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आयुष
आयुष गुणवत्ता मार्क का कार्यान्वयन
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2026 3:34PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि द्वितीय विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के अवसर पर जारी किया गया ‘आयुष गुणवत्ता चिह्न’ आयुष उत्पादों एवं सेवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर स्वीकृत गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने हेतु एक समेकित गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था के रूप में कार्य करता है। इस पहल के कार्यान्वयन का दायित्व आयुषएक्सिल को सौंपा गया है, जो वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा अधिसूचित आयुष निर्यात संवर्धन परिषद् है तथा इसे आयुष मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। आयुष गुणवत्ता चिह्न में आयुष उत्पाद, आयुष अस्पताल, डे-केयर केंद्र, क्लीनिक, आरोग्य केंद्र, चिकित्सा मूल्य यात्रा सुविधा प्रदाता (एमवीटीएफ) तथा आयुष उत्पाद परीक्षण प्रयोगशालाएँ शामिल हैं। यह व्यवस्था गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों के अनुरूप है तथा प्रत्यायित प्रमाणन व्यवस्था के माध्यम से समर्थित है। यह पहल आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (एओजीयूएसवाई) के अंतर्गत गुणवत्ता नियंत्रण अवसंरचना, विनियामक क्षमता, औषधि सुरक्षा निगरानी तथा मानकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे सतत उपायों से भी समर्थित है।
आयुष मंत्रालय द्वारा ‘आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना’ (एओजीयूएसवाई) नामक केंद्रीय की क्षेत्र योजना का कार्यान्वयन किया गया है, जिसे दिनांक 16.03.2021 को स्थायी वित्त समिति (एसएफसी) द्वारा अनुमोदित किया गया था। इस योजना के लिए कुल बजट आवंटन पाँच वर्षों के लिए 122.00 करोड़ रुपये है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, एओजीयूएसवाई योजना के तहत 03 राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (डीटीएल) को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। वर्ष 2025-26 के दौरान एओजीयूएसवाई के तहत औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन हेतु आवंटित एवं जारी की गई कुल धनराशि का विवरण संलग्नक-I में दिया गया है।
आयुष औषधियों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विनियामक उपायों को सुदृढ़ करने हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के अनुसार औषधि उत्पाद प्रमाणपत्र (सीओपीपी) की व्यवस्था को आयुर्वेद, सिद्ध एवं यूनानी (एएसयू) औषधियों तक विस्तारित किया गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में विनिमय होने वाले औषधि उत्पादों की गुणवत्ता से संबंधित विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमाणन योजना के अंतर्गत निर्यात के लिए अभिप्रेत एएसयू औषधियों हेतु सीओपीपी जारी करता है। सीओपीपी आयातक देशों में उत्पाद पंजीकरण के उद्देश्य से जारी किया जाता है तथा यह डब्ल्यूएचओ तकनीकी रिपोर्ट श्रृंखला (टीआरएस) के अनुसार लागू दिशानिर्देशों एवं विनियामक अपेक्षाओं के अनुरूप सीडीएससीओ, आयुष मंत्रालय तथा संबंधित अनुज्ञापन प्राधिकरण के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण पर आधारित होता है।
आयुष मंत्रालय द्वारा केंद्रीय क्षेत्र की ‘आयुर्ज्ञान योजना’ का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इस योजना में आयुर्वेद जीवविज्ञान एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान (एबीआईएचआर) को तृतीय घटक के रूप में शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद एवं आधुनिक विज्ञान के समन्वय से सहयोगात्मक, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के लिए सहयोग प्रदान करना है। इस घटक का उद्देश्य पूर्व-नैदानिक और नैदानिक अनुसंधान के माध्यम से आयुर्वेदिक सिद्धांतों और उपचार पद्धतियों के वैज्ञानिक सत्यापन को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करना और देशभर में अंतर-संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है। एबीआईएचआर घटक के तहत आदिनांक 11 अनुसंधान परियोजनाएँ अनुमोदित की गई हैं, जिनका विवरण संलग्नक-II में दिया गया है।
आयुष मंत्रालय को कंधमाल सहित ओडिशा से शैक्षणिक संस्थानों में इन अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पहलों अथवा अनुसंधान अवसंरचना के विस्तार के संबंध में कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। अतः, ओडिशा में विशिष्ट आयुष अनुसंधान इकाइयों की स्थापना के लिए ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
(छ): आयुष मंत्रालय द्वारा देश में आयुष औषधियों/दवाओं की गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था, परीक्षण प्रणाली एवं वैश्विक स्वीकार्यता को सुदृढ़ करने हेतु निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 में आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी एवं होम्योपैथी (एएसएसयू एंड एच) दवाओं के लिए विशेष विनियामक प्रावधान हैं। निर्माताओं के लिए विनिर्माण इकाइयों और औषधियों के लाइसेंस हेतु निर्धारित अपेक्षाओं का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें सुरक्षा और प्रभावशीलता का प्रमाण, औषध नियम, 1945 की अनुसूची टी और अनुसूची एम-आई के अनुसार आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी औषधियों के लिए अच्छी विनिर्माण प्रथाओं (जीएमपी) का अनुपालन करना तथा संबंधित भेषजसंहिता में निर्धारित औषधियों के गुणवत्ता मानकों का पालन करना शामिल है।
