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आयुष
बहुआयामी आयुष पहलों के माध्यम से आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का एकीकरण
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2026 3:33PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि आयुष मंत्रालय विभिन्न पहलों के माध्यम से आयुर्वेद के ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:
- स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत आयुष वर्टिकल की स्थापना: आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत एक आयुष वर्टिकल की स्थापना की गई है। यह आयुष सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की योजना बनाने, निगरानी करने और पर्यवेक्षण के लिए एक समर्पित संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है। साथ ही, यह स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, चिकित्सा शिक्षा और क्षमता निर्माण में आयुष के एकीकरण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
- मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) का विकास: डीजीएचएस के अंतर्गत आयुष वर्टिकल ने नैदानिक एकीकरण को सुगम बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) विकसित किए हैं। छह सामान्य मस्कुलोस्केलेटल विकारों और पांच सामान्य चयापचय संबंधी विकारों के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश क्रमशः वर्ष 2024 और 2025 में प्रकाशित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो के सहयोग से राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है, जिसके बाद राज्यों और केंद्र राज्य क्षेत्रों में चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।
- केंद्र सरकार के अस्पतालों में एकीकृत आयुष विभाग: वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल तथा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में एकीकृत आयुष विभागों की स्थापना की गई है। ये विभाग पंचकर्म सहित निवारक, स्वास्थ्य संवर्धक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। आयुष अनुसंधान परिषदें भी वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली में विस्तारित आयुष ओपीडी सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।
- आयुष स्वास्थ्य देख-रेख सेवा संस्थानों के लिए भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) (2024): आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और आयुष अस्पतालों के लिए आईपीएचएस विकसित किए गए हैं। इन मानकों का उद्देश्य बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, औषधियों और सेवा वितरण की गुणवत्ता को मानकीकृत करना है। इसके माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के अंतर्गत आयुष सेवाओं के एकीकरण को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य परामर्श: मंत्रालय ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के साथ समन्वय से लू और मंकीपॉक्स पर आयुष सार्वजनिक स्वास्थ्य परामर्श जारी किए हैं। ये परामर्श राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों और प्रतिक्रिया तंत्र में आयुष के एकीकरण को समर्थन प्रदान करते हैं।
- आयुष महाविद्यालयों में तंबाकू निषेध केंद्र (टीसीसी) की स्थापना के लिए परिचालन दिशानिर्देश (2025): राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के अंतर्गत, डीजीएचएस के आयुष वर्टिकल ने आयुष महाविद्यालयों में तंबाकू निषेध केंद्र (टीसीसी) की स्थापना के लिए परिचालन दिशानिर्देश विकसित और प्रसारित किए हैं। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य तंबाकू निषेध सेवाओं में आयुष आधारित समाधानों के एकीकरण को सुगम बनाना है। इन दिशानिर्देशों के अनुसार 450 से अधिक आयुष महाविद्यालयों में तंबाकू निषेध केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।
- भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला अस्पतालों (डीएच) में आयुष सुविधाओं के सह-स्थापन की कार्यनीति अपनाई है। इसके माध्यम से रोगियों को एक ही स्थान पर विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों में से अपनी आवश्यकता के अनुसार उपचार प्रणाली चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष चिकित्सकों/पैरा चिकित्सकों कर्मियों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण का समर्थन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत किया जाता है। वहीं, आयुष अवसंरचना, उपकरण/फर्नीचर और औषधियों के लिए सहायता आयुष मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत साझा जिम्मेदारी के रूप प्रदान की जाती है।
- भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) ने आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों में बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) के लिए आयुष मॉड्यूल – इंटर्नशिप इलेक्टिव्स तैयार किया गया है। यह मॉड्यूल एमबीबीएस इंटर्न को आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों का व्यवस्थित एवं संरचित अनुभव प्रदान करता है, जिससे अंतःविषयक शिक्षण और एकीकृत स्वास्थ्य देख-रेख सेवा को बढ़ावा मिलता है। भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग (स्नातक आयुर्वेद शिक्षा के न्यूनतम मानक) विनियम, 2022 के विनियम 10(7) के अनुसार, आयुर्वेद शिक्षण पाठ्यक्रम की विषयवस्तु में चिकित्सा में आधुनिक प्रगति का अनुपात अधिकतम 40 प्रतिशत तक रखा जा सकता है।
- आयुष मंत्रालय वर्ष 2021-22 से आयुर्ज्ञान नामक एक केंद्रीय क्षेत्र योजना का कार्यान्वयन कर रहा है। इस योजना के तीन घटक हैं— (1) आयुष में क्षमता निर्माण एवं सतत् चिकित्सा शिक्षा, (2) वर्ष 2021-22 से आयुष में अनुसंधान एवं नवाचार, तथा (3) वर्ष 2023-24 से आयुर्वेद जीवविज्ञान एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान (एबीआईएचआर)। योजना के एबीआईएचआर घटक के अंतर्गत, पात्र संस्थानों को योजना के दिशानिर्देशों में दिए गए प्रावधानों के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, ताकि बुनियादी विज्ञान को पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करके आयुर्वेद के क्षेत्र में उच्च स्तरीय अनुसंधान किया जा सके।
- आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ बेहतर रूप से एकीकृत करने के उद्देश्य से, आयुष मंत्रालय ने आयुर्स्वास्थ्य योजना के उत्कृष्टता केंद्र घटक के अंतर्गत नौ राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इनमें टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी), मुंबई; केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान(सीडीआरआई), लखनऊ; जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली; भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस), बेंगलुरु; एकीकृत चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (सीआईएमआर), एम्स, नई दिल्ली; राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (एनआईएमएएनएचएस), बेंगलुरु; यकृत एवं पित्त संबंधी विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस), नई दिल्ली तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), जोधपुर शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य आयुष और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के बीच अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना है, जिससे आयुष चिकित्सा पद्धतियों की प्रभावशीलता में वृद्धि हो और उनकी वैश्विक स्वीकार्यता को बढ़ावा मिले। परियोजनाओं का विवरण संलग्नक-I में दिया गया है।
- केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) और आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करने के लिए की गई पहलों का विवरण संलग्नक-II में दिया गया है।
आयुष मंत्रालय प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद को बढ़ावा देने और नागरिकों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से आयुर्वेद दिवस का आयोजन करता है। 10वां आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर, 2025 को “मानव और धरती के लिए आयुर्वेद” विषय के साथ मनाया गया, जिसमें समग्र स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता पर विशेष जोर दिया गया। 10वें आयुर्वेद दिवस के आयोजन के अवसर पर देशभर में विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें निःशुल्क परामर्श, नैदानिक सेवाएँ और औषधियों के वितरण के लिए आयुर्वेद स्वास्थ्य शिविर; गैर-संचारी रोगों, वृद्धावस्था देखभाल, महिला एवं बाल स्वास्थ्य तथा जीवनशैली संबंधी विकारों पर केंद्रित विशेष शिविर; और पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में जनसंपर्क सेवाएँ शामिल थीं। शैक्षणिक एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियाँ भी इस आयोजन का एक प्रमुख हिस्सा रहीं, जिनके अंतर्गत साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए संगोष्ठियों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सीएमई कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और विशेषज्ञ व्याख्यानों का आयोजन किया गया। गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित 10वें आयुर्वेद दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान अनेक परियोजनाओं/पहलों का उद्घाटन एवं शुभारंभ किया गया। प्रमुख परियोजनाओं/पहलों का विवरण संलग्नक-III में दिया गया है।
महाराष्ट्र में आयुर्वेद दिवस के उत्सव के संबंध में की जाने वाली गतिविधियों का क्रियान्वयन राज्य आयुष प्रकोष्ठ के माध्यम से किया जाता है। ये गतिविधियाँ आयुष निदेशालय की निगरानी में आने वाले सभी आयुष महाविद्यालयों तथा महाराष्ट्र भर के जिला अस्पतालों, महिला अस्पतालों, उप-जिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्थित, सह-स्थापित आयुष स्कंध के माध्यम से संचालित की जाती हैं।
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संलग्न – I
आयुर्स्वास्थ्य योजना के उत्कृष्टता केंद्र घटक के अंतर्गत आयुष मंत्रालय द्वारा समर्थित परियोजनाओं का विवरण
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क्र.सं.
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संगठन का नाम
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राज्य
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परियोजना का नाम
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1
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टाटा स्मारक केंद्र (टीएमसी), मुंबई
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महाराष्ट्र
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कैंसर उपचार हेतु आयुष औषधियों की खोज एवं विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र
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2
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केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ
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उत्तर प्रदेश
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केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) में आयुर्वेद के मौलिक एवं अनुवादात्मक अनुसंधान के लिए उत्कृष्टता केंद्र।
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3
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली
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दिल्ली
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आयुर्वेद एवं पद्धति चिकित्सा पर कार्यात्मक-आधारित उत्कृष्टता केंद्र
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4
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली
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दिल्ली
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उन्नत तकनीकी समाधानों, स्टार्टअप सहयोग एवं रसौषधियों के लिए नेट-जीरो सतत् समाधान हेतु सतत् आयुष उत्कृष्टता केंद्र
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5
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भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु
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कर्नाटक
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मधुमेह एवं चयापचय संबंधी विकारों के लिए उत्कृष्टता केंद्र
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6
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एकीकृत चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (सीआईएमआर), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस), नई दिल्ली
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दिल्ली
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योग एवं आयुर्वेद के लिए उत्कृष्टता केंद्र
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7
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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (एनआईएमएएनएचएस), बेंगलुरु
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कर्नाटक
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आयुष अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र
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8
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यकृत एवं पित्त संबंधी विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस)
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दिल्ली
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स्वस्थ एवं रोगग्रस्त यकृत पर भारतीय खाद्य पदार्थों एवं आयुर्वेदिक औषधियों के प्रभाव
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9
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), जोधपुर
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राजस्थान
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एकीकृत सटीक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए आयुर्टेक में उत्कृष्टता केंद्र
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संलग्नक II
आयुष मंत्रालय द्वारा अपनी अनुसंधान परिषदों एवं राष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से की गई पहलों का विवरण
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क्र. सं.
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अनुसंधान परिषद्/ राष्ट्रीय संस्थान
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पहल का विवरण
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1
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केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस)
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केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) ने आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करने के लाभों एवं व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए विभिन्न अनुसंधान अध्ययन किए हैं। इनमें तृतीयक देखभाल अस्पताल (सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली) में ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटने) के प्रबंधन हेतु आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ आयुर्वेद के एकीकरण की व्यवहार्यता का अध्ययन, हिमाचल प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में राष्ट्रीय प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में आयुर्वेद को शामिल करने की व्यवहार्यता का अध्ययन, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) में आयुष प्रणालियों के एकीकरण पर अध्ययन तथा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (आरसीएच) सेवाओं के अंतर्गत प्रसव-पूर्व देखभाल (गर्भिणी परिचर्या) के लिए आयुर्वेदिक उपचार की प्रभावशीलता एवं व्यवहार्यता पर बहु-केंद्रित परिचालन अध्ययन शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) और आयुष मंत्रालय के बीच समन्वित स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु संपन्न समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत गैर-गर्भवती महिलाओं में लौह-अल्पता जनित एनीमिया पर समुदाय-आधारित नैदानिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) तथा आयुष मंत्रालय ने संयुक्त रूप से केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) के माध्यम से चयनित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स दिल्ली, एम्स जोधपुर, एम्स नागपुर एवं एम्स ऋषिकेश) में आयुष–आईसीएमआर समन्वित स्वास्थ्य अनुसंधान उन्नत केंद्र (एआई-एसीआईएचआर) की स्थापना के लिए पहल की है। इन केंद्रों का उद्देश्य प्राथमिकता वाले रोग क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करना तथा समन्वित स्वास्थ्य देखभाल के सुदृढ़ मॉडल तैयार करना है। इन केंद्रों में ऑस्टियोआर्थराइटिस, हल्के संज्ञानात्मक विकार, दीर्घकालिक अवरोधक फेफड़ा रोग (सीओपीडी) एवं न्यूमोकोनियोसिस में फुफ्फुसीय पुनर्वास, असामान्य योनि स्राव, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, गर्भकालीन मधुमेह, चयापचय संबंधी विकार-जनित स्टियाटोटिक यकृत रोग (एमएएसएलडी), अग्न्याशय-पित्त संबंधी रोग, क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस, गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी), मुख के पूर्व-कैंसरकारी घाव, सिर एवं गर्दन का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा तथा सार्कोपीनिया पर अनुसंधान अध्ययन किए जा रहे हैं।
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2
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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए)
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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली में 200 बिस्तरों वाला तृतीयक देखभाल अस्पताल है, जिसमें कार्यात्मक आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। यह संस्थान एक मॉडल समन्वित स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के रूप में कार्य करता है, जहाँ विभिन्न नैदानिक एवं अर्ध-नैदानिक विभागों में आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के सहयोग से आयुर्वेद सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। संस्थान ने एकीकृत ऑन्कोलॉजी, छाती रोग, चयापचय संबंधी रोग, जीवनशैली संबंधी रोग, रूमेटोलॉजी तथा त्वचा रोग चिकित्सालय स्थापित किए हैं।
समन्वित स्वास्थ्य सेवाएँ नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के समन्वित चिकित्सा सेवा इकाई, समन्वित चिकित्सा सेवा इकाई एम्स झज्जर और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान–एम्स, झज्जर में समन्वित ऑन्कोलॉजी केंद्र में स्थापित सैटेलाइट क्लिनिकल सेवा इकाइयों के माध्यम से भी प्रदान की जा रही हैं।
संस्थान में आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार एवं अनुसंधान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग केंद्र भी स्थापित किया गया है। वर्तमान में संस्थान लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, एफआईजेड जर्मनी, रोसेनबर्ग यूरोपियन एकेडमी ऑफ आयुर्वेद, सीएबीएसआईएन एवं फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ रियो डी जनेरियो (यूएफआरजे), ब्राजील तथा यूनिवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क और कनाडा इंडिया फाउंडेशन, कनाडा के सहयोग से समन्वित अनुसंधान कार्य कर रहा है।
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3
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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए)
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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) ने आयुर्वेद के अभ्यास एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए छह अंतर्विषयक विभाग स्थापित किए हैं, जिनमें आयुर्वेदिक एवं आधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता को शामिल किया गया है। इन विभागों का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सकों और समकालीन वैज्ञानिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा ऐसे नवाचारात्मक दृष्टिकोणों को प्रोत्साहित करना है, जो प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ समन्वित करते हैं। एनआईए ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) के सहयोग से द्वैध पीएच.डी. डिग्री कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। यह पहल ऐसे अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देती है, जो सख्त वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करते हुए पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर बल देते हैं तथा साथ ही प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) के मूलभूत सिद्धांतों का सम्मान एवं संरक्षण सुनिश्चित करते हैं।
इसके अतिरिक्त, संस्थान सहयोगात्मक नैदानिक सेवाओं एवं साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकृत करने को बढ़ावा देता है। यह केंद्रीय अस्पताल, उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर), जयपुर में एक समन्वित आयुर्वेद ओपीडी संचालित करता है। एनआईए, टाटा स्मारक केंद्र, मुंबई के सहयोग से नॉन-स्मॉल सेल लंग कार्सिनोमा (एनएससीएलसी) तथा सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय (एसएमएस), जयपुर के सहयोग से नॉन-प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (एनपीडीआर) एवं आंख के अगले हिस्से आइरिस तथा सिलियरी बॉडी (एंटीरियर यूवाइटिस) पर संयुक्त अनुसंधान कार्य भी कर रहा है।
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संलग्नक-III
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में आयोजित 10वें आयुर्वेद दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान उद्घाटन/शुभारंभ की गई परियोजनाओं/पहलों का विवरण
1. सुविधाओं का उद्घाटन
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में एकीकृत ऑन्कोलॉजी इकाई का उद्घाटन।
- ii. अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में केंद्रीय स्टेराइल आपूर्ति विभाग (सीएसएसडी) इकाई का उद्घाटन।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में रक्त भंडारण इकाई का उद्घाटन।
- iv. अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में अस्पताल लिनेन प्रसंस्करण एवं देखभाल इकाई का उद्घाटन।
2. लोकार्पण
- पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय (सीजीपीडीटीएम) द्वारा आयुष संबंधी उपचारों के परीक्षण हेतु दिशानिर्देश।
- ii. देशव्यापी अभियान – “देश का स्वास्थ्य परीक्षण” का शुभारंभ, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करना है।
- वेबसाइट – “आयुर्वेद को रूपांतरित करने वाले प्रशंसनीय व्यक्तित्व (एपीटीए)” का शुभारंभ, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) द्वारा आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों के सम्मान में तैयार किया गया है।
- iv. वेब-आधारित पोर्टल – “आयुष पदार्थों के बहुआयामी मानदंड के लिए डिजिटाइज्ड रिट्रीवल एप्लीकेशन (द्रव्य)” का शुभारंभ, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) द्वारा विकसित किया गया है।
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पीके/केसी/जेके/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2292621)
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