विद्युत मंत्रालय
बिजली क्षेत्र का आधुनिकीकरण और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति
प्रविष्टि तिथि:
03 AUG 2026 5:33PM by PIB Delhi
बिजली एक समवर्ती सूची का विषय है और बिजली वितरण का काम वितरण कंपनियाँ करती हैं, जो अपने-अपने राज्य नियामक आयोग (एसईआरसी) और राज्य सरकार के मार्गदर्शन में काम करती हैं।.
सरकार मुख्य रूप से (केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण) के माध्यम से व्यापक योजना बनाने के लिए जिम्मेदार है और इन योजनाओं को हकीकत में बदलने के लिए समय-समय पर सहायक नीतियाँ लाती है। इसके अतिरिक्त, सभी उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यों के प्रयासों को मजबूत करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान करती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 9,470 मेगावाट जीवाश्म ईंधन आधारित तथा 55,225 मेगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता जोड़ी गई। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026 के दौरान 2,668.54 मेगावाट / 7,785.6 मेगावाट-घंटे क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) भी जोड़ी गई। इसी अवधि में 12,139 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) अंतर्राज्यीय एवं राज्यांतर्गत विद्युत पारेषण लाइनों का भी विस्तार किया गया।
इसके अतिरिक्त, केन्द्र सरकार ने निम्नलिखित विशिष्ट उपाय किए हैं:
1. नवीकरणीय ऊर्जा (RE) का एकीकरण एवं ग्रिड का आधुनिकीकरण
- ग्रिड में सुरक्षित वहन क्षमता से मांग अधिक होने से बचने, विद्युत कटौती को न्यूनतम करने तथा नेटवर्क विस्तार की आवश्यकताओं का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय विद्युत योजना (पारेषण) के अंतर्गत समन्वित पारेषण योजना तैयार की जाती है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की रूक रूककर आपूर्ति से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार ग्रिड की स्थिरता तथा विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ऊर्जा भंडारण एवं हाइब्रिड समाधानों के संयोजन को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2031-32 तक लगभग 47 गीगावाट क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) के एकीकरण का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025-26 से 2035-36 की अवधि के दौरान 100 गीगावाट क्षमता वाले पम्प्ड स्टोरेज प्लांट्स (पीएसपी) के एकीकरण के लिए भी एक रोडमैप तैयार किया गया है।
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों तथा पूलिंग स्टेशनों का विकास किया जा रहा है, ताकि साझा अवसंरचना के माध्यम से बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का प्रभावी विद्युत निष्कासन सुनिश्चित किया जा सके।
- नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए हरित ऊर्जा गलियारा (जीईसी) योजना के अंतर्गत अंतरराज्यीय पारेषण परियोजनाओं हेतु नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के माध्यम से केन्द्र सरकार द्वारा बजटीय सहायता प्रदान की गई है।
- आपूर्ति को मांग के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से ग्रिड परिचालन को मजबूत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बेहतर पूर्वानुमान, शेड्यूलिंग, वास्तविक समय विद्युत प्रेषण तथा सहायक सेवाओं को सशक्त बनाया जा रहा है।
- वास्तविक समय विद्युत बाजार तथा लचीलापन तंत्र जैसे बाजार सुधार लागू किए गए हैं, जिससे उपलब्ध संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग तथा प्रणाली एकीकरण की लागत में कमी सुनिश्चित हो सके।
- केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) के सामान्य नेटवर्क अभिगम (जीएनए) विनियम, 2022 के तृतीय संशोधन के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा पूलिंग स्टेशनों पर उपलब्ध क्षमता का आकलन करते हुए सौर तथा गैर-सौर समयावधियों के लिए पृथक रूप से कनेक्टिविटी प्रदान की जाती है। इससे मौजूदा पारेषण परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है तथा समग्र प्रणाली लागत में कमी आती है।
- हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए कनेक्टिविटी क्षमता का आकलन इस प्रकार किया जाता है कि समग्र नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सके तथा ग्रिड का अधिक कुशल उपयोग संभव हो।
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में प्रस्तावित वृद्धि के अनुरूप अंतरराज्यीय पारेषण नेटवर्क को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं के लिए विकसित अंतर्राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) को राज्यांतर्गत पारेषण नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे संपूर्ण ग्रिड की विश्वसनीयता में वृद्धि हो।
