मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
पारंपरिक मत्स्य पालन
प्रविष्टि तिथि:
28 JUL 2026 4:08PM by PIB Delhi
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीएमएफआरआई) ने आकलन किया है कि वर्ष 2021-2025 के दौरान ट्रॉल-आधारित मत्स्य अवतरण में कोई स्पष्ट गिरावट नहीं देखी गई है। आईसीएआर-सीएमएफआरआई के प्रकाशन मरीन फिश स्टॉक स्टेटस ऑफ इंडिया (2022) के अनुसार, भारतीय समुद्री जलक्षेत्रों के समुद्री मत्स्य भंडार स्वस्थ स्थिति में हैं तथा भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) के विभिन्न क्षेत्रों में मूल्यांकित 135 मत्स्य भंडारों में से 91.1% को सतत् पाया गया है।
(क) ‘मत्स्य पालन’ राज्य का विषय है और प्रत्येक तटीय राज्य के पास अपने समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम (एमएफआरए) हैं, जिनके माध्यम से आधार रेखा से 12 समुद्री मील तक के प्रादेशिक जल क्षेत्र में मत्स्य पालन गतिविधियों का विनियमन किया जाता है। इसमें पारंपरिक एवं मशीनीकृत मत्स्य नौकाओं के लिए मत्स्य पालन क्षेत्रों की ज़ोनिंग, जाल की आंख (मेश) का आकार एवं मत्स्य उपकरणों से संबंधित विनियम, मौसमी मत्स्य पालन प्रतिबंध, मछली पकड़ने के लिए न्यूनतम वैध आकार सीमा, जोड़ी/बुल ट्रॉलिंग तथा कृत्रिम/एलईडी लाइट के उपयोग जैसी विनाशकारी मत्स्य पालन पद्धतियों पर रोक और छोटी मछलियों के शिकार की रोकथाम शामिल हैं। भारत सरकार का मत्स्यपालन विभाग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) का कार्यान्वयन कर रहा है, जिसके अंतर्गत समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए ट्रॉल जालों में टर्टल एक्सक्ल्यूडर डिवाइस (टीईडी) की स्थापना, समुद्री पशुपालन (सी रैंचिंग) तथा मत्स्य भंडार बढ़ाने के लिए तटीय जल क्षेत्रों में कृत्रिम रीफ की स्थापना जैसी गतिविधियां पारंपरिक मछुआरों के आजीविका संबंधी हितों की सुरक्षा के लिए की जाती हैं। पीएमएमएसवाई के अंतर्गत गहरे समुद्र में मत्स्य पालन पोतों की खरीद, खुले समुद्र में केज कल्चर तथा समुद्री कृषि (मैरिकल्चर) को भी बढ़ावा दिया जाता है, जिसमें समुद्री शैवाल की खेती भी शामिल है, जिससे तटीय जल के निकटवर्ती क्षेत्रों में मत्स्य पालन के दबाव को कम किया जा सके।
(बी) आईसीएआर-सीएमएफआरआई ने सूचित किया है कि यह सांख्यिकीय रूप से मान्य, एफएओ द्वारा अनुशंसित वर्गीकृत बहु-स्तरीय यादृच्छिक नमूना डिजाइन का उपयोग करके समुद्री मत्स्य पालन और पारिस्थितिकी तंत्रों की दीर्घकालिक निगरानी करता है। आईसीएआर-सीएमएफआरआई भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा के साथ 1,300 से अधिक मछली अवतरण केंद्रों से फिश लैंडिंग और मत्स्यन प्रयासों पर उच्च गुणवत्ता वाले समय-श्रृंखला डेटा तैयार करता है, जिससे मछली भंडार की स्थिति का आकलन किया जा सके और पारिस्थितिकी तंत्र में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सके। इसके अलावा, संस्थान ने सूचित किया है कि यह समुद्री जैव विविधता, बेंथिक पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य, पोषी अंतःक्रियाओं और तलीय ट्रॉलिंग के प्रभावों पर राष्ट्रीय कार्यक्रमों को भी कार्यान्वित करता है।
यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2290879)
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