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किसान क्रेडिट कार्ड – संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत निवेश किए गए प्रत्येक एक रुपये से कृषि और संबद्ध क्षेत्र में शुद्ध मूल्यवर्धन में 2.30 रुपये का योगदान होता है, तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में यह बात सामने आई है


इस योजना ने फसल सघनता और बहु-मौसमी खेती पर सकारात्मक प्रभाव डाला है

सरकार ने कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई-केसीसी, कृषिका जैसी कई तकनीकी पहल शुरू की हैं

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 4:26PM by PIB Delhi

किसान क्रेडिट कार्ड – संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन बेंगलुरु स्थित सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन संस्थान (आईएसईसी) के माध्यम से किया गया है। सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इसका उद्देश्य भारत के विविध कृषि क्षेत्रों में योजना के कामकाज का आकलन करना है।

आईएसईसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

    1. किसान क्रेडिट कार्ड – संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत निवेश किया गया प्रत्येक 1 रुपया कृषि और संबद्ध क्षेत्र में शुद्ध मूल्यवर्धन में 2.30 रुपये का योगदान देता है।
    2. संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना ने किसानों पर ब्याज का बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसकी शुरुआत से लेकर 2024-25 तक अनुमानित सब्सिडी राशि 1.87 लाख करोड़ रुपये है।
    3. इस योजना ने फसल सघनता और बहु-मौसमी खेती पर सकारात्मक प्रभाव डाला है, इससे किसान क्रेडिट कार्ड – संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के किसान बड़े क्षेत्रों में खेती कर रहे हैं, उच्च फसल सघनता प्राप्त कर रहे हैं और विश्वसनीय सिंचाई और रियायती ऋण द्वारा समर्थित विभिन्न मौसमों में अधिक विविधतापूर्ण फसल पोर्टफोलियो अपना रहे हैं;
    4. इससे पर्याप्त कार्यशील पूंजी तक पहुंच के माध्यम से इनपुट उपयोग की समयबद्धता में सुधार हुआ है, और शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन (पीआरआई) प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने बेहतर ऋण अनुशासन का प्रदर्शन किया है, इससे ऋण देने के लिए बैंकों का विश्वास बढ़ा है;
    5. इस योजना ने दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के विस्तार को बढ़ावा दिया है और फसल आय में वृद्धि करके, मौसमी कृषि पर निर्भरता कम करके और पशुधन एवं मत्स्य पालन को फसल उत्पादन के साथ एकीकृत करके आय विविधीकरण को प्रोत्साहित किया है। इसने अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं (डब्ल्यूसीआर) को भी पूरा करने में सहायता प्रदान की है, जो उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में विविधीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।

सरकार ने समय पर और किफायती संस्थागत ऋण सुनिश्चित करने, किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज का विस्तार करने, आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, छोटे और सीमांत किसानों सहित डिजिटल पहुंच को मजबूत करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, इनमें अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. जमीनी स्तर पर कृषि ऋण लक्ष्यों और बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्यों का वार्षिक निर्धारण।
  2. किसान क्रेडिट कार्ड में बिना गारंटी के ऋण लेने की सीमा मौजूदा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है, जो 01.01.2025 से प्रभावी होगी।
  3. कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई- किसान क्रेडिट कार्ड, कृषिका आदि जैसी कई तकनीकी पहल भी शुरू की गई हैं।
  4. किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लाभों के बारे में जागरूक करने और इसके दायरे को बढ़ाने के लिए, केंद्र/राज्य सरकारें, आरबीआई, नाबार्ड और राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी), बैंक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम और सूचना एवं संचार संचार (आईईसी) आयोजित करते हैं।

(सूचना, शिक्षा और संचार) और किसान क्रेडिट कार्ड संतृप्ति अभियान।

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज लोकसभा में यह जानकारी दी।

अनुलग्नक

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पीके/केसी/वीके/एसवी


(रिलीज़ आईडी: 2293985) आगंतुक पटल : 108
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