मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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बिहार में पीएमएमएसवाई और आरजीएम


बिहार में 'पीएमएमएसवाई और आरजीएम' के संबंध में वक्तव्य

प्रविष्टि तिथि: 29 JUL 2026 2:54PM by PIB Delhi

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का मत्स्य विभाग बिहार सहित सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए वित्त वर्ष 2020-21 से कुल 20,750 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) लागू कर रहा है। पीएमएमएसवाई के तहत भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग ने बिहार सरकार को विभिन्न मत्स्य विकास गतिविधियों के लिए 579.72 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 193.13 करोड़ रुपये है। बिहार सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों को कुल 107.30 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से 73.59 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है। बिहार के लिए स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में एकीकृत एक्वा-पार्क, थोक मछली बाजार, जलाशयों का एकीकृत विकास, गुणवत्ता परीक्षण और रोग निदान के लिए रेफरल प्रयोगशालाएं, मछली ब्रूडबैंक, हैचरी आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 15 जून, 2026 को पटना में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया गया है, जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन, उद्यमियों और अन्य हितधारकों को लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रम, सर्वोत्तम प्रथाओं से अवगत कराना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करना है। पिछले तीन वर्षों में पीएमएमएसवाई के तहत बिहार में स्वीकृत, उपयोग की गई धनराशि और लाभान्वित मछली पालकों की संख्या का जिला-वार विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को गति देने के लिए भारत सरकार का पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) बिहार सहित देश के सभी डेयरी किसानों के लिए स्वदेशी नस्लों के विकास और संरक्षण, मवेशियों के आनुवंशिक सुधार और दुग्ध उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिसंबर 2014 से  ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ (आरजीएम) लागू कर रहा है। बिहार में की गई प्रमुख पहलों में शामिल हैं 64.87 लाख कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का निष्पादन जिससे 29.16 लाख किसान लाभान्वित हुए, 10,122 कृत्रिम गर्भाधान में लिंग-आधारित वीर्य प्रौद्योगिकी का उपयोग जिससे 9,020 किसानों को लाभ हुए, पूर्णिया में एक अत्याधुनिक वीर्य केंद्र की स्थापना, पटना और मोतिहारी में दो इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रयोगशालाओं की स्थापना, घर-घर कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान करने के लिए 5,433 बहुउद्देशीय गर्भाधान तकनीशियनों का प्रशिक्षण और उपकरण वितरण तथा मुंगेर और डुमरांव में 500 बछियों की क्षमता वाले दो बछिया पालन केंद्रों को मंजूरी। आरजीएम के तहत भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग ने बिहार सरकार को 79.29 करोड़ रुपये की राशि जारी की है और राज्य द्वारा इसका उपयोग कर लिया गया है।

इसके अलावा, आरजीएम के तहत बिहार सहित पूरे देश में किसानों को स्वदेशी मवेशी नस्लों के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए बांझपन निवारण शिविर (फर्टिलिटी कैंप), दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिताएं, बछड़ा रैलियां, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार और कार्यशालाएं, सम्मेलन आदि आयोजित किए गए हैं। आरजीएम के राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत अब तक लाभान्वित किसानों की जिलावार संख्या अनुलग्नक-II में दी गई है।

डीएएचडी बिहार सहित पूरे देश में दूध प्रसंस्करण, विपणन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए ‘राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम’ (एनपीडीडी) और ‘पशुपालन अवसंरचना विकास निधि’  को भी लागू कर रहा है। बिहार में एनपीडीडी के तहत प्रतिदिन 7 लाख लीटर की शीतलन क्षमता स्थापित की गई है, 21 दुग्ध संयंत्र प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ किया गया है और 13,590 ग्राम स्तरीय गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। विपणन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए, 3,426 डीप फ्रीजर और विज़ी कूलर भी उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले दो वर्षों में श्वेत क्रांति पहलों के तहत 11,834 दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना की गई है। एएचआईडीएफ के तहत निजी और सहकारी दोनों क्षेत्रों में प्रतिदिन 7.55 लाख लीटर की कुल क्षमता वाली दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी दी गई है।

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने यह जानकारी राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

 

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पीके/केसी/आईएम/केएस


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