जल शक्ति मंत्रालय
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प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत की गई प्रगति

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 4:56PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) जिसे वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही एक अम्ब्रेला योजना है। पीएमकेएसवाई के दो प्रमुख घटक अर्थात त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) और हर खेत को पानी (एचकेकेपी) को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, एचकेकेपी के तीन उप-घटक अर्थात् (i) कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (सीएडी एंड डब्ल्यूएम); (ii) सतही लघु सिंचाई (एसएमआई); और (iii) जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार (आरआरआर) जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे हैं। एचकेकेपी के सीएडी और डब्ल्यूएम उप-घटक को एआईबीपी के साथ समान रूप से कार्यान्वयन हेतु शुरू किया गया है।

पीएमकेएसवाई के इन घटकों के तहत सिंचाई कवरेज में हुई वृद्धि का विवरण नीचे दिया गया है:

क्रम संख्या

 

पीएमकेएसवाई का

घटक

अप्रैल, 2016 से पीएमकेएसवाई के अंतर्गत की गई प्रगति (लाख हेक्टेयर में)

पिछले तीन वर्षों अर्थात वर्ष 2023-24 से 2025-26 में की गई प्रगति (लाख हेक्टेयर में)

सृजित सिंचाई क्षमता

  1.  

एआईबीपी

30.66

4.09

  1.  

एचकेकेपी-एसएमआई

4.29

0.96

  1.  

एचकेकेपी-आरआरआर

1.27

0.41

विकसित कमान क्षेत्र

  1.  

एचकेकेपी-सीएडी और डब्ल्यूएम

23.42

 

3.76

 

अप्रैल 2016 से एआईबीपी के अंतर्गत तेलंगाना में 204.74 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है, जिसमें से 15.18 हजार हेक्टेयर की क्षमता पिछले तीन वर्षों में सृजित की गई है। इसके अतिरिक्त, एचकेकेपी-आरआरआर के अंतर्गत तेलंगाना में 25.55 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का पुनरूद्धार किया गया है, जिसमें से 9.24 हजार हेक्टेयर का पिछले तीन वर्षों में पुनरूद्धार किया गया है। पीएमकेएसवाई के एआईबीपी और एचकेकेपी घटकों के अंतर्गत दाहोद लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र की कोई परियोजना शुरू नहीं की गई है।

मई, 2026 तक पीएमकेएसवाई के अंतर्गत, तेलंगाना और भरतपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिलों सहित अनुमोदित और पूरी की गई सिंचाई परियोजनाओं का राज्य-वार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

पीएमकेएसवाई के विभिन्न घटकों के अंतर्गत प्रदान की गई केन्द्रीय सहायता का विवरण निम्नानुसार है।

क्रम संख्या

 

पीएमकेएसवाई का घटक

अप्रैल, 2016 से पीएमकेएसवाई के अंतर्गत प्रदान की गई केंद्रीय सहायता (करोड़ रुपए)

  1.  

एआईबीपी

21,823.46

  1.  

एचकेकेपी-एसएमआई

5,917.82

  1.  

एचकेकेपी-आरआरआर

781.76

  1.  

एचकेकेपी-सीएडी और डब्ल्यूएम

3,386.08

 

 

एआईबीपी और एचकेकेपी के अतिरिक्त, पीएमकेएसवाई के वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) का कार्यान्वयन भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा, सूक्ष्म सिंचाई विकास के लिए समर्पित पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी) योजना कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीओए एंड एफडब्ल्यू) द्वारा पहले पीएमकेएसवाई के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही थी और अब प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है। वर्ष 2015-16 से पीडीएमसी के अंतर्गत 114.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत लाया गया है। इसके अतिरिक्त, पीएमकेवाई-डब्ल्यूडीसी के अंतर्गत 9,434 वाटरशेड विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

पीडीएमसी के अंतर्गत दाहोद जिले के 14,071 हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाया गया है। इसके अलावा, पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी के अंतर्गत दाहोद जिले में 15,785 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने वाली दो वाटरशेड विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

इसके अतिरिक्त, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा 77,106 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने वाली एक पायलट योजना के रूप में कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) के आधुनिकीकरण का कार्य शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य भूमिगत दबावयुक्त पाइप सिंचाई से किसानों द्वारा स्थापित स्त्रोत से फार्म गेट तक सूक्ष्म सिंचाई के लिए मजबूत बैकएंड इन्फ्रास्ट्रेक्चर से युक्त सिंचाई जल आपूर्ति नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना है।

