ग्रामीण विकास मंत्रालय
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डीडीयू-जीकेवाई के तहत बजट का आवंटन

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 6:29PM by PIB Delhi

 दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत आजीविका के विविधीकरण तथा गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य से संचालित प्रमुख पहलों में से एक है। डीडीयू-जीकेवाई का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना तथा नियोजन-संबद्ध कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उनके लिए सतत् आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है। डीडीयू-जीकेवाई के अंतर्गत गत पाँच वर्षों तथा चालू वर्ष के दौरान स्वीकृत/जारी की गई निधियों एवं किए गए व्यय का संचयी विवरण अनुबंध-I में दिया गया है।

डीडीयू-जीकेवाई के तहत, इसकी शुरुआत अर्थात 2014-15 से अभी तक कुल 18.45 लाख अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, 11.44 लाख अभ्यर्थियों को प्रमाणित किया गया है और 12.35 लाख अभ्यर्थियों को रोजगार प्रदान किया गया है।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार क्षमता को योजना की रूपरेखा के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है, जिसके अंतर्गत परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईए) को प्रशिक्षित और प्रमाणित लाभार्थियों में से कम से कम 70% के लिए 6 महीने का रोजगार सुनिश्चित करने के बाद ही स्वीकार्य निधि की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 में ट्रांसरुरल एग्री कंसल्टिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से एक प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन कराया गया है। मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार आय में वृद्धि के संकेतक से पता चलता है कि लाभार्थियों को तीन साल की अवधि में औसतन 30.79% की वेतन वृद्धि का अनुभव हुआ, जिसमें औसत वेतन ₹16,500 प्रति माह है।

डीडीयू-जीकेवाई में वंचित समूहों के लिए प्रशिक्षण और नियोजन के अवसरों तक न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करने हेतु अनिवार्य सामाजिक समावेशन के नियम शामिल हैं। इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि 50% अभ्यर्थी एससी/एसटी समुदायों से, 33% महिलाएँ और 3% दिव्यांगजन (पीडब्लूडी) होने चाहिए।

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास, उद्यमिता और सतत आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पहले की प्रोजेक्ट-मोड प्रणाली के स्थान पर बैच-मोड भुगतान का उपयोग करना, जिससे तेजी से और अधिक जवाबदेह तरीके से राशि का संवितरण संभव हो सके।
  • प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 6 महीने का रोजगार सुनिश्चित करने पर अधिक जोर दिया गया है, साथ ही नौकरी की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए 12 महीने तक ट्रैकिंग सहायता प्रदान की जाती है। पहले न्यूनतम 3 महीने का रोजगार अनिवार्य किया गया था।
  • ग्रामीण युवाओं में उद्यमशीलता की क्षमताओं को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यम विकास को प्रोत्साहित करने के लिए इस कार्यक्रम के दायरे का विस्तार करके इसमें स्वरोजगार और उभरती हुए गिग अर्थव्यवस्था के अवसरों को भी शामिल किया गया है।

पिछले 5 वर्षों और चालू वर्ष के दौरान डीडीयू-जीकेवाई के तहत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार जारी और उपयोग की गई निधि (संचयी):

(₹ करोड़ में)

क्र.सं.

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र

जारी निधि

उपयोग की गई निधि*

1

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

0.75

8.07

2

आंध्र प्रदेश

185.44

160.43

3

अरुणाचल प्रदेश

23.38

31.24

4

असम

133.53

296.38

5

बिहार

5.00

158.75

6

छत्तीसगढ़

37.74

129.99

7

गोवा

8.19

1.95

8

गुजरात

0.00

118.62

9

हरियाणा

35.37

118.20

10

हिमाचल प्रदेश

113.89

142.31

11

जम्मू और कश्मीर

33.98

72.08

12

झारखंड

118.16

229.14

13

कर्नाटक

28.09

54.29

14

केरल

13.95

123.73

15

मध्य प्रदेश

133.37

294.31

16

महाराष्ट्र

0.26

223.54

17

मणिपुर

21.37

52.17

18

मेघालय

59.50

66.83

19

मिजोरम

16.38

15.29

20

नागालैंड

27.03

60.99

21

ओडिशा

75.46

124.39

22

पुदुचेरी

11.35

14.47

23

पंजाब

79.87

191.71

24

राजस्थान

75.10

278.51

25

सिक्किम

19.54

23.56

26

तमिलनाडु

77.59

113.53

27

तेलंगाना

18.28

263.41

28

त्रिपुरा

17.15

49.40

29

उत्तर प्रदेश

0.00

446.86

30

उत्तराखंड

26.99

144.90

31

पश्चिम बंगाल

10.16

113.76

32

कुल

1,406.86

4,122.81

                     दिनांक 01.04.2021 को कई राज्यों में प्रारम्भिक एसएनए शेष था।

 

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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आर सी/ पीयू 


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