इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

इंडियाएआई मिशन ने सहयोगात्मक रोडमैप, नवाचार चुनौतियों और क्षमता निर्माण के माध्यम से एआई-संचालित गवर्नेंस और लोक सेवा प्रदायगी को गति दी 


इंडियाएआई मिशन ने 62 मंत्रालयों में 762 एआई उपयोग- मामलों की पहचान की, 58 एआई उत्कृष्टता केंद्रों तथा 543 डेटा एवं एआई प्रयोगशालाओं को स्वीकृति दी

प्रविष्टि तिथि: 29 JUL 2026 3:55PM by PIB Delhi

भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के विजन पर आधारित है। इसका उद्देश्य युवाओं के लिए आर्थिक अवसर और रोजगार सृजित करना है, साथ ही एआई से जुड़े जोखिमों को संबोधित करना भी है।

भारत की एआई रणनीति देश के सशक्त सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र पर आधारित है, जिसका वार्षिक राजस्व 300 अरब डॉलर तथा जिसमें 60 लाख लोग कार्यरत हैं। इंडियाएआई मिशन भारत की एआई महत्वाकांक्षाओं को निम्नलिखित सात स्तंभों के माध्यम से समर्थन प्रदान करता हैः

  • इंडियाएआई कंप्यूट स्तंभ: भारत के तेजी से बढ़ते एआई स्टार्टअप और अनुसंधान समुदायों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक उच्च स्तरीय एंव विस्तार योग्य एआई कंप्यूटिंग इकोसिस्टम की स्थापना।

  • आधारभूत मॉडल:  स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम), मल्टी-मोडल मॉडल और डोमेन-विशिष्ट स्मॉल लैंग्वेज मॉडल विकसित करना, ताकि भारत की एआई संप्रभुता सुनिश्चित हो और भारत-विशिष्ट उपयोग मामलों को संबोधित किया जा सके।

  • इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल: महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाने में सक्षम प्रभावशाली एआई समाधानों के विकास, विस्तार और तैनाती का समर्थन करना।

  • इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स : टियर-दो और टियर-तीन शहरों में विशेषीकृत डेटा और एआई प्रयोगशालाओं की स्थापना करके, विद्यार्थियों को फेलोशिप तथा उद्योग अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित कर एआई प्रतिभा का सुदृढ़ आधार तैयार करना और एआई  शिक्षा का लोकतंत्रीकरण करना।

  • एआईकोश (इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म): उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, मॉडल और टूल तक निर्बाध पहुंच प्रदान करने वाला एक एकीकृत प्लेटफॉर्म बनाना, जो खुले नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के संसाधनों को एकीकृत करता है।

  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई: भारत की अनूठी सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के अनुरूप स्वदेशी गवर्नेंस ढांचे और मूल्यांकन उपकरणों के माध्यम से जिम्मेदार एआई विकास को सक्षम बनाना।

  • इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण: स्टार्टअप के पूरे जीवनचक्र में जोखिम पूंजी और सहायता प्रदान करना ताकि प्रारंभिक प्रोटोटाइप से लेकर व्यावसायीकरण तक फंडिंग की कमी को पाटा जा सके।

अनुप्रयोग विकास पहल (आईएडीआई) के तहत इंडियाएआई ने 5 अप्रैल 2024 को लोक सेवा  प्रदायगी में एआई पर एक कार्यशाला का आयोजन किया,  जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला ने मंत्रालयों और विभागों को उनकी डेटा क्षमताओं का आकलन करने और एआई उपयोग के मामलों की पहचान करने में सहायता प्रदान की, जिससे गवर्नेंस और लोक सेवा प्रदायगी के लिए एआई रोडमैप विकसित करने हेतु एक परामर्शात्मक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिला।

नवाचार चुनौतियों, अनुदान कार्यक्रमों और हैकाथॉन के माध्यम से आईएडीआई ने स्वास्थ्य सेवा, कृषि, गवर्नेंस, जलवायु, साइबर सुरक्षा और वित्तीय विनियमन सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एआई समाधानों की एक श्रृंखला विकसित की है। इस स्तंभ के अंतर्गत इंडियाएआई मिशन ने इन क्षेत्रों में 11 राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और नवाचार चुनौतियां शुरू की हैं।

  1. इंडियाएआई इनोवेशन चैलेंज का फोकस स्वास्थ्य सेवा, कृषि, गवर्नेंस, अधिगम संबंधी अक्षमताओं और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में एआई समाधानों पर था। पहले चरण में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के साथ प्रायोगिक कार्यान्वयन के लिए 30 समाधानों का चयन किया गया। इसके बाद, राष्ट्रीय स्तर पर तैनाती के लिए पांच टीमों (प्रत्येक क्षेत्र से एक) का चयन किया गया, जिनके प्रायोगिक कार्य कई राज्यों में चल रहे हैं।

