कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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कौशल विकास और विस्तारमान कार्यबल

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 4:07PM by PIB Delhi

सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय द्वारा आयोजित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए भारत की समग्र श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) वर्ष 2024 में 59.6 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2025 में 59.3 प्रतिशत रही है, अर्थात इसमें केवल मामूली कमी दर्ज की गई है।

भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (एसआईएम) के अंतर्गत कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से संचालित शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत देशभर में स्थापित व्यापक कौशल विकास केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनः कौशलीकरण तथा कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना तथा उन्हें उद्योग की मांग के अनुरूप प्रासंगिक कौशलों से सुसज्जित करना है।

उद्योग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उभरते क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से एमएसडीई द्वारा, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  • राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना एक शीर्ष नियामक के रूप में की गई है, जो तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विनियमों एवं मानकों का निर्धारण करती है। एनसीवीईटी उद्योग संगठनों को अवार्डिंग बॉडीज़(एबी) तथा/अथवा मूल्यांकन अभिकरण (एए) के रूप में मान्यता प्रदान करती है।
  • अवार्डिंग बॉडीज़ से अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुरूप योग्यताओं का विकास करें, उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार चिन्हित व्यवसायों से संबद्ध करें तथा उनके लिए उद्योग से अनुमोदन प्राप्त करें। राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप 10,209 योग्यताओं को अनुमोदित किया है, जिनमें से 2,975 योग्यताएँ वर्तमान में वैध एवं सक्रिय हैं, जबकि 7,234 योग्यताओं को अभिलेखागार में रखा गया है।
  • प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी एमओयू योजना तथा द्वैध प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) का क्रियान्वयन कर रहा है, ताकि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के प्रशिक्षुओं को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
  • प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने राज्य एवं क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण संस्थानों के उद्योगों से बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, ऑटोडेस्क, एडब्ल्यूएस, शेल आदि सूचना प्रौद्योगिकी एवं अन्य कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से आधुनिक तथा हरित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 में व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ अधिक व्यापक रूप से एकीकृत करने तथा शैक्षणिक एवं व्यावसायिक शिक्षा के बीच निर्बाध आवागमन को प्रोत्साहित करने की परिकल्पना की गई है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के सहयोग से विकसित शिक्षुता-समाविष्ट डिग्री कार्यक्रम (एईडीपी) के अंतर्गत डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम के अभिन्न अंग के रूप में शिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त करने की सुविधा प्रदान की गई है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों की रोजगारयोग्यता बढ़ाने, परिणाम-आधारित अधिगम को प्रोत्साहित करने, उद्योगशैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय को सुदृढ़ बनाने तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल अर्जित करने में सहायक है।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग (एआई/एमएल), रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि जैसे क्षेत्रों में नवोन्मेषी एवं भावी कौशल से संबंधित कार्य-भूमिकाओं को उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं, उभरती बाजार मांग तथा उद्योग की जरूरतों के अनुरूप विशेष रूप से विकसित किया गया है।
  • डीजीटी ने सीटीएस के अंतर्गत 5जी नेटवर्क, एआई प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, ड्रोन प्रौद्योगिकी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु नवोन्मेषी एवं भावी कौशल संबंधी नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं।
  •  सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत अहमदाबाद एवं मुंबई में दो भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उभरते आर्थिक अवसरों के अनुरूप उद्योग के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना है।
  • विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग विशेषज्ञों के नेतृत्व में 36 क्षेत्र कौशल परिषदों (एसएससी) का गठन किया गया है, जिन्हें संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने का दायित्व सौंपा गया है।

 

एमएसडीई की विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत प्रशिक्षित/नामांकित अभ्यर्थियों का विवरण निम्नानुसार है:

पीएमकेवीवाई (आरंभ से दिनांक 30.06.2026 तक)

जेएसएस

(2018-19 से 30.06.2026 तक)

एनएपीएस

(2018-19 से 30.06.2026 तक)

सीटीएस/आईटीआई

(सत्र 2018 से 2025)

16,541,679

36,58,020

52,98,397

1,07,42,151

 

एमएसडीई की विभिन्न स्कीमों में से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अल्पकालिक प्रशिक्षण घटक के अंतर्गत ही इसके प्रारंभिक तीन चरणोंपीएमकेवीवाई 1.0, पीएमकेवीवाई 2.0 तथा पीएमकेवीवाई 3.0 (वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2021-22 तक) में नियोजन (प्लेसमें) को ट्रैक किया गया था। इन स्कीमों के अंतर्गत अल्पकालिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रमाणित 56.89 लाख अभ्यर्थियों में से 24.30 लाख अभ्यर्थियों के नियोजन की सूचना प्राप्त हुई, जो 42.8 प्रतिशत की नियोजन दर को दर्शाती है। पीएमकेवीवाई 4.0 के अंतर्गत प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रमों, जिनमें ऑन--जॉब प्रशिक्षणओजेटी भी सम्मिलित है, के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप विविध कैरियर विकल्पों का चयन करने के लिए सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया है।

एमएसडीई की स्कीमें माँग-आधारित हैं तथा इनके अंतर्गत प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना अथवा उन्हें संबद्ध किया जाना आवश्यकता के अनुसार किया जाता है। दिनांक 30.06.2026 की स्थिति के अनुसार, मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत स्थापित अथवा संबद्ध प्रशिक्षण केंद्रों का विवरण निम्नानुसार है:

 

पीएमकेवीवाई 4.0

केन्द्र (एसटीटी+एसपी) *

जेएसएस

केन्द्र

एनएपीएस

प्रतिष्ठान

आईटीआई

सरकारी.

निजी.

13,633

294

57,935

3,328

10,528

* दिनांक 30.06.2026 तक अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) एवं विशेष परियोजनाएँ (एसपी)

 

इसके अतिरिक्त, देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता एवं प्रासंगिकता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पीएम सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन) स्कीम के अंतर्गत, अन्य बातों के साथ-साथ, हब एवं स्पोक मॉडल पर आधारित 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) (200 हब आईटीआई तथा 800 स्पोक आईटीआई) के उन्नयन का प्रावधान किया गया है। इस उन्नयन में स्मार्ट कक्षाएँ, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, डिजिटल शिक्षण सामग्री तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर तथा लुधियाना स्थित पाँच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) की क्षमता में वृद्धि करने का भी प्रावधान है। इसके अंतर्गत वैश्विक भागीदारी के साथ प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए, क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना भी की जाएगी।

कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री जयन्‍त चौधरी ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एसकेएस/केके

 


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