आयुष
यूनानी चिकित्सा पद्धति और शिक्षा को बढ़ावा देना
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2026 3:36PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोक सभा में अक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि आयुष मंत्रालय का उद्देश्य अपनी सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) योजना के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों एवं प्रचार-प्रसार गतिविधियों के द्वारा यूनानी सहित सभी आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना है। मंत्रालय प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में जन-जागरूकता बढ़ाने और यूनानी चिकित्सा पद्धति को अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यूनानी दिवस का आयोजन करता है। आयुष मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) देशभर में 21 नैदानिक संस्थानों/इकाइयों/केंद्रों का संचालन करती है। ये संस्थान अपनी विभिन्न ओपीडी के माध्यम से व्यापक स्वास्थ्य देख-रेख सेवाएं प्रदान करते हैं। नैदानिक देख-रेख सेवाओं के अतिरिक्त, ये संस्थान जीवनशैली संबंधी एवं अन्य रोगों की रोकथाम तथा प्रबंधन के संबंध में जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक जनस्वास्थ्य आउटरीच कार्यक्रम भी संचालित करते हैं। जागरूकता गतिविधियाँ क्लिनिकल मोबाइल अनुसंधान कार्यक्रम, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से संचालित की जाती हैं। इन पहलों से विगत पाँच वर्षों के दौरान लगभग 47 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं। परिषद ने पिछले पाँच वर्षों में 03 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 205 प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा 322 संगोष्ठियों, सम्मेलनों, वेबिनारों एवं व्याख्यानों का आयोजन भी किया है और 129 आरोग्य/स्वास्थ्य मेलों एवं प्रदर्शिनियों में सहभागिता की है, जिससे क्षमता निर्माण, अनुसंधान के प्रसार तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अधीन राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण के 79वें दौर (जुलाई, 2022–जून, 2023) के अंतर्गत आयुष पद्धतियों पर एक व्यापक अखिल भारतीय सर्वेक्षण आयोजित किया गया। इस सर्वेक्षण में यूनानी सहित आयुष पद्धतियों के प्रति जन-जागरूकता, उपचार/रोकथाम हेतु उपयोग के स्वरूप, जेब से किए जाने वाले व्यय तथा पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों के प्रति लोगों की प्राथमिकताओं का आकलन करने के लिए 1,81,298 परिवारों को शामिल किया गया, जिनमें 1,04,195 ग्रामीण तथा 77,103 शहरी परिवार शामिल थे। सर्वेक्षण में देखा गया कि, यूनानी सहित आयुष पद्धतियों के प्रति समग्र जागरूकता ग्रामीण भारत में 94.8 प्रतिशत तथा शहरी भारत में 96 प्रतिशत थी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 46.3 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों के 52.9 प्रतिशत निवासियों ने पिछले 365 दिनों के दौरान उपचार अथवा रोग-निवारण के उद्देश्य से आयुष सेवाओं का उपयोग किए जाने की सूचना दी।
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) द्वारा यूनानी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण, शिक्षण प्रदाय तथा इसे प्रोत्साहित करने के लिए किए गए उपायों का विवरण संलग्नक–I में दिया गया है।
एनसीआईएसएम द्वारा वर्तमान में मान्यता प्राप्त यूनानी चिकित्सा के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों, उनकी वार्षिक प्रवेश क्षमता तथा प्रत्येक संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली उपाधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण संलग्नक–II में दिया गया है
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संलग्नक-I
यूनानी चिकित्सा पद्धति में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु एनसीआईएसएम द्वारा उठाए गए कदम
एनसीआईएसएम द्वारा यूनानी चिकित्सा पद्धति में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु निम्नलिखित कदम उठाए गए:
विनियम:
एनसीआईएसएम द्वारा यूनानी चिकित्सा पद्धति में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर निम्नलिखित विनियम तैयार, प्रकाशित एवं कार्यान्वित किए गए हैं।
- भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (स्नातक यूनानी शिक्षा के न्यूनतम मानक), विनियम 2022।
- भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (अर्हताओं की मान्यता) विनियम, 2023 (एएसयूएस के लिए सामान्य)
- भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय परीक्षाएँ) विनियम, 2023
- भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (नैतिकता और पंजीकरण) विनियम, 2023
- भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (स्नातक यूनानी महाविद्यालयों और संबद्ध शिक्षण अस्पतालों हेतु न्यूनतम आवश्यक मानक, मूल्यांकन एवं श्रेणी निर्धारण) विनियम, 2023
- भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (स्नातकोत्तर संस्थानों के लिए न्यूनतम आवश्यक मानक, मूल्यांकन एवं श्रेणी निर्धारण तथा स्नातकोत्तर यूनानी शिक्षा के न्यूनतम मानक) विनियम, 2024
पाठ्यक्रम
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, चिकित्सा शिक्षा में वैश्विक मानकों और मेधावी तथा कुशल यूनानी स्नातकों को तैयार करने के उद्देश्य से, एनसीआईएसएम द्वारा चिकित्सा शिक्षा नीति, शिक्षा के आवश्यक मानकों, शैक्षिक प्रशासन, शिक्षण/प्रशिक्षण पद्धतियों, मूल्यांकन प्रक्रिया, शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उपयोग और दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड द्वारा निम्नलिखित पाठ्यक्रम एवं पाठ्यक्रम तैयार करना, प्रकाशन तथा कार्यान्वयन किया गया है।
- प्रथम व्यावसायिक बीयूएमएस के लिए दक्षता-आधारित पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम।
- द्वितीय व्यावसायिक बीयूएमएस के लिए दक्षता-आधारित पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम।
- तृतीय व्यावसायिक बीयूएस के लिए दक्षता-आधारित गतिशील पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम।
- यूनानी स्नातकोत्तर कार्यक्रम में जैव-सांख्यिकी विषय हेतु दक्षता-आधारित पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम।
- यूनानी स्नातकोत्तर कार्यक्रम के लिए अनुसंधान पद्धति विषय हेतु दक्षता-आधारित पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम।
- 15 स्नातकोत्तर यूनानी कार्यक्रमों के द्वितीय तथा तृतीय से षष्ठम सेमेस्टर हेतु दक्षता-आधारित गतिशील पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम।
स्नातक स्तर पर पाठ्यचर्या में संशोधन :
- व्यावसायिक कौशल एवं व्यक्तिगत गुण, व्यवहार और सामाजिक कौशल को बढ़ावा देने के लिए व्याख्यान एवं गैर-व्याख्यान घंटों के अनुपात को परिवर्तित कर 1:2 कर दिया गया है।
- वैकल्पिक विषयों की शुरूआत छात्रों को विभिन्न संबद्ध विषयों से परिचित होने, अभिमुखीकरण प्राप्त करने एवं अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करने, अंतर्विषयक दृष्टिकोण विकसित करने तथा स्व-निर्देशित/निर्देशित अधिगम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।
- नए प्रवेशित छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं शुरू होने से पहले परिवर्ती पाठ्यचर्या के साथ अभिविन्यास कार्यक्रम शुरू किया गया है।
- दक्षता-आधारित गतिशील पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप में परिभाषित स्नातक विशेषताओं, कार्यक्रम परिणामों, पाठ्यक्रम परिणामों, कठिनाई स्तर, वैश्विक मानकों के अनुरूप उन्नत शिक्षण-प्रशिक्षण विधियों, छात्रों के निरंतर मूल्यांकन के लिए रचनात्मक मूल्यांकन विधियों, संकलनात्मक मूल्यांकन विधियों, प्रश्न पत्र का ब्लू प्रिंट, लम्वत/समानांतर (वर्टिकल/हॉरिजॉन्टल) एकीकरण आदि के साथ पेश किया गया है।
- प्रारंभिक नैदानिक अनुभव: अधिक नैदानिक प्रशिक्षण अनुभव प्रदान करने और आत्मविश्वास बनाने के लिए प्रथम पेशेवर सत्र के साथ शुरू होता है।
- पृथक समय पुस्तकालय के प्रभावी उपयोग के लिए सभी बैचों के नियमित समय-सारणी में पुस्तकालय, खेल और मनोरंजन के लिए सह/पाठ्चर्या संबंधी कार्यक्रमों में प्रतिभा व्यक्त करना और शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए है।
- युनानी चिकित्सा पद्धति में आधुनिक प्रगति, वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के पूरक के लिए कार्यप्रणालियाँ प्रस्तुत की गई हैं।
- विश्वविद्यालय परीक्षा (योगात्मक मूल्यांकन) के अलावा, रचनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें नौ आवधिक परीक्षण और दो अवधि परीक्षण शामिल हैं।
- नैदानिक कौशल/अनुकरणीय प्रयोगशाला: नैदानिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए स्नातक में नैदानिक कौशल/अनुकरणीय प्रयोगशाला आरंभ की गई।
स्नातकोत्तर स्तर पर पाठ्यक्रम सुधार:
- सेमेस्टर प्रणाली शुरू की गई है और सेमेस्टर विशिष्ट विषयों/पत्रों को बनाए रखा गया है।
- स्नातकोत्तर में क्रेडिट फ्रेमवर्क लागू किया गया है। प्रत्येक क्रेडिट में संबंधित विशेषता के अत्यधिक आत्मविश्वास और सक्षम विशेषज्ञ को तैयार करने के लिए 1:2:3 के अनुपात में व्याख्यान, व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभवात्मक शिक्षण होगा।
- यूनिट-वार मूल्यांकन सहित फॉर्मेटिव मूल्यांकन, मॉड्यूलर मूल्यांकन को सेमेस्टर ग्रेड पॉइंट ऐवरेज (एसजीपीए) की गणना करने और विश्वविद्यालय के संकलनात्मक परीक्षा में बैठने की पात्रता का आकलन करने के लिए पेश किया गया था।