  2. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी) के सहयोग से आयोजित इंडियाएआई I4सी साइबरगार्ड एआई हैकाथॉन में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर साइबर अपराध शिकायतों के वर्गीकरण और उभरते अपराध पैटर्न की पहचान के लिए एआई समाधान विकसित किए गए। चयनित समाधान को I4सी सिस्टम में एकीकृत कर दिया गया है।

  3. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ साझेदारी में आयोजित इंडियाएआई-जीएसआई मिनरल टारगेटिंग विद एआई हैकाथॉन का उद्देश्य भूविज्ञान, भूभौतिकी, भू-रसायन विज्ञान और रिमोट सेंसिंग जैसे भूवैज्ञानिक डेटासेट का उपयोग करके उन्नत खनिज पूर्वानुमान के लिए एआई/एमएल का लाभ उठाना था।

  4. कैंसर एआई और प्रौद्योगिकी चुनौती (सीएटीसीएच) , राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड के सहयोग से, कैंसर की जांच, निदान, उपचार सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है। चयनित शीर्ष टीमें कार्यान्वयन से पहले नैतिक समीक्षा के दौर से गुजर रही हैं।

  5. इंडियाएआई फेस ऑथेंटिकेशन चैलेंज का उद्देश्य एआई-आधारित डुप्लीकेशन हटाने और एक से अनेक फोटो सत्यापन के माध्यम से सार्वजनिक परीक्षाओं को विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बढ़ाना है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में तैनाती के लिए दो टीमों का चयन किया गया है और तैनाती शुरू हो चुकी है।

  6. इंडियाएआई इंटेलिजेंट डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग (आईडीपी) चैलेंज का उद्देश्य जटिल बहुभाषी दस्तावेजों से सूचना को निकालना, वर्गीकरण, सत्यापन और संरचना को स्वचालित करना है। चयनित दो टीमों को यूपीएससी में तैनात किया जा रहा है और कार्यान्वयन कार्य जारी है।

  7. आयुष मंत्रालय और सुक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा समर्थित इंडियाएआई इनोवेशन चैलेंज 2026 आयुष स्वास्थ्य सेवा और एमएसएमई के लिए एआई समाधानों को बढ़ावा देता है। विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से पहले चरण का मूल्यांकन चल रहा है, जिसके बाद प्रोटोटाइप का विकास और कार्यान्वयन किया जाएगा।

  8. आंध्र प्रदेश सरकार की रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (आरटीजीएस) के साथ साझेदारी में इंडियाएआई चैलेंज फॉर ट्रांसफॉर्मिंग गवर्नेंस प्रमुख विभागों में एआई के उपयोग के मामलों को संबोधित करता है। आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, चरण 1 का मूल्यांकन चल रहा है, और प्रोटोटाइप विकास और पायलट कार्यान्वयन की योजना बनाई जा रही है।

  9. इंडियाएआई फाइनेंशियल कंप्लायंस रिपोर्टिंग चैलेंज , नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) के सहयोग से, एआई-सक्षम अनुपालन निगरानी और जोखिम मूल्यांकन को बढ़ावा देता है।

  10. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सहयोग से आयोजित सीडीएससीओ-इंडियाएआई स्वास्थ्य नवाचार त्वरण हैकाथॉन दस्तावेज़ सारांश, अनामीकरण और निरीक्षण रिपोर्टिंग सहित नियामक कार्यप्रवाहों के एआई-संचालित स्वचालन पर केंद्रित है। प्रोटोटाइप विकास और तैनाती की योजना बनाई गई है।

  11. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के सहयोग से आयोजित पीएमजेएवाई ऑटो एडजुडिकेशन हैकाथॉन पीएमजेएवाई दावों के लिए एआई-आधारित एडजुडिकेशन फ्रेमवर्क के विकास में सहयोग करता है, जिसके परिणामस्वरूप कई प्रोटोटाइप और पायलट तैनाती हुई हैं।

ये पहलें सामूहिक रूप से दर्शाती हैं कि गवर्नेंस और लोक सेवा प्रदायगी के लिए एआई रोडमैप के निर्माण और कार्यान्वयन में कार्यशालाओं, परामर्शों और सहयोगात्मक चुनौती तंत्रों के माध्यम से राज्य सरकारों से सक्रिय रूप से परामर्श किया जाता है और उन्हें शामिल किया जाता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र: केंद्र सरकार ने संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों और उद्योग भागीदारों के सहयोग से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 58 कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र (एआई-सीओई) स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। स्वीकृत ढांचे के तहत तमिलनाडु राज्य में दो कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र (एआई-सीओई) स्थापित करने के लिए आवंटित किए गए हैं।

इंडियाएआई डेटा और एआई लैब्स (आईटीआई/पॉलीटेक्निक): इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स पिलर के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों के आईटीआई और पॉलीटेक्निक संस्थानों में 543 डेटा और एआई लैब्स की स्थापना को मंजूरी दी गई है। ये लैब्स एआई, डेटा एनोटेशन, डेटा क्यूरेशन और एप्लाइड डेटा साइंस में प्रशिक्षण प्रदान करेंगी। इस पहल के अंतर्गत तमिलनाडु में 18 डेटा और एआई लैब्स की स्थापना के लिए आवंटन किया गया है।

