महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
वन स्टॉप सेंटर हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर समेकित तथा तत्काल सहायता और समर्थन प्रदान करता है
प्रविष्टि तिथि:
05 AUG 2026 4:31PM by PIB Delhi
वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) देशभर में हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को, चाहे वे निजी हों या सार्वजनिक स्थानों पर, एक ही छत के नीचे समेकित और तत्काल सहायता तथा समर्थन प्रदान करते हैं। यहाँ देशभर की जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता एवं परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता तथा मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। स्थापना के बाद से, अर्थात् 1 अप्रैल, 2015 से 30 जून, 2026 तक, 1033 वन स्टॉप सेंटरों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 991 वन स्टॉप सेंटर देशभर में संचालित किए जा चुके हैं और इन ओएससी के माध्यम से देश में 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है।
वर्तमान स्थिति के अनुसार, उत्तर प्रदेश राज्य में 124 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) संचालित किए जा चुके हैं, जिनमें 2024–25 के दौरान संचालित किए गए 7 ओएससी तथा 2025–26 के दौरान संचालित किए गए 36 ओएससी शामिल हैं। स्थापना के बाद से, अर्थात् 1 अप्रैल, 2015 से 30 जून, 2026 तक, उत्तर प्रदेश में इन ओएससी के माध्यम से 3.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है, जिनमें 2024–25 के दौरान 37,360 से अधिक महिलाएँ तथा 2025–26 के दौरान 52,278 से अधिक महिलाएँ शामिल हैं।
मिशन शक्ति एक केंद्र प्रायोजित योजना है और इस योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के जिम्मे है। मिशन शक्ति के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केंद्र सरकार संबल उप-योजना के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है। देशभर में ओएससी के सुचारु संचालन के लिए पर्याप्त कर्मचारी और बुनियादी ढाँचागत सहायता उपलब्ध कराई जाती है। निधियाँ, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) या एसएनए स्पर्श के लिए व्यय विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर जारी की जाती हैं।
मंत्रालय ने वन स्टॉप सेंटरों के कार्मिकों के लिए क्षमता निर्माण सत्रों के मानकीकरण हेतु सक्रिय कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस), संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए), सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (एसपीएनआईडब्ल्यूसीडी), राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (सी-डैक) के विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों को मनो-सामाजिक परामर्श, लैंगिक आधारित हिंसा के मामलों का प्रबंधन, लैंगिक संवेदनशीलता तथा डैशबोर्ड संचालन पर तकनीकी सत्र आयोजित कराने के लिए शामिल किया जाता है, ताकि कानूनी, चिकित्सीय और परामर्श सेवाओं तक पहुँच में सुधार किया जा सके।
अभिसरण को सुदृढ़ करने तथा ग्रामीण और शहरी ब्लॉकों में ओएससी की सहायता सेवाओं और पहुँच को निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने के लिए, ओएससी को महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल) के साथ एकीकृत किया गया है और अब तक 661 ओएससी का एकीकरण किया जा चुका है। इस एकीकरण के माध्यम से महिलाओं को समय पर और समन्वित तरीके से उपयुक्त सेवाओं के लिए संदर्भित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के लिए महिला हेल्पलाइन को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) तथा अन्य संबंधित सेवा प्रदाय तंत्रों के साथ भी एकीकृत किया गया है।
इसके अलावा, वर्ष में एक बार कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस योजना के अंतर्गत गतिविधियों की प्रगति की निगरानी करता है तथा उद्देश्यों की प्राप्ति की स्थिति, महिलाओं और बच्चों को सेवाओं की प्रभावी उपलब्धता की समीक्षा करता है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय के अधिकारी समय-समय पर बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के क्षेत्रीय दौरों के माध्यम से इस योजना की निरंतर समीक्षा करते हैं। मंत्रालय ने मिशन शक्ति डैशबोर्ड भी विकसित किया है, जो जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित योजनाओं के कार्यान्वयन की वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा प्रदान करता है।
यह जानकारी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/जेएस
(रिलीज़ आईडी: 2295019)
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