पीएमकेएसवाई ने सिंचाई कवरेज के विस्तार, लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ कर, सूक्ष्म-सिंचाई को बढ़ावा देकर, खेत पर जल प्रबंधन में सुधार कर और वॉटरशेड विकास गतिविधियों को शुरू करके सिंचाई दक्षता, फसल उत्पादकता और जल संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। इन कार्यकलापों से जल-उपयोग दक्षता में वृद्धि, आवागमन और उपयोग के दौरान होने वाले नुकसान में कमी, सिंचाई के जल की उपलब्धता में सुधार, कृषि उत्पादकता और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा मिला है।

पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत शामिल करने के लिए परियोजनाओं को चुनते समय, सूखा-प्रवण और जल की कमी वाले क्षेत्रों को लाभान्वित करने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2015-16 के दौरान पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत सूखा-प्रवण क्षेत्रों को लाभान्वित करने वाली 59 परियोजनाओं को शामिल किया गया था, जिनमें से 04 (चार) परियोजनाए बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसी परियोजनओं के तहत, अप्रैल 2016 से 16.65 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता सृजित की गई है, जिसमें से बुंदेलखंड क्षेत्र में 0.97 लाख हेक्टेयर क्षमता का सृजन किया गया है।

बुंदेलखंड क्षेत्र सहित सूखाप्रवण और जल की कमी वाले क्षेत्रों में सिंचाई अवसंरचना को मजबूत करने के लिए, पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के तहत परियोजनाओं के चयन के मानदंड और केंद्रीय निधि अनुपात के लिए वर्ष 2021-22 के दौरान विशेष प्रावधान किए गए। यदि किसी परियोजना का 50% से अधिक कमान सूखाप्रवण क्षेत्र में आता है तो उनको  अग्रिम चरण के मानदंड में 50% की छूट दी गई है और परियोजना को निर्माण की शुरुआत से ही शामिल किया जा सकता है, जिसमें सूखाप्रवण क्षेत्र में आने वाले कमान क्षेत्र को 60 (केंद्र): 40 (राज्य) का बढ़ा हुआ निधि अनुपात प्राप्त होगा।

वर्ष 2021-22 के बाद पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत सूखा-प्रवण क्षेत्रों को लाभान्वित करने वाली 5 (पांच) और परियोजनाओं को शामिल किया गया है जिनकी सिंचाई की अधिकतम क्षमता 2.44 लाख हेक्टेयर होगी। इन परियोजनाओं के तहत 0.61 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता सृजित की जा चुकी है।

***

अनुलग्नक

पीएमकेएसवाई के अंतर्गत सिंचाई परियोजनाओं की स्थिति

 

क्र.सं.

राज्य

सीएडी  और डब्ल्यूएम के साथ एआईबीपी का समान रूप से कार्यान्वयन

एसएमआई और आरआरआर

 

परियोजनाओं की कुल संख्या

पूर्ण हुई परियोजनाओं की संख्या

परियोजनाओं की कुल संख्या

पूर्ण हुई परियोजनाओं की संख्या

 

1

आंध्र प्रदेश

8

1

235

36

 

2

असम

4

2

1119

652

 

3

बिहार

3

1

150

120

 

4

छत्तीसगढ

3

2

0

0

 

5

गोवा

1

1

0

0

 

6

गुजरात

2

0

33

33

 

 

 

 

 

 

 

7

जम्मू एवं कश्मीर

3

3

398

142

8

झारखंड

2

0

0

0

9

कर्नाटक

5

4

138

115

10

केरल

2

0

-

-

11

मध्य प्रदेश

21

18

-

-

12

महाराष्ट्र

29

19

-

-

13

मणिपुर

3

1

481

477

14

ओडिशा

8

6

677

433

15

पंजाब

5

2

-

-

16

राजस्थान

3

2

157*

132

17

तेलंगाना

11

6

575

532

18

उत्तर

प्रदेश

4

2

-

-

19

उत्तराखंड

2

0

1073

760

20

हिमाचल

प्रदेश

3

0

168

103

21

तमिलनाडु

1

1

547

260

22

अरुणाचल प्रदेश

1

0

1097

770

23

मेघालय

-

-

238

135

24

मिज़ोरम

-

-

45

30

25

नागालैंड

-

-

663

407

26

सिक्किम

-

-

465

234

27

त्रिपुरा

-

-

58

37

28

लद्दाख

1

0

21

6

 

कुल

125

71

8338

5414

                 

 

* वोराई बांध और खटनावल बांध नामक दो जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरुद्धार-जिसकी अनुमानित लागत 3.79 करोड़ रूपए है, भरतपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र को लाभान्वित करते हैं।

यह सूचना केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल द्वारा लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

*****

एनडी/एचएम

 

 

 


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