इंडियाएआई फैलोशिप: इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स कार्यक्रम के तहत एआई शिक्षा और अनुसंधान के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट छात्रों को फैलोशिप प्रदान की जाती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 178 संस्थानों में कुल 686 फैलोशिप प्रदान की गई हैं। इनमें से 162 फैलोशिप तमिलनाडु के विद्यार्थियों को दी गई हैं, जिनमें 96 स्नातक, 34 स्नातकोत्तर और 32 पीएचडी फैलोशिप शामिल हैं।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट: भारत ने 16 से 21 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी की। माननीय प्रधानमंत्री ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन के अवसर पर मंत्रालयों और विभागों से इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो में सक्रिय रूप से भाग लेने और गवर्नेंस में एआई को अपनाने में तेजी लाने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित एआई अनुप्रयोगों की पहचान करने का आह्वान किया।

इन निर्देशों और शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं के आधार पर कैबिनेट सचिवालय ने मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय स्थापित करके गवर्नेंस, सेवा प्रदायगी, परिचालन दक्षता और क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों को संबोधित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के अवसरों की पहचान की। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 62 मंत्रालयों और विभागों से 762 समस्या विवरण चिन्हित किए गए, जिन्हें बाद में एआई -आधारित समाधान विकसित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेजा गया।

सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं कि सरकारी प्रणालियों एवं नागरिक-केंद्रित सेवाओं में एआई का उपयोग पारदर्शिता, जवाबदेही, डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम निष्पक्षता और स्वतंत्र लेखापरीक्षा के मानकों के अनुरुप हो:

  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (डीपीडीपी अधिनियम) व्यक्तिगत डेटा के प्रोसेसिंग के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है, जिसमें उद्देश्य सीमा, डेटा न्यूनीकरण, सूचित सहमति और डेटा प्रिंसिपल के लिए पहुंच, सुधार और विलोपन के अधिकार शामिल हैं; यह महत्वपूर्ण डेटा न्यासियों के लिए एक डेटा लेखा परीक्षक नियुक्त करने और आवधिक डेटा संरक्षण प्रभाव आकलन करने को भी अनिवार्य बनाता है।

  • इंडियाएआई मिशन के सुरक्षित और विश्वसनीय एआई स्तंभ के तहत एआई पूर्वाग्रह शमन, एल्गोरिथम ऑडिटिंग, व्याख्या योग्य एआई, गोपनीयता-संरक्षण एआई और डीपफेक डिटेक्शन सहित विभिन्न विषयों पर 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं का चयन किया गया है, जिन्हें शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्ट-अप्स, उद्योग और नागरिक समाज संगठनों द्वारा मॉडल निष्पक्षता का आकलन करने के लिए उपकरणों और सहभागी एल्गोरिथम ऑडिटिंग के लिए एक ओपन-सोर्स फ्रेमवर्क सहित स्वदेशी उपकरण और फ्रेमवर्क विकसित करने के लिए कार्यान्वित किया जा रहा है।

  • भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, जिम्मेदार और समावेशी विकास एवं तैनाती के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करने वाले भारत के एआई गवर्नेंस दिशानिर्देश 5 नवंबर, 2025 को जारी किए गए थे। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, निम्नलिखित संस्थागत तंत्रों की शुरुआत की गई है: एआई गवर्नेंस और आर्थिक समूह (एआईजीईजी), जो भारत की राष्ट्रीय एआई गवर्नेंस रणनीति के विकास का मार्गदर्शन करने वाला एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी निकाय है; प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति (टीपीईसी), जो तकनीकी और नीतिगत अनुशंसाओं का समर्थन करती है; और एआई सुरक्षा संस्थान (एआईएसआई), जो सुरक्षा अनुसंधान करता है, मानकों को विकसित करता है, एआई प्रणालियों का परीक्षण करता है और उभरते जोखिमों का मूल्यांकन करता है।

  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-इन) ने मई 2023 में प्रतिकूल एआई खतरों के खिलाफ सुरक्षा उपायों पर एडवाइजरी जारी की, सितंबर 2024 में एसआईएसए के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रमाणित सुरक्षा पेशेवर (सीएसपीएआई) कार्यक्रम शुरू किया और मार्च 2025 में जनरेटिव एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं पर सलाह जारी की।        

  • भारत में एआई सुरक्षा पर स्वदेशी अनुसंधान और विकास के केंद्र के रूप में एक इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना की जा रही है, ताकि एआई गवर्नेंस के लिए भारत के तकनीकी और संस्थागत बुनियादी ढांचे को समर्थन मिल सके।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक उत्तर में दी।

***

पीके/केसी/आईएम/केएस


(रिलीज़ आईडी: 2291328) आगंतुक पटल : 33
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English