इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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सरकार ने डिजिटल अवसंरचना, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन को मजबूत करने के लिए डिजिटल इंडिया प्रयासों की जानकारी दी


सुरक्षित और समावेशी डिजिटल कायाकल्प को बढ़ावा देने के लिए कानूनी ढांचा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और इंडिया एआई मिशन

प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 4:43PM by PIB Delhi

भारत सरकार ने जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया था। इसे प्रौद्योगिकी को सबके लिए सुलभ बनाने और नागरिकों को सशक्त बनाने के माननीय प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप आरंभ किया गया था। इस कार्यक्रम के मूल में तीन आपस में जुड़े लक्ष्य हैं: डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना, सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से प्रदान करना, और डिजिटल साक्षरता रोजगार के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाना।

सरकार ने डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन को बेहतर बनाने, इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार करने और पूरे देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम और नीतिगत उपाय लागू किए हैं। कुछ प्रमुख कार्यक्रमों का विवरण इस प्रकार है:

इंटरनेट कनेक्टिविटी: डिजिटल इंडिया ने इंटरनेट तक पहुंच के तेजी से विस्तार में योगदान दिया है, जिसमें भारतनेट जैसी पहल शामिल हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करना है। परिणामस्वरूप पूरे देश में इंटरनेट की उपलब्धता और उपयोग में काफी वृद्धि हुई है, और पिछले दशक में भारत में इंटरनेट की पहुंच बढ़ी है।

  • टेलीकॉम, इंटरनेट और ब्रॉडबैंड की पहुंच: भारत में कुल टेलीफोन कनेक्शन मार्च 2014 में 93.3 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में 133 करोड़ से अधिक हो गए।
  • इंटरनेट ग्राहकों की संख्या मार्च 2014 में 25.15 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में 109.27 करोड़ हो गई।
  • भारतनेट - गांवों को इंटरनेट से जोड़ना: भारतनेट परियोजना के अंतर्गत बनाई गई अवसंरचना राष्ट्रीय संपत्ति है, जो सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध है। इसका उपयोग ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है, जैसे कि वाई-फाई हॉटस्पॉट, फाइबर टू होम (एफटीटीएच) कनेक्शन, लीज्ड लाइन आदि। जून 2026 तक, पूरे देश में भारतनेट परियोजना के अंतर्गत कुल 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया गया है, और 80,472 ग्राम पंचायतों में भारतनेट के पॉइंट ऑफ प्रेजेंस चालू हैं। 
  • 30.06.2026 तक, डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) से फंडेड मोबाइल स्कीम के अंतर्गत देश भर में 24,784 टावर चालू किए गए हैं।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के ज़रिए सेवा वितरण: किफायती डेटा, असिस्टेड डिजिटल एक्सेस पॉइंट और इंटरऑपरेबल पब्लिक प्लेटफॉर्म नागरिकों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने, डिजिटल पेमेंट करने, ऑनलाइन शिक्षा लेने और गवर्नेंस में भाग लेने में सहायता कर रहे हैं। डेटा की कीमत 2014 में 269 रुपये प्रति GB से घटकर 2025-26 में लगभग 8-10 रुपये प्रति GB हो गई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे सस्ते डेटा बाज़ारों में से एक बन गया है।

  • आधार: आधार ने सुरक्षित और तुरंत डिजिटल प्रमाणीकरण के लिए भरोसेमंद बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफॉर्म बनाया है। 1.44 अरब से ज़्यादा आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी): आधार से जुड़े डीबीटी के ज़रिए, अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं (56 मंत्रालयों की 318 योजनाएं) का नकद लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित किया जाता है। पूरे देश में डीबीटी के ज़रिए 52 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा अंतरित किए गए हैं।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI):

o UPI 55.49 करोड़ से ज़्यादा लोगों और 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवा देती है और 731 बैंकों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है। इससे यह दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन गया है।

o UPI भारत के 85% डिजिटल पेमेंट और दुनिया भर के लगभग 50% रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट को सपोर्ट करती है।

