वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
22वें जेआरडी टाटा स्मारक व्याख्यान में श्री पीयूष गोयल ने कहा, 'नवाचार, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण भारत के भविष्य के विकास के स्तंभ हैं'
1 लाख करोड़ रुपये का आरडीआई कोष, भारत-एआई और दूसरा सेमीकंडक्टर मिशन नवाचार को बढ़ावा देंगे: श्री पीयूष गोयल
श्री पीयूष गोयल ने डीप-टेक स्टार्टअप्स में शुरुआती दौर के निवेश पर जोर दिया और भारतीय नवाचार के तेजी से व्यावसायीकरण का आह्वान किया
प्रविष्टि तिथि:
29 JUL 2026 9:19PM by PIB Delhi
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत की भविष्य की वृद्धि इनोवेशन, डीप टेक्नोलॉजी, कुशल कार्यबल, स्टार्टअप, एमएसएमई और ऐसे अनुकूल नीतिगत माहौल पर निर्भर करेगी जो उद्यम और निवेश को बढ़ावा दे। इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग, अच्छे मैन्युफैक्चरिंग तौर-तरीकों और सभी क्षेत्रों में बेहतरीन क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का समर्थन भी हासिल होगा।
आज नई दिल्ली में भारत रत्न श्री जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा की 122वीं जयंती के मौके पर 22वां जेआरडी टाटा मेमोरियल लेक्चर देते हुए मंत्री ने कहा कि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और विकास, उद्यमिता और उत्कृष्टता की संस्कृति से प्रेरित होगी।
श्री गोयल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और उन्नत सामग्रियों सहित उभरती और गहन प्रौद्योगिकी औद्योगिक विकास के अगले चरण को तय करेंगी को परिभाषित करेंगी और भारत की औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार स्टार्टअप्स को मजबूत करने, एमएसएमई को बढ़ावा देने, गहन प्रौद्योगिकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और कौशल विकास पहल का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास अकेले सरकार के नेतृत्व वाला प्रयास नहीं हो सकता है और इसे उद्योग जगत के नेतृत्व वाला आंदोलन बनना चाहिए, जबकि सरकार व्यापार करने में आसानी में सुधार करना और एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना जारी रखेगी, जिसमें जिसमें कंपनियां बढ़ सकें और वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सकें।
अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई सरकारी पहलों पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने कहा कि सरकार ने उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार के लिए दीर्घकालिक, कम लागत वाली रिस्क कैपिटल प्रदान करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष शुरू किया है। उन्होंने आगे कहा कि इंडियाएआई मिशन के तहत स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को सस्ती कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान करने के लिए लगभग 38,000 जीपीयू को पहले ही शामिल किया जा चुका है, जिसमें आगे विस्तार की योजना है। उन्होंने भारत सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले चरण के तहत पूरे आवंटन के लिए प्रतिबद्धताएं पहले ही प्राप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब लगभग 12-13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आवंटन के साथ दूसरा सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया है और उद्योग जगत को नए निवेश और प्रस्तावों के माध्यम से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
श्री गोयल ने कहा कि नवाचार और विनिर्माण को एक साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विनिर्माण का भविष्य प्रौद्योगिकी, स्वचालन, बेहतर उत्पाद डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग, मजबूत ब्रांडिंग और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी गुणवत्ता के माध्यम से बेहतर उत्पादन में निहित है। उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा घरेलू बाजार बड़े पैमाने पर काम करने का अवसर देता है, लेकिन भारतीय उद्योगों को इस पैमाने का इस्तेमाल करके वैश्विक बाजारों में विस्तार करना चाहिए। इससे ज्यादा विकास होगा, रोजगार के अधिक अवसर सृजित होंगे और भारत के बढ़ते फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौतों) के नेटवर्क से मिलने वाले फ़ायदों को अधिकतम किया जा सकेगा।
भारत की मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की रणनीति का ज़िक्र करते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत ने 38 विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनकी कुल जीडीपी लगभग 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने इन समझौतों की तुलना 2014 से पहले संपन्न भारत के पहले के एफटीए से की, जो काफी हद तक लगभग 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाले देशों के साथ थे और जहां भारत ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने के बजाय उनसे मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि ये समझौते भारतीय व्यवसायों को अभूतपूर्व बाजार पहुंच और विस्तार के अवसर प्रदान करते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जेआरडी टाटा का गुणवत्ता और उत्कृष्टता पर जोर उन्हें ऐसे अवसरों का बड़े पैमाने पर लाभ उठाने में सक्षम बनाता।
भारत के आर्थिक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए श्री गोयल ने कहा कि देश ने पिछले साल 7.7 प्रतिशत और पिछली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की। इस तरह वैश्विक उथल-पुथल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि लंबे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति से संबंधित अनिश्चितताओं, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर को प्रभावित करने वाले घटनाक्रमों और पिछले वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका को किए जाने वाले अधिकांश भारतीय एक्सपोर्ट पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बावजूद 2025-26 के दौरान भारत के सामान और सेवाओं दोनों के निर्यात में वृद्धि जारी रही। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक वाणिज्यिक निर्यात में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दिखाता है। श्री गोयल ने कहा कि ओईसीडी, विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे संस्थान भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर देखते हैं। वह इस विश्वास का श्रेय भारत के सक्षम नीतिगत वातावरण, इसके लोगों के आत्मविश्वास, युवा भारतीयों की उद्यमशीलता की भावना और देश के दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उभरने को देते हैं।
