आयुष
पारंपरिक देसी पद्धति के संबंध में अनुसंधान
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2026 3:36PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) अपने दो कार्यक्रमों, अर्थात् जनजातीय स्वास्थ्य देखभाल अनुसंधान कार्यक्रम (टीएचसीआरपी) और मेडिको एथनो-बॉटैनिकल सर्वेक्षण (एमईबीएस) द्वारा पारंपरिक अध्ययनों और हर्बल फॉर्मूलेशन को एकत्र करने और दस्तावेजीकरण करने में सक्रिय रूप से शामिल है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आयुर्वेद स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करना है; इसके अलावा, स्वास्थ्य संवर्धन और रोग निवारण के लिए दिनचर्या, ऋतुचर्या और पथ्य-अपथ्य जैसी आयुर्वेद आधारित जीवनशैली अध्ययनों पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। इस कार्यक्रम में आईईसी सामग्री का वितरण और स्थानीय उपचार परंपराओं(एलएचटी)/लोक चिकित्सा पद्धतियों का दस्तावेजीकरण भी शामिल है। स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं (एलएचटी), एथनो-मेडिकल अध्ययन (ईएमपी), और लोक चिकित्सा दावों का विशिष्टता/नवीनता के लिए परिषद द्वारा प्रलेखीकरण और वैधीकरण किया जाता है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली उचित वैज्ञानिक सत्यापन, प्रमाणीकरण और नैतिक अनुमोदन के बाद एथनोमेडिकल दावों, जनजातीय और लोककथा-आधारित पारंपरिक उपचार पद्धतियों और अन्य समुदाय-आधारित स्वास्थ्य देखभाल अध्ययनों पर नैदानिक और ट्रांसलेशन रिसर्च प्रयोगशाला से रोगी तक अनुसंधान करता है। इस तरह के अनुसंधान पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल अध्ययनों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और चिकित्सीय क्षमता के बारे में साक्ष्य सृजन करने के लिए स्थापित वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करके आयोजित किए जाते हैं।
एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आयुष मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के बीच 11 मई, 2023 को एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर के बीच सहयोग और तालमेल के क्षेत्रों का पता लगाने के लिए आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर के बीच स्वास्थ्य अनुसंधान पर सहयोग और सहभागिता का संवर्धन और विकास करना है तथा आयुष और आईसीएमआर के वैज्ञानिकों की अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ बनाना है।
केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) विभिन्न संस्थानों जैसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), आयुष मंत्रालय के तहत अन्य अनुसंधान परिषदों, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), और अन्य चिकित्सा, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान पर कार्य कर रही है। आयुष-आईसीएमआर के संयुक्त सहयोग के अंतर्गत, "प्रजनन आयु वर्ग की गैर-गर्भवती महिलाओं में आयरन की मध्यम कमी से होने वाले एनीमिया के उपचार में आयरन फोलिक एसिड की तुलना में पुनर्नवादी मंडुर की अकेले और द्राक्षावलेह के साथ संयोजन में प्रभावकारिता और सुरक्षा: एक समुदाय-आधारित तीन-भुज बहुकेंद्रित यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण" नामक अध्ययन पूरा हो चुका है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर और अन्य आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के बीच सहयोग के माध्यम से विभिन्न बीमारियों की स्थितियों के लिए एकीकृत उपचार प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य सृजित करना है।
पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी संस्थान (एनईआईएएच), शिलांग ने रोगियों के लाभ के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए अपने अस्पताल में फिजियोथेरेपी, दंत चिकित्सा और आहार आदि में आधुनिक अध्ययनों को एकीकृत किया है। इसके अलावा, रोगियों के आयुर्वेदिक निदान के पूरक के रूप में प्रयोगशाला और रेडियोलॉजी प्रक्रियाएं नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप कार्यक्रम के हिस्से के रूप में एनईआईएएच, मेघालय सरकार के अधीन विभिन्न अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इंटर्न भेजकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ सहयोग करता है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में 200 बिस्तरों वाला विशिष्ट देखभाल अस्पताल है जिसमें आईसीयू कार्यशील है। यह अस्पताल आयुर्वेद के लिए एक मॉडल एकीकृत चिकित्सा अस्पताल के रूप में कार्य करता है, और इसमें विभिन्न नैदानिक, पैरा नैदानिक विभागों में आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी हैं। इसके अलावा, एआईआईए ने एम्स, झज्जर में कार्यशील एकीकृत कैंसर क्लिनिक और अनुसंधान केंद्र और सफदरजंग अस्पताल, वीएम मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में एकीकृत चिकित्सा केंद्र की स्थापना की है।
केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत, स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं एलोपैथिक और आयुष दोनों चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। सीजीएचएस लाभार्थियों के पास किसी भी पद्धति के तहत उपचार का लाभ उठाने का विकल्प है। उपचार का चुनाव लाभार्थी की नैदानिक स्थिति, चिकित्सा आवश्यकताओं और इलाज करने वाले चिकित्सक के पेशेवर मूल्यांकन पर निर्भर करता है।
***
पीके/केसी/जेके/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2292609)
आगंतुक पटल : 138