  • DigiLocker: इस प्लेटफॉर्म पर 71.66 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड यूज़र हैं, और 2,822 ऑनबोर्डेड जारीकर्ताओं द्वारा 936.03 करोड़ से ज़्यादा डॉक्यूमेंट जारी किए गए हैं।
  • यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस (UMANG): यह प्लेटफॉर्म लोगों के लिए 2,575 सेवाएं प्रदान करता है। इनमें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इंटीग्रेट की गई 48 सेवाएं भी शामिल हैं।
  • e-Sanjeevani आपके स्मार्टफोन से सीधे डॉक्टरों और मेडिकल स्पेशलिस्ट तक जल्दी और आसानी से पहुँचने की सुविधा देता है। इस प्लेटफॉर्म ने पूरे देश में 48 करोड़ से ज़्यादा मरीज़ों को सेवा दी है।
  • सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी): सीएससी डिजिटल मोड में सरकारी और बिज़नेस सेवा दे रहे हैं। ये विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर (वीएलई) के ज़रिए ग्रामीण इलाकों में आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं। सीएससी के ज़रिए 800 से ज़्यादा सेवाएं दी जा रही हैं।  मई 2026 तक, देश भर में (ग्रामीण और शहरी इलाकों में) 5.01 लाख सीएससी काम कर रहे हैं, जिनमें से 3.91 लाख सीएससी ग्राम पंचायत स्तर (ग्रामीण) पर काम कर रहे हैं।

डिजिटल कौशल विकास: भारत का डिजिटल कायाकल्प सिर्फ़ एक्सेस तक सीमित नहीं है; यह लोगों और संस्थाओं को प्रौद्योगिकी का असरदार ढंग से इस्तेमाल करने के लिए सशक्त बनाने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने, डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करने और देश भर के नागरिकों को सक्षम बनाने पर केंद्रित है।

  • प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए) दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल साक्षरता योजनाओं में से एक है। इसके अंतर्गत देश भर में 6 करोड़ के लक्ष्य की तुलना में 6.39 करोड़ से ज़्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है।
  • FutureSkills Prime भारत सरकार और नैसकॉम की मिली-जुली पहल है। यह उभरती हुई प्रौद्योगिकी में स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग की सुविधा देती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, अब तक 34 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। उनमें से 23 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों ने अलग-अलग कोर्स में नामांकन किया है या प्रशिक्षण लिया है।
  • राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलटी) डिजिटल साक्षरता कोर्स जैसे कि अवेयरनेस इन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट (एसीसी), कोर्स ऑन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स (सीसीसी) वगैरह उपलब्ध कराता है। अभी, एनआईईएलटी अपने 56 केंद्र चलाता है और आईईसीटी क्षेत्रों में कौशल विकास की गतिविधियां चलाने के लिए 9000 से ज़्यादा साझेदार संस्थानों का देशव्यापी नेटवर्क भी है।

भारतीय IT/ITeS उद्योग: हमारी आईटी इंडस्ट्री एक्सपोर्ट बढ़ाने और रोज़गार के अवसर सर्जित करने में लगातार योगदान दे रही है। भारत की डिजिटल इकॉनमी बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर सर्जित कर रही है। नैसकॉम के अनुसार, IT और ITeS इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2025 में 283 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व कमाया है। भारत के 2,100 से ज़्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) में इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और एआई-आधारित भूमिकाओं में लगभग 26 लाख प्रोफेशनल्स काम करते हैं।

डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप: भारत के टियर-II और टियर-III शहरों में इलेक्ट्रॉनिकी और आईसीटी क्षेत्र में उद्यमिता पारिस्थितिकी को मज़बूत करने के लिए, MeitY ने देश में प्रौद्योगिकी-आधारित स्टार्टअप्स और नवाचार प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। इनमें से कुछ योजनाएं इस प्रकार हैं:

  • सरकार ने भारत के 73 सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (एसटीपीआई) सेंटर स्थापित किए हैं, जिनमें से 65 सेंटर टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित हैं।
  • 'जेन-नेक्स्ट सपोर्ट फॉर इनोवेटिव स्टार्टअप्स (GENESIS)' योजना का उद्देश्य टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को खोजने, उन्हें आगे बढ़ाने और उनका विकास करने के लिए लगभग 1,600 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बड़े स्तर पर ले जाना है। इस योजना को कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में 65 इनक्यूबेशन सेंटर्स के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

साइबर सिक्योरिटी उपाय: सरकार की नीतियों का उद्देश्य अपने यूज़र्स के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है। सरकार ने देश में साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कई कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक नीतिगत उपाय किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

(i) विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक (एनसीएससी)।

(ii) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के प्रावधानों के अंतर्गत, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को साइबर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।

(iii) CERT-In द्वारा कार्यान्वित राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (एनसीसीसी) देश में साइबरस्पेस को स्कैन करने और साइबर सिक्योरिटी खतरों का पता लगाने के लिए कंट्रोल रूम के रूप में कार्य करता है। एनसीसीसी साइबर सुरक्षा खतरों को कम करने के लिए कार्रवाई करने हेतु साइबरस्पेस से मेटाडेटा साझा करके विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुविधाजनक बनाता है। 

(iv) साइबर स्वच्छता केंद्र (सीएसके) CERT-In द्वारा दी जाने वाली नागरिकों पर केंद्रित सेवा है, जो 'स्वच्छ भारत' के विज़न को साइबर स्पेस तक ले जाती है। साइबर स्वच्छता केंद्र बॉटनेट क्लीनिंग और मैलवेयर एनालिसिस सेंटर है। यह नुकसानदायक कार्यक्रमों का पता लगाने और उन्हें हटाने के लिए मुफ़्त टूल उपलब्ध कराने में सहायता करता है। इसके साथ ही यह नागरिकों और संगठनों को साइबर सुरक्षा से जुड़े सुझाव और बेहतरीन तरीके भी बताता है।

(v) गृह मंत्रालय (एमएचए) ने साइबर अपराधों से बेहतर तालमेल और असरदार तरीके से निपटने के लिए 'इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) बनाया है।

(vi) इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 की धारा 70A के प्रावधानों के अंतर्गत, सरकार ने देश में महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे  की सुरक्षा के लिए 'नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर' (एनसीआईआईपीसी) की स्थापना की है।

(vii) इलेक्ट्रॉनिki और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सूचना सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम चलाता है। साइबर हाइजीन और साइबर सुरक्षा (जिसमें डीपफेक भी शामिल है) के विभिन्न पहलुओं पर जागरूकता फैलाने वाली सामग्रीजैसे हैंडबुक, छोटे वीडियो, पोस्टर, ब्रोशर, बच्चों के लिए कार्टून कहानियाँ, एडवाइज़री आदिको www.staysafeonline.in, www.infosecawareness.in और www.csk.gov.in जैसे पोर्टल्स के ज़रिए लोगों तक पहुँचाया जाता है।

डेटा सुरक्षा: सरकार ने देश में डेटा सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (“एक्ट”) डिजिटल पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग के लिए व्यापक ढांचा बनाता है। यह ढांचा व्यक्तियों के अपने पर्सनल डेटा की सुरक्षा के अधिकार और कानूनी उद्देश्यों के लिए ऐसे पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग की आवश्यकता को मान्यता देता है।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत, पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग केवल कानूनी उद्देश्य के लिए और या तो डेटा प्रिंसिपल की सहमति के आधार पर या कुछ वैध उपयोगों के लिए ही की जा सकती है। सहमति स्वतंत्र, विशिष्ट, जानकारीपूर्ण, बिना शर्त और स्पष्ट होनी चाहिए। इसके साथ ही, सहमति लेने से पहले या उसके साथ एक नोटिस भी दिया जाना चाहिए जिसमें एकत्र किए जाने वाले पर्सनल डेटा और उसकी प्रोसेसिंग के उद्देश्य के बारे में बताया गया हो।
  • यह अधिनियम और 13 नवंबर, 2025 को अधिसूचित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 (“रूल्स”) इसके प्रावधानों को अठारह महीने की ट्रांज़िशन अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की समय-सीमा तय करते हैं। इसमें डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की स्थापना भी शामिल है।

