गृह मंत्रालय
सीमा-पार मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा सुरक्षा
प्रविष्टि तिथि:
29 JUL 2026 3:45PM by PIB Delhi
पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश में सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। 'डेथ ट्राएंगल' और म्यांमार के साथ खुली सीमाओं की वजह से पूर्वोत्तर राज्य विशेष रूप से संगठित सीमा पार तस्करी नेटवर्क के माध्यम से एम्फेटामाइन-टाइप स्टिमुलेंट्स (एटीएस) और हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। विभिन्न ड्रग लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों (डीएलईए) द्वारा नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को दी गई रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के दौरान कुल 4626 किलोग्राम एम्फेटामाइन टाइप स्टिमुलेंट्स (एटीएस) और 2652 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई है।
फ्री मूवमेंट रेजीम (एफएमआर) के साथ संवेदनशील सीमा क्षेत्रों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों को सुगम बनाया है। ड्रग तस्करी करने वाले गिरोह लगातार अपने काम करने के तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। इनमें वैध व्यापार और यात्रियों की आवाजाही के दौरान ड्रग्स छिपाना, गैर-कानूनी तस्करी को आसान बनाने के लिए स्थानीय रिसीवर नेटवर्क के साथ तालमेल बिठाना और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए तस्करी के रास्ते बदलना शामिल है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: -
(i) अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और उनके दुरुपयोग की चुनौती से निपटने के लिए, 26.06.2026 को नशीले पदार्थों के नियंत्रण पर विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) जारी किया गया है। इस विजन डॉक्यूमेंट को संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों और राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जाना है। इसके लिए हर केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/एजेंसी के लिए खास तौर पर बताए गए एक्शन पॉइंट्स और समय-सीमा का पालन करना होगा। विजन डॉक्यूमेंट में बताए गए चार मुख्य फ़ोकस क्षेत्र इस प्रकार हैं: -
- प्रवर्तन (खुफिया जानकारी और संचालन)
- प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण
- मांग और नुकसान को कम करना
- क्षमता निर्माण और समन्वय
(ii) भारत में ड्रग तस्करी और ड्रग के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के क्षेत्र में केंद्रीय और राज्य ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए 4-स्तरीय नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) व्यवस्था स्थापित की गई। एनसीओआरडी की शीर्ष और कार्यकारी समिति की बैठकें केंद्र स्तर पर होती हैं, जबकि राज्य-स्तरीय एनसीओआरडी बैठकों की अध्यक्षता मुख्य सचिव हर तिमाही करते हैं और जिला-स्तरीय एनसीओआरडी बैठकें जिला मैजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में हर महीने होती हैं, जिनमें प्रवर्तन, खुफिया जानकारी साझा करने और रोकथाम के उपायों की समीक्षा की जाती है।
(iii) राज्य में मादक पदार्थों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की जांच पर चर्चा करने के लिए संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं, जिनमें सभी संबंधित केंद्रीय और राज्य एजेंसियां भाग लेती हैं।
(iv) हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में एक समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता एडिशनल डायरेक्टर जनरल या इंस्पेक्टर जनरल स्तर के पुलिस अधिकारी करते हैं। यह फोर्स राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए एनसीओआरडी सचिवालय के तौर पर काम करती है और अलग-अलग स्तरों पर एनसीओआरडी बैठकों में लिए गए फैसलों के पालन पर नजर रखती है।
(v) नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ड्रग तस्करी को रोकने के लिए संयुक्त अभियान चलाने के मकसद से भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल, राज्य एएनटीएफ जैसी अन्य एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बिठा रहा है।
(vi) राज्य के अधिकारियों के साथ तालमेल बेहतर करने, रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को आसान बनाने, ऑपरेशनल कामकाज को असरदार ढंग से चलाने और ब्यूरो की भौगोलिक पहुंच बढ़ाने के लिए, एनसीबी ने श्रीनगर, सिलीगुड़ी, अगरतला और ईटानगर जैसे अहम सीमावर्ती इलाकों में जोनल यूनिट्स बनाई हैं और सब-जोन को जोन में अपग्रेड किया है। इसके अलावा, सरकार ने छह नए जोनल कार्यालय बनाने की मंजूरी दी है, जिनमें से चार पूर्वोत्तर राज्यों - यानी दीमापुर (नागालैंड), आइजोल (मिज़ोरम), शिलांग (मेघालय) और गंगटोक (सिक्किम) में बनाए जा रहे हैं।
(vii) सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने के लिए सरकार कई तरह से व्यापक सहयोग दे रही है, जैसे कि सबसे संवेदनशील हिस्सों में उन्नत ड्रोन रोधी प्रणालियों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों, पीटीजेड, एनवीडी सहित उन्नत निगरानी प्रणालियों की स्थापना, नए डिजाइन की बाड़ की स्थापना के माध्यम से सीमा पर बाड़ को मजबूत करना, बॉर्डर फ्लड लाइट आदि।
पूर्वोत्तर क्षेत्र से मादक पदार्थों की तस्करी के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आए हैं। ये बदलाव तस्करी की जाने वाली ड्रग्स के प्रकार, तस्करी के रास्तों और ड्रग तस्करी करने वाले गिरोहों के काम करने के तरीकों से जुड़े हैं।
इस इलाके में हेरोइन की तस्करी तो हो ही रही है, लेकिन म्यांमार से मेथम्फेटामाइन (क्रिस्टल मेथ/याबा) की तस्करी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है - खासकर मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड के रास्ते - जो सिंथेटिक ड्रग्स ओर बदलाव को दर्शाता है। साथ ही, सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से म्यांमार तक प्रीकर्सर केमिकल्स की तस्करी की खबरें भी आ रही हैं।
मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह भारत-म्यांमार सीमा के खुले और बिना बाड़ वाले हिस्सों, जंगल के रास्तों, पगडंडियों और पहाड़ी इलाकों का इस्तेमाल मादक पदार्थों की सीमा-पार तस्करी के लिए तेजी से कर रहे हैं। मादक पदार्थों को वैध कार्गो, यात्री वाहनों और माल ढोने वाले वाहनों में छिपाकर रखा जाता है, जबकि इनके तालमेल और डिलीवरी के लिए कूरियर सेवाओं, पार्सल नेटवर्क, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन एप्लिकेशन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। मोरेह-तामू बॉर्डर म्यांमार से देश के अलग-अलग हिस्सों में हेरोइन और मेथम्फेटामाइन की तस्करी के लिए एक मुख्य ट्रांजिट पॉइंट बना हुआ है।
नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो(एनसीआरबी) द्वारा साल 2024 के लिए जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार; 2020-2024 के दौरान जब्त किए गए नशीले पदार्थों का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के हिसाब से विवरण अनुबंध- में है और 2020-2024 के दौरान गिरफ्तार और दोषी ठहराए गए लोगों का विवरण 'अनुबंध-II' में है।
गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
अनुलग्नक देखने के लिए यहां क्लिक करें।
***
पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2291547)
आगंतुक पटल : 33