औषधि निरीक्षक अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत विनिर्माण इकाइयों या खुदरा दुकानों से नियमित रूप से औषधियों के नमूने एकत्र करते हैं तथा गुणवत्ता परीक्षण हेतु औषधि नियंत्रण विभाग के अंतर्गत स्थित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में भेजते हैं और यदि कोई नमूना 'मानक गुणवत्ता का नहीं' पाया जाता है, तो औषधियों की बिक्री को बाजार में रोकने तथा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई करने जैसे आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के औषधि निरीक्षकों द्वारा लिए गए वैध नमूनों की जाँच हेतु राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में 34 औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएँ उपलब्ध हैं।
- आयुष मंत्रालय के अधीनस्थ संगठन, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषजसंहिता आयोग (पीसीआईएम एंड एच) आयुष औषधियों के लिए भेषजसंहिता संबंधी मानक और सूत्रयोग विनिर्देश तैयार करता है, जिन्हें उनकी पहचान, शुद्धता एवं गुणवत्ता-क्षमता के निर्धारण के लिए आधिकारिक संहिताओं के रूप में उपयोग किया जाता है। इन मानकों का अनुपालन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत अनिवार्य है। पीसीआईएम एंड एच आयुष दवाओं के लिए अपीलीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में भी कार्य करता है तथा आयुष औषधियों की गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं परीक्षण पद्धतियों के संबंध में औषधि विनियामक प्राधिकरणों, औषधि विश्लेषकों और अन्य हितधारकों हेतु नियमित क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
- आयुष मंत्रालय द्वारा औषधि नियम, 1945 के नियम 160क से 160ञ के तहत औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को आयुष औषधियों की पहचान, शुद्धता, गुणवत्ता एवं शक्ति से संबंधित परीक्षण करने के लिए अनुमोदित किया गया है। वर्तमान में, मंत्रालय द्वारा औषधि नियम, 1945 के प्रावधानों के तहत ऐसे परीक्षणों के संचालन हेतु राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में 118 निजी औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को अनुमोदित किया गया है।
- इसके अतिरिक्त, आयुष मंत्रालय द्वारा ‘आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना’ (एओजीयूएसवाई) नामक केंद्रीय क्षेत्र की योजना कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को क्रमशः डब्ल्यूएचओ-जीएमपी तथा राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) के उच्च मानकों को प्राप्त करने हेतु सहायता प्रदान की जाती है।
- इसके साथ ही, आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष उत्पादों की गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था और प्रमाणन को बढ़ावा देने हेतु निम्नलिखित पहलें की गई हैं:
- विनियामक निरीक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, सीडीएससीओ में आयुष प्रभाग (वर्टिकल) राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के साथ संयुक्त निरीक्षण के माध्यम से पात्र आयुष औषधियों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन औषधि उत्पाद प्रमाणपत्र (डब्ल्यूएचओ-सीओपीपी) जारी करने की सुविधा प्रदान करता है।
- आयुष औषधियों को आयुष मानक चिह्न एवं आयुष प्रीमियम चिह्न भारतीय गुणवत्ता परिषद् (क्यूसीआई) द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के आधार पर प्रदान किए जाते हैं।
- आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष गुणवत्ता चिह्न कार्यक्रम का शुभारंभ गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने, उपभोक्ता का विश्वास बढ़ाने तथा आयुष उत्पादों एवं सेवाओं की वैश्विक मान्यता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने के लिए किया गया है।
- आयुर्वेद और योग को आईएसओ/टीसी249 की अनुभागीय समिति-2 के तहत शामिल किया गया है, ताकि आयुर्वेद और योग से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों, पारिभाषिक शब्दावली, सामग्री, अर्कों, तैयार उत्पादों, आयुर्वेद-आधारित आहार अनुपूरकों, योग सहायक सामग्रियों आदि की गुणवत्ता एवं सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
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संलग्नक-I
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एओजीयूएसवाई के तहत औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (डीटीएल) के उन्नयन हेतु आवंटित एवं जारी की गई कुल राशि का विवरण निम्नानुसार है:
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एओजीयूएसवाई (डीटीएल और फार्मेसियों के उन्नयन हेतु) के सहायता अनुदान (जीआईए) मद के अंतर्गत 17.50 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
- राज्य डीटीएल के उन्नयन हेतु आवंटित और जारी की गई राशि का विवरण निम्नानुसार है-
(राशि रुपये में)
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क्र.सं.
