मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
सरकार ने लक्षित योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए भारत के पशुधन एवं डेयरी सेक्टर को सशक्त बनाने के अपने संकल्प को दोहराया
प्रविष्टि तिथि:
29 JUL 2026 5:06PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने लक्षित योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास, रोग नियंत्रण, आनुवंशिक सुधार और मूल्य-श्रृंखला (वैल्यू-चेन) को मजबूत करने के जरिए पशुपालन और डेयरी सेक्टर के विकास को तेज करने के अपने संकल्प को दोहराया है। साथ ही, सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 246(3) के तहत पशुपालन राज्य का विषय है।
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यापक राष्ट्रीय पशुधन विकास कानून या नीतिगत ढांचा बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि पशुपालन संबंधी विधायी जिम्मेदारियां राज्यों की है। हालांकि, पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) विभिन्न प्रमुख योजनाओं और नीतिगत उपायों के जरिए राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहयोग देना जारी रखे हुए है।
पशुधन क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास
सरकार ने पिछले दशक में पशुधन क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला:
- दूध का उत्पादन 70 प्रतिशत बढ़ा है और यह 2014-15 में 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 248 मिलियन टन हो गया है।
- अंडे का उत्पादन 90 प्रतिशत बढ़ा है और यह 2014-15 में 78.48 बिलियन अंडे से बढ़कर 2024-25 में 149.11 बिलियन अंडे हो गया है।
इन उपलब्धियों को विभिन्न अहम कार्यक्रमों के जरिए समर्थन मिला है, जिनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम)
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम)
- पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी)
- डेयरी विकास हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीडीडी)
- पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ)
निर्यात, पता लगाने की क्षमता और निवेश पर ध्यान
भारत के पशुधन क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने हेतु, सरकार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) के साथ मिलकर निर्यात को बढ़ावा दे रही है। डीएएचडी भारतीय डेयरी उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से साझेदार देशों के साथ ‘संयुक्त कार्य समूहों’ और ‘तकनीकी कार्य समूहों’ जैसे द्विपक्षीय तंत्रों के जरिए भी काम कर रहा है।
इस दिशा में ‘भारत पशुधन’ डेटाबेस एक अहम पहल है, जिसे डीएएचडी और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) ने मिलकर तैयार किया है। पशुधन की पहचान से संबंधित 12 अंकों वाली एक विशेष प्रणाली पर आधारित यह डेटाबेस पशुधन की पता लगाने की क्षमता को संभव बनाता है और मूल्य-वर्धित (वैल्यू-एडेड) पशुधन उत्पादों के निर्यात में मदद करता है।
एएचआईडीएफ और राष्ट्रीय पशुधन मिशन जैसी योजनाओं के जरिए जहां पशुधन संबंधी आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम निर्यात के मौकों को बेहतर बनाने हेतु रोग-मुक्त क्षेत्र के सृजन की दिशा में काम कर रहा है।
भारत दूध उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बना हुआ है
सरकार ने राज्यसभा को बताया कि फसल प्रबंधन, कृषि इनपुट, मांग एवं आपूर्ति से संबंधित नीति आयोग के कार्य समूह की रिपोर्ट (2024) के अनुसार, 2025-26 में भारत में दूध की अनुमानित मांग 243 मिलियन टन है, जबकि 2024-25 के दौरान देश का दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन तक पहुंच गया।
इससे पता चलता है कि भारत दूध और दूध से बने उत्पादों की घरेलू मांग को पूरा करने के मामले में आत्मनिर्भर बना हुआ है।
डेयरी प्रसंस्करण और ग्रामीण आजीविका का सशक्तिकरण
दूध के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने हेतु, डीएएचडी देशभर में विभिन्न पहलों को लागू कर रहा है:
- देशी नस्लों के संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और दूध उत्पादन को बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम)।
- डेयरी विकास हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीडीडी) ये सुविधाएं प्रदान कर रहा है:
- दूध की खरीद, चिलिंग और गुणवत्ता आश्वासन (क्वालिटी एश्योरेंस) से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने हेतु 50 प्रतिशत अनुदान सहायता।
- पहाड़ी इलाकों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में दूध की खरीद, प्रसंस्करण, मूल्य वर्धन (वैल्यू एडिशन) और कोल्ड-चेन अवसंरचना जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित करने हेतु 75 प्रतिशत केन्द्रीय अनुदान सहायता।
- इन क्षेत्रों में गुणवत्ता आश्वासन से संबंधित बुनियादी ढांचे हेतु 70 प्रतिशत केन्द्रीय अनुदान सहायता।
- पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) सहकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में आधुनिक डेयरी प्रसंस्करण, मूल्य वर्धन (वैल्यू एडिशन) और कोल्ड-चेन से संबंधित अवसंरचना स्थापित करने हेतु पात्र लाभार्थियों को 3 प्रतिशत की ब्याज में छूट प्रदान कर रहा है।
सरकार ने सहकारी दूध खरीद, प्रसंस्करण क्षमता और डेयरी से संबंधित बुनियादी ढांचे के बारे में राज्य-वार जानकारी भी साझा की। साथ ही, यह भी बताया कि जहां सहकारी क्षेत्र का डेटा डीएएचडी द्वारा रखा जाता है, वहीं निजी डेयरी सेक्टर से जुड़ी जानकारी केन्द्रीय स्तर पर नहीं रखी जाती है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन
मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि पशुधन क्षेत्र रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने, पोषण की सुरक्षा सुनिश्चित करने, निर्यात को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाता रहता है। राज्य सरकारों के साथ लगातार सहयोग और बुनियादी ढांचे, तकनीक एवं पशुओं के स्वास्थ्य में निरंतर निवेश के जरिए, सरकार देश के पशुधन और डेयरी सेक्टर की पूरी क्षमता का सदुपयोग करने हेतु प्रतिबद्ध है।
***
पीके/केसी/आर/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2291369)
आगंतुक पटल : 40