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए श्री गोयल ने कहा कि विरासत में मिली बढ़त की तुलना में खुद बनाई गई बढ़त ज्यादा मायने रखती है और भारत की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता इसकी नवाचार करने की क्षमता से निर्धारित होगी।
मंत्री ने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अपने शुरुआती दौर से काफी आगे बढ़ चुका है और अब डीप टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
14 जून को फ्रांस के नीस में भारत इनोवेट्स के उद्घाटन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपनी भागीदारी को याद करते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत के 120 प्रमुख डीप-टेक स्टार्टअप्स ने वैश्विक निवेशकों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और वैश्विक लीडर्स के सामने अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय इनोवेशन की गुणवत्ता देखने के बाद हर प्रतिभागी नए आत्मविश्वास और गर्व के साथ लौटा।
श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि अगली प्राथमिकता स्टार्टअप्स को विचारों से प्रोटोटाइप और प्रोटोटाइप से व्यावसायीकरण की ओर बढ़ने में मदद करना होना चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत से स्टार्टअप्स को उनके उत्पादों को अपनाकर, उनकी तकनीकों के साथ प्रयोग करके और उन्हें व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ने में मदद करके उनका समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक बार जब अवधारणा का प्रमाण व्यावसायिक सफलता में विकसित हो जाता है, तो वैश्विक बाजार स्वाभाविक रूप से इसका अनुसरण करेंगे।
भारतीय इनोवेशन के विदेशी निवेशकों के हाथों में चले जाने पर चिंता जताते हुए श्री गोयल ने कहा कि देश की कई बेहतरीन टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को आखिर में विदेशी कंपनियां खरीद लेती हैं, क्योंकि भारतीय निवेशक अक्सर निवेश करने से पहले बिजनेस के पूरी तरह से विकसित होने का इंतजार करते हैं। उन्होंने घरेलू निवेशकों से प्रारंभिक चरण में भारतीय स्टार्टअप्स का समर्थन करने का आग्रह किया और कहा कि भारत के गहन तकनीक वाले उद्यमी निवेश के एक विशाल अवसर का प्रतिनिधित्व करते हैं। 'भारत इनोवेट्स' में हिस्सा लेने वाले 120 स्टार्टअप्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह सार्वजनिक जीवन के बजाय बिजनेस में होते, तो अपनी बचत ऐसे इनोवेटर्स में लगाते।
मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। 2047 तक 13 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के तय लक्ष्य को हासिल करने की अच्छी स्थिति में है, उस समय देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे होने का उत्सव मना रहा होगा। उन्होंने कहा कि भारत में पहले से ही अलग-अलग क्षेत्रों में इस बदलाव के उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।
सुधार की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने कहा कि सरकार ने अनुपालन का बोझ कम किया है, 'जन विश्वास अधिनियम' के माध्यम से कई कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया है, कानून की किताबों से कई पुराने कानूनों को हटाया है और उद्यम को बढ़ावा देने के लिए नियमों को सरल बनाना जारी रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी उद्यमिता में बाधा डालने वाली रुकावटों को दूर करने और भारतीय उद्योग की असली क्षमता को उजागर करने के लिए हर दिन काम कर रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन के माध्यम से लोक कल्याण का विस्तार करने पर समान रूप से जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से यह पक्का हुआ है कि बिना किसी बाधा या बिचौलियों के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पहुंचें, साथ ही हर नागरिक को भोजन, आवास, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, फिजिकल कनेक्टिविटी और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए लगातार कोशिशें की गई हैं।
उन्होंने भारत की विकास यात्रा में एमएसएमई के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और उत्पाद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीक अपनाने में इस सेक्टर को सहयोग दिया जाना चाहिए।
श्री गोयल ने कहा कि नीतियां, प्रोत्साहन और तकनीक विकास के लिए जरूरी ढांचा तो प्रदान करते हैं, लेकिन किसी भी सुधार की अंतिम सफलता उन लोगों पर निर्भर करती है जो उसे लागू करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र का उदय न केवल उसकी नीतियों की गुणवत्ता से बल्कि उसकी मानसिकता और राष्ट्रीय चरित्र की गुणवत्ता से भी निर्धारित होता है।
जेआरडी टाटा की विरासत को स्मरण करते हुए श्री गोयल ने कहा कि उन्होंने न केवल कंपनियां बनाईं, बल्कि भारत में क्षमताएं, आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा करने की भावना भी पैदा की। 29 जुलाई को मनाए जाने वाले गुरु पूर्णिमा का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु शिष्यों के संदेह दूर करते हैं और उनमें क्षमता का संचार करते हैं; भारतीय उद्योग जगत के लिए जेआरडी टाटा ने ठीक यही भूमिका निभाई।
अपने संबोधन के समापन पर श्री गोयल ने भारतीय उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे पूर्णता का लक्ष्य रखकर उत्कृष्टता हासिल करें और 'मेड इन इंडिया' लेबल को वैश्विक सम्मान और बेहतरीन गुणवत्ता का पर्याय बनाएं। उन्होंने इंडस्ट्री से अपील की कि वे अपनी कमाई को रिसर्च और डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण में फिर से निवेश करें। उन्होंने उद्योग जगत से अनुसंधान और विकास, नवाचार, कौशल विकास, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में आय को फिर से निवेश करने की अपील की। उन्होंने कंपनियों से अपनी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी का विस्तार करने के लिए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने का भी आग्रह किया और उद्योग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र सहित गहरी प्रौद्योगिकियों में बड़े पैमाने पर निवेश करने का आह्वान किया।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2291500)
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