- ग्रिड में वोल्टेज स्तर को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रतिक्रियाशील शक्ति के प्रवाह का गतिशील रूप से समायोजन करने हेतु अनेक अत्याधुनिक स्टैटिक सिंक्रोनस कम्पेन्सेटर (स्टेटकॉम) तथा स्टैटिक वीएआर कम्पेन्सेटर (एसवीसी) तैनात किए जा रहे हैं।
- भार एवं विद्युत उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उच्च रैम्प दर वाले विद्युत उत्पादन स्रोतों, जैसे जलविद्युत अथवा गैस आधारित विद्युत संयंत्रों, का भी इष्टतम रूप से निर्धारण किया जाता है।
- ऊर्जा भंडारण
- भारी उद्योग मंत्रालय ने मई 2021 में अनुमोदित “उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम” नामक उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना प्रारंभ की है। इस योजना का कुल परिव्यय 18,100 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य देश में 50 गीगावाट-घंटे क्षमता का उन्नत रसायन सेल (एसीसी) विनिर्माण स्थापित करना है। इसमें से 10 गीगावाट-घंटे क्षमता ग्रिड-स्तरीय स्थिर ऊर्जा भंडारण (जीएसएसएस) एप्लिकेशनों के लिए निर्धारित की गई है।
- विद्युत मंत्रालय ने मार्च 2022 में उत्पादन, पारेषण एवं वितरण परिसंपत्तियों के साथ-साथ सहायक सेवाओं के हिस्से के रूप में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की खरीद एवं उपयोग के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित किए।
- वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा ऊर्जा भंडारण प्रणालियों [बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली एवं पम्प्ड स्टोरेज प्लांट ] की खरीद के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) संबंधी दिशा-निर्देश अधिसूचित किए गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण की खरीद के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हुई है।
- सितम्बर 2023 में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय रूपरेखा जारी की गई, जिसमें ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों की तैनाती, बाजार में एकीकरण तथा नियामकीय सुविधा के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान किया गया है।
- सरकार ने सितम्बर 2023 में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना को स्वीकृति प्रदान की। इस योजना के अंतर्गत 13.22 गीगावाट-घंटे क्षमता वाली बीईएसएस परियोजनाएँ 3,760 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ कार्यान्वयनाधीन हैं। बीईएसएस की बढ़ती मांग को देखते हुए विद्युत मंत्रालय ने जून 2025 में 30 गीगावाट-घंटे क्षमता के बीईएसएस विकास हेतु विद्युत प्रणाली विकास निधि (पीएसडीएफ) से 5,400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के साथ एक और वीजीएफ योजना को मंजूरी दी।
- सरकार ने जून 2025 तक चालू होने वाली बीईएसएस परियोजनाओं तथा जून 2025 तक जिन जल पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) में निर्माण कार्य आवंटित हो चुका है, उनके लिए अंतर्राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई है। इसके बाद इस छूट में प्रतिवर्ष 25 प्रतिशत की कमी का प्रावधान है। सह-स्थित बीईएसएस परियोजनाओं के लिए जून 2028 तक चालू होने वाली परियोजनाओं पर 100 प्रतिशत आईएसटीएस शुल्क छूट का प्रावधान बढ़ा दिया गया है। इसी प्रकार, पीएसपी परियोजनाओं के लिए भी जून 2028 तक जिन परियोजनाओं में निर्माण कार्य आवंटित हो जाएगा, उन्हें 100 प्रतिशत आईएसटीएस शुल्क छूट प्रदान की जाएगी।
- विद्युत मंत्रालय ने 01 अगस्त 2025 के आदेश के माध्यम से केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा जलविद्युत उत्पादन स्टेशनों, ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप तथा ऑन-स्ट्रीम पीएसपी परियोजनाओं के लिए अनुमोदन की सीमा 1,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,000 करोड़ रुपये कर दी है। इसके अतिरिक्त, ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पीएसपी परियोजनाओं को सीईए की अनुमोदन आवश्यकता से छूट प्रदान कर दी गई है।
- फरवरी 2025 में सीईए ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ईएसएस) की सह-स्थापना पर एक परामर्श जारी किया। इसमें सिफारिश की गई कि सौर ऊर्जा के बेहतर प्रेषण के लिए स्थापित सौर क्षमता के कम-से-कम 10 प्रतिशत के बराबर ऊर्जा भंडारण क्षमता, न्यूनतम दो घंटे की अवधि के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