- डोमेन विशिष्ट और क्षमता बढ़ाने वाली श्रेणियों के तहत मूल विषयों के साथ-साथ स्नातकोत्तर कार्यक्रम के लिए वैकल्पिक पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
- इम्यूनोलॉजी और हिस्टोपैथोलॉजी से संबंधित परीक्षणों में उन्नत अध्ययन करने के लिए स्नातकोत्तर संस्थानों में आणविक जीव विज्ञान प्रयोगशाला शुरू की गई है।
- विशेष विशिष्ट कार्यक्रम परिणामों और बढ़ावा दिए गए बहु-अनुशासनात्मक अनुसंधान के साथ प्रत्येक स्नातकोत्तर कार्यक्रम के लिए अनुसंधान हेतु महत्वपूर्ण क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं।
- स्नातकोत्तर संस्थानों की अनुसंधान गतिविधियों को विनियमित और समन्वित करने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य और ट्रांसलेशनल शोध विभाग का संचालन किया गया है।
शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि हेतु एनसीआईएसएम द्वारा की गई अन्य पहलें:
- देशभर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम अवधि हेतु शैक्षणिक कैलेंडर लागू किया गया है।
- शिक्षा प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अद्यतन ज्ञान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक शिक्षक को प्रत्येक माह के प्रथम शुक्रवार को शिक्षण प्रौद्योगिकी से संबंधित एक लेख तथा तृतीय शुक्रवार को अनुसंधान से संबंधित एक लेख ईमेल के माध्यम से प्रेषित किया जाता है।
प्रौद्योगिकी का उपयोग:
- क्यूआर कोड युक्त पाठ्यक्रम: एनसीआईएसएम की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।
- एलएमएस (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से ऐच्छिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए गए हैं। आयुष ग्रिड के अंतर्गत एनसीआईएसएम के प्लेटफॉर्म/पोर्टल निम्नलिखित हैं:-
- आईएसएम संस्थानों के प्राचार्यों के लिए शैक्षिक योजना एवं प्रशासनिक कार्यशालाओं हेतु पोर्टल।
- आईएसएम संस्थानों के अनुसंधान एवं नवाचार प्रकोष्ठ के समन्वयकों हेतु उद्यमिता विकास एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम पर कार्यशालाओं हेतु पोर्टल।
- आईएसएम के स्नातकोत्तर संस्थानों के स्नातकोत्तर पर्यवेक्षकों के लिए वैज्ञानिक लेखन, अनुसंधान सत्यनिष्ठा एवं प्रकाशन नैतिकता विषयक अभिमुखीकरण कार्यशालाओं हेतु पोर्टल।
- विकसित मूल्यांकन मापदंड के अनुसार पाठ्यपुस्तकों के गुणवत्ता मूल्यांकन हेतु पोर्टल।
- आईएसएम के पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम के निर्माण हेतु सॉफ्टवेयर।
- शैक्षिक जीवनावधि प्रबंधन प्रणाली, अधिगम प्रबंधन प्रणाली तथा सहयोगात्मक प्रणाली, जिन्हें आयुष ग्रिड के साथ एकीकृत किया गया है।
- आईएसएम संस्थानों में आजादी का अमृत महोत्सव संबंधी गतिविधियों हेतु पोर्टल।
- संस्थानों एवं काउंसलिंग प्राधिकरणों द्वारा प्रवेशित विद्यार्थियों के ऑनलाइन डेटा प्रस्तुत करने हेतु पोर्टल।
- ऐच्छिक पाठ्यक्रमों हेतु पोर्टल।
- उपाधि मान्यता प्रणाली हेतु पोर्टल।
- आईएसएम संस्थानों के शैक्षणिक निष्पादन के मूल्यांकन हेतु पोर्टल विकसित किया गया है।
परीक्षाएं:
- एनसीआईएसएम ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रत्येक विषय में शिक्षण कार्य को अपनाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू की है।
- एनसीआईएसएम ने यूनानी प्री-तीब्ब कार्यक्रम में प्रवेश हेतु ‘एनसीआईएसएम प्री-तीब्ब परीक्षा’, काउंसलिंग तथा सीट आवंटन की प्रक्रिया संचालित की है।
- यूनानी बीयूएमएस के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु एनटीए द्वारा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) आयोजित की गई है।
- अखिल भारतीय आयुष स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा (एआईएपीजीईटी) का आयोजन एनसीआईएसएम द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से किया गया है।
अनुसंधान को बढ़ावा देना
यूनानी शिक्षण संस्थानों/महाविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों के मध्य अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए एनसीआईएसएम द्वारा निम्नलिखित पहलें की गई हैं:
- एनसीआईएसएम द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रिकाओं में अपने शोध-पत्रों के प्रकाशनहेतु प्रकाशन अनुदान प्रदान किया जाता है।
- स्टूडेंटशिप कार्यक्रम – केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) के सहयोग से एनसीआईएसएम ने स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में अनुसंधान अभिरुचि विकसित करने के उद्देश्य से यूनानी अनुसंधान हेतु स्टूडेंटशिप कार्यक्रम (एसपीयूआर) का कार्यान्वयन किया है।
संलग्नक-II
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स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले यूनानी महाविद्यालय
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क्रम सं.
