पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसद प्रश्न: लाहौल और स्पीति एवं किन्नौर में डॉप्लर रडार कवरेज

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 2:21PM by PIB Delhi

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा राज्य सरकार और अन्य केंद्रीय सरकारी एजेंसियों के समन्वय से किए गए निरंतर प्रयासों के बावजूद लाहौल और स्पीति घाटी में एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) की स्थापना के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाया है। इसका कारण बीम अवरोध है, जिससे प्रभावी मौसम निगरानी में काफी बाधा उत्पन्न होगी। परियोजना की समय सीमा समाप्त होने के बाद, प्रस्तावित डॉप्लर मौसम रडार को उस स्थान पर स्थापित नहीं किया गया और बाद में इसे देश के एक अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित कर दिया गया। वर्तमान में, राज्य में कुफरी, जोत और मुरारी देवी में तीन कार्यरत एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार हैं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने हिमाचल प्रदेश में मौसम की निगरानी और अवलोकन गतिविधियों में सहयोग हेतु 24 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस), 4 कृषि-स्वचालित मौसम स्टेशन (एग्रो-एडब्ल्यूएस) और 66 स्वचालित वर्षामापी स्टेशनों (एआरजी) का एक नेटवर्क स्थापित किया है। वर्षा की निगरानी में सहयोग हेतु राज्य में जिला और ब्लॉक स्तर पर वर्षा निगरानी योजनाओं के अंतर्गत 135 वर्षामापी स्टेशन स्थापित हैं। वर्तमान में, हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति एवं किन्नौर जिलों में 10 एडब्ल्यूएस और एआरजी कार्यरत हैं। लाहौल एवं स्पीति तथा किन्नौर जिलों में स्थापित एडब्ल्यूएस और एआरजी का विवरण नीचे दी गई तालिका में उपलब्ध है:

 

क्रमांक

स्‍टेशन का नाम

ज़िला

अक्षांश (ºN)

देशांतर (ºE)

ऊंचाई (मी)

स्टेशन का प्रकार

1

रेक्‍कोन

किन्नौर

31.5386

78.2767

2304

एडब्ल्यूएस

2

केलांग

लाहौल और स्पीति

32.5719

77.0353

3119

एडब्ल्यूएस

3

कुकुमशेर

लाहौल और स्पीति

32.7003

76.6885

2627

एडब्ल्यूएस

4

ताबो

लाहौल और स्पीति

32.0915

78.3851

3262

एडब्ल्यूएस

5

कल्पा

किन्नौर

31.54

78.25

2885

एआरजी

6

लियो

किन्नौर

31.88

78.13

4988

एआरजी

7

मूरंग

किन्नौर

31.6

78.4412

2291

एआरजी

8

पूह

किन्नौर

31.7608

78.5829

2745

एआरजी

9

सांगला

किन्नौर

31.43

78.25

2563

एआरजी

10

सुम्धो

लाहौल और स्पीति

32.0695

76.5988

1096

एआरजी

सरकार ने मंत्रालय द्वारा भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के माध्यम से देश भर में, विशेष रूप से दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में, चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता के जवाब में, परिचालन आवश्यकताओं, तकनीकी व्यवहार्यता और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर मौसम निगरानी नेटवर्क और पूर्वानुमान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए कई उपाय किए हैं। सरकार ने उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) सुविधाओं सहित उन्नत, अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाया है, ताकि उच्च-रिज़ॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एनडब्ल्यूपी) मॉडल, अवलोकन प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम पूर्वानुमान उपकरणों का समर्थन किया जा सके, जिससे मौसम निगरानी और पूर्वानुमान तथा संबंधित चरम मौसम की घटनाओं की सटीकता में सुधार हो सके। वर्तमान में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के पास मौसम अवलोकन नेटवर्क है जिसमें मैनुअल वेधशालाएं, एडब्ल्यूएस, एआरजी, एग्रो-एडब्ल्यूएस, डीडब्ल्यूआर, ऊपरी-वायु वेधशालाएं और उपग्रह शामिल हैं, जो देश भर में, विशेष रूप से संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में, मौसम की निगरानी और मौसम पूर्वानुमान तथा चरम मौसम की घटनाओं के लिए एनडब्ल्यूपी मॉडल का समर्थन करते हैं।

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एचएन/ओपी  


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