षित पेयजल की अस्थायी व्यवस्था करना शामिल है।
वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के दौरान परीक्षण किए गए पेयजल नमूनों का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
अनुलग्नक
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2295706)
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