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राज्य
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कॉलेज का नाम
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प्रदान की गई डिग्री
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स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश क्षमता
|
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश क्षमता
|
|
|
1
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बिहार
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शासकीय तिब्बिया कॉलेज और अस्पताल
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यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
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125
|
31
|
|
|
2
|
कर्नाटक
|
शासकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
75
|
10
|
|
|
3
|
कर्नाटक
|
लुकमान यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल
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यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
7
|
|
|
4
|
मध्य प्रदेश
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हकीम सैयद ज़ियाउल हसन, शासकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
75
|
22
|
|
|
5
|
महाराष्ट्र
|
जेडवीएम यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल
|
यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
17
|
|
|
6
|
नई दिल्ली
|
आयुर्वेद और यूनानी तिब्बिया कॉलेज
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
75
|
13
|
|
|
7
|
नई दिल्ली
|
यूनानी चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान स्कूल, जामिया हमदर्द (डीम्ड विश्वविद्यालय)
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
9
|
|
|
8
|
तमिलनाडु
|
शासकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज, अरिग्नार अन्ना शासकीय हॉस्पिटल ऑफ इंडियन मेडिसिन कैंपस
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
75
|
11
|
|
|
9
|
तेलंगाना
|
निज़ामिया सरकार तिब्बिया कॉलेज
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
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94
|
45
|
|
|
10
|
उत्तर प्रदेश
|
राजकीय तकमील- उत -तिब कॉलेज और अस्पताल
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यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
75
|
35
|
|
|
11
|
उत्तर प्रदेश
|
राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज और हकीम अहमद हुसैन रिपब्लिक डे मेमोरियल हॉस्पिटल
|
यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
75
|
37
|
|
|
12
|
उत्तर प्रदेश
|
जामिया तिब्बिया देवबंद
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
4
|
|
|
13
|
उत्तर प्रदेश
|
देवबंद यूनानी मेडिकल कॉलेज,
अस्पताल अनुसंधान केंद्र
|
यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
8
|
|
|
14
|
उत्तर प्रदेश
|
अल्लामा इकबाल यूनानी मेडिकल कॉलेज और एसीएन अस्पताल
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
10
|
|
|
15
|
उत्तर प्रदेश
|
अलीगढ़ यूनानी मेडिकल कॉलेज और एसीएन अस्पताल
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
8
|
|
|
16
|
उत्तर प्रदेश
|
अजमल खान तिब्बिया कॉलेज
|
यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
60
|
42
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
केवल स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले यूनानी महाविद्यालय
|
|
|
क्रम सं.
|
राज्य
|
कॉलेज का नाम
|
प्रदान की गई डिग्री
|
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश क्षमता
|
|
|
1
|
जम्मू-कश्मीर
|
क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आरआरआईयूएम), नसीम बाग परिसर
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
18
|
|
|
2
|
कर्नाटक
|
राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान
|
यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
71
|
|
|
3
|
तेलंगाना
|
केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (सीआरआईयूएम), (त्वचा विकारों के लिए यूनानी चिकित्सा का राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान)
|
यूनानी माहिरे तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
18
|
|
|
4
|
उत्तर प्रदेश
|
राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान
|
यूनानी माहिर जराहत (मास्टर ऑफ सर्जरी) और यूनानी माहिर तिब (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन)
|
49
|
|
| |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
***
पीके/केसी/जेके/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2292608)
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