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राज्य
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घटक
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सरकार/निजी/
पीएसयू
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विवरण
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स्वीकृत/आवंटित कुल राशि
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पिछले वर्षों में जारी की गई राशि
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वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी की गई राशि
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1.
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अरुणाचल प्रदेश
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उच्च मानकों की प्राप्ति हेतु आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन।
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सरकार
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राज्य सरकार डीटीएल
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53,24,026
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2023-24:
17,99,813
2024-25:
17,24,400
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17,99,813
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2.
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मिज़ोरम
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सरकार
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राज्य सरकार डीटीएल
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1,60,61,384
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2021-22:
18,00,000
2023-24:
67,20,884
2024-25:
57,40,500
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18,00,000
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3.
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मध्य प्रदेश
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सरकार
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राज्य सरकार डीटीएल
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75,83,262
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-
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75,83,262
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संलग्नक-II
आयुष मंत्रालय की आयुर्ज्ञान योजना के एबीआईएचआर घटक के अंतर्गत संचालित अनुसंधान परियोजनाओं का राज्यवार विवरण:
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राज्य
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परियोजना शीर्षक
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आंध्र प्रदेश
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आयुर्वेद में प्रयुक्त चयनित एकल वनस्पति पर औषधि मास्टर फाइल एवं तकनीकी डोज़ियर तैयार करना।
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ट्राइगोनेला फोएनम ग्रीकम का तकनीकी डोज़ियर तैयार करना - चरण I (पूर्व-नैदानिक अध्ययन, जिसमें मौखिक विषाक्तता, जीन-विषाक्तता, प्रभावकारिता, फार्माकोकाइनेटिक अध्ययन तथा कृंतकों में सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन शामिल हैं)।
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गुजरात
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जिंजिबर ऑफिसिनेल के तकनीकी डोज़ियर तैयार करना- चरण I (पूर्व-नैदानिक अध्ययन, जिसमें मौखिक विषाक्तता, जीन-विषाक्तता, प्रभावकारिता, फार्माकोकाइनेटिक अध्ययन और कृंतकों में सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन शामिल हैं)।
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कर्नाटक
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बाकोपा मोन्निएरी के तकनीकी डोज़ियर तैयार करना- चरण I (पूर्व-नैदानिक अध्ययन, जिसमें मौखिक विषाक्तता, जीन-विषाक्तता, प्रभावकारिता, फार्माकोकाइनेटिक अध्ययन तथा कृन्तकों में सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन शामिल हैं)।
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कर्नाटक
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रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के प्रबंधन हेतु आयुर्वेद चिकित्सा से संभावित उपचारात्मक विकल्पों का अन्वेषण।
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मध्य प्रदेश
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चयनित आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन त्रिफला चूर्ण, लशुनादी वटी और बृहत वात चिंतामणि रस का पूर्व-नैदानिक विषविज्ञान संबंधी मूल्यांकन तथा सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन।
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महाराष्ट्र
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बोसवेलिया सेराटा के तकनीकी डोज़ियर तैयार करना- चरण I (पूर्व-नैदानिक अध्ययन, जिसमें मौखिक विषाक्तता, जीन-विषाक्तता, प्रभावकारिता, फार्माकोकाइनेटिक अध्ययन तथा कृन्तकों में सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन शामिल हैं)।
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महाराष्ट्र
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चयनित आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन - लक्ष गुग्गुलु, दाडिमादि घृत और एकांगवीर रस का पूर्व-नैदानिक विषविज्ञान संबंधी मूल्यांकन तथा सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन।
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उत्तर प्रदेश
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विथानिया सोम्निफेरा के तकनीकी डोज़ियर तैयार करना - चरण I (पूर्व-नैदानिक अध्ययन, जिसमें मौखिक विषाक्तता, जीन-विषाक्तता, प्रभावकारिता, फार्माकोकाइनेटिक अध्ययन तथा कृंतकों में सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन शामिल हैं)।
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पश्चिम बंगाल
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राज: प्रवर्तिनी वटी, फल घृत एवं द्राक्षावलेह का पूर्व-नैदानिक विषविज्ञान संबंधी मूल्यांकन तथा सुरक्षा औषधिविज्ञान संबंधी अध्ययन।
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चयनित आयुर्वेदिक औषधियों एवं फॉर्मूलेशन का विषविज्ञान संबंधी मूल्यांकन, सुरक्षा आकलन और मेटाबोलोमिक प्रोफाइल निर्धारण।
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पीके/केसी/जेके/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2292622)
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