इस अधिनियम को लागू करके और रूल्स को अधिसूचित करके, सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक और नागरिक-केंद्रित ढांचा स्थापित किया है।

IndiaAI मिशन: भारत की एआई नीति प्रौद्योगिकी को लोकतांत्रिक बनाने के माननीय प्रधानमंत्री विजन पर आधारित है। इसका उद्देश्य युवाओं के लिए आर्थिक अवसर और रोजगार सर्जित करना है। इसके साथ ही इससे जुड़े जोखिमों का समाधान करना भी इसका उद्देश्य है।

भारत की एआई रणनीति भारत के जीवंत आईटी सेक्टर पर आधारित है। इसका सालाना राजस्व 300 बिलियन डॉलर है और इसमें 60 लाख लोगों की मजबूत श्रमशक्ति है। सरकार ने 7 मार्च 2024 को IndiaAI मिशन को मंजूरी दी। इसके लिए पांच वर्षों में कुल 10,371.92 करोड़ रुपये का खर्च तय किया गया। इसे सात स्तंभों के माध्यम से लागू किया जाएगा, जो इस प्रकार हैं:

  • IndiaAI कंप्यूट पिलर: भारत के तेजी से बढ़ते एआई स्टार्टअप और रिसर्च समुदायों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए हाई-एंड, स्केलेबल एआई कंप्यूटिंग इकोसिस्टम स्थापित करना।
  • फाउंडेशन मॉडल: स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs), मल्टीमॉडल मॉडल और डोमेन-विशिष्ट स्मॉल लैंग्वेज मॉडल के विकास पर ध्यान केंद्रित करना, ताकि सॉवरेन एआई क्षमताएं सुनिश्चित की जा सकें और भारत-विशिष्ट उपयोग के मामलों (use cases) का उपयोग किया जा सके।
  • IndiaAI एप्लीकेशन डेवलपमेंट पहल (IADI): महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाने में सक्षम, असरदार एआई समाधानों के विकास, विस्तार और उन्हें लागू करने में सहायता करना।
  • IndiaAI FutureSkills: एआई शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए टियर 2 और 3 शहरों में खास डेटा और एआई लैब बनाना, विद्यार्थियों को फेलोशिप देना और उद्योग की ज़रूरतों के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करना ताकि एआई टैलेंट की मज़बूत पाइपलाइन बन सके।
  • AIKosh (IndiaAI डेटासेट प्लेटफ़ॉर्म): एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाना जहाँ आसानी से उच्च-गुणवत्ता वाले डेटासेट, मॉडल और टूल मिल सकें; इसमें सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के संसाधनों को एक साथ लाकर ओपन इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई: भारत के खास सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक माहौल के हिसाब से बने घरेलू गवर्नेंस फ्रेमवर्क और मूल्यांकन टूल के ज़रिए ज़िम्मेदार एआई विकास को बढ़ावा देना।
  • IndiaAI स्टार्टअप फाइनेंसिंग: स्टार्टअप के पूरे सफ़र के दौरान रिस्क कैपिटल और मदद देना, ताकि शुरुआती प्रोटोटाइपिंग चरण से लेकर कमर्शियलाइज़ेशन तक फंडिंग की कमी को दूर किया जा सके।

यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने 05.08.2026 को लोकसभा में दी थी।

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