- सितम्बर 2025 में विद्युत नियमों में संशोधन के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विकास, स्वामित्व, पट्टे पर लेना अथवा उनका संचालन करने की अनुमति प्रदान की गई है। इससे ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में स्वामित्व एवं व्यावसायिक मॉडलों के विकल्पों का विस्तार हुआ है।
3. वितरण
- सरकार ने जुलाई 2021 में वित्तीय रूप से सुदृढ़ एवं परिचालन की दृष्टि से दक्ष विद्युत वितरण क्षेत्र के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) प्रारंभ की। इस योजना के अंतर्गत लाइन हानियों को कम करने तथा स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए क्रमशः 1.53 लाख करोड़ रुपये तथा 1.31 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। स्मार्ट मीटरिंग के अंतर्गत राज्यों/वितरण उपयोगिताओं द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर 19.79 करोड़ उपभोक्ता स्मार्ट मीटर, 52.53 लाख वितरण ट्रांसफॉर्मर (डीटी) मीटर तथा 2.05 लाख फीडर मीटर, अर्थात कुल 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटरों की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। अब तक इस योजना के अंतर्गत 5.73 करोड़ स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, राज्यों द्वारा अपनी राज्य योजनाओं एवं अन्य योजनाओं के तहत भी स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इस प्रकार, विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत देशभर में अब तक कुल 7.24 करोड़ स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।
- संशोधित वितरण क्षेत्र योजना के अतिरिक्त, विद्युत वितरण क्षेत्र के लिए निम्नलिखित पहलें की गई हैं:
- राज्य सरकारों को उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का अतिरिक्त 0.5 प्रतिशत उधार लेने की अनुमति प्रदान की गई है। यह अतिरिक्त उधार सीमा इस शर्त के साथ उपलब्ध कराई गई है कि राज्य सरकारें विद्युत क्षेत्र में निर्धारित सुधारों को लागू करें, जिनमें विद्युत वितरण उपयोगिताओं के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार भी शामिल है।
- राज्य सरकारों के स्वामित्व वाली विद्युत उपयोगिताओं को ऋण स्वीकृत करने के लिए अतिरिक्त विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित किए गए हैं। ये मानदंड निर्धारित शर्तों के अनुरूप विद्युत वितरण उपयोगिताओं के प्रदर्शन के आधार पर लागू किए जाते हैं।
- विद्युत आपूर्ति की सभी युक्तिसंगत लागतों को टैरिफ में समुचित रूप से शामिल किए जाने को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ईंधन एवं विद्युत क्रय लागत समायोजन (एफपीपीसीए) तथा लागत-आधारित टैरिफ के कार्यान्वयन हेतु नियम बनाए गए हैं।
- सब्सिडी का उचित लेखांकन तथा उसके समयबद्ध भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए नियम एवं मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई हैं।
केन्द्र एवं राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों तथा विभिन्न सुधारात्मक उपायों के परिणामस्वरूप देश में विद्युत पारेषण एवं वितरण हानियों में उल्लेखनीय कमी आई है। देशभर में कुल समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक (एटीऔरसी) हानियाँ वित्तीय वर्ष 2020-21 के 21.91 प्रतिशत से घटकर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15.04 प्रतिशत रह गई हैं। इन सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप, विद्युत कानून, 2003 के लागू होने के बाद पहली बार देश की विद्युत वितरण उपयोगिताओं ने समग्र रूप से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2,701 करोड़ रुपये का करोत्तर लाभ (पीएटी) अर्जित किया है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की उपलब्धता वित्तीय वर्ष 2014-15 के 12.5 घंटे से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 22.6 घंटे हो गई है। इसी प्रकार, शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की उपलब्धता बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 23.6 घंटे हो गई है।
वितरण, ग्रिड आधुनिकीकरण, पारेषण, ऊर्जा भंडारण तथा विद्युत के स्थानीयकृत उत्पादन एवं उपभोग से संबंधित ये उपाय स्थानीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुदृढ़ एवं लचीला बनाने, अर्थव्यवस्था के विद्युतीकरण को बढ़ावा देने, आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के विश्वसनीय एकीकरण को सक्षम बनाकर भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगे।
यह जानकारी विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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