पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

अलंग-सोसिया में जहाज़ पुनर्चक्रण

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 4:44PM by PIB Delhi

वर्ष 2025 में भारत विश्व का अग्रणी जहाज पुनर्चक्रण (शिप रीसाइक्लिंग) राष्ट्र बन गया है। देश में वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण का 35.4% हिस्सा दर्ज किया गया है। गुजरात में 1982-83 में स्थापित अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड, भारत की 98% जहाज पुनर्चक्रण गतिविधियों का संचालन करता है। इस यार्ड में वर्तमान में 128 परिचालित प्लॉट हैं, जिनकी वार्षिक पुनर्चक्रण क्षमता 4.5 मिलियन एलडीटी है। स्थापना के बाद से अब तक अलंग यार्ड में 71 मिलियन से अधिक एलडीटी के कुल भार वाले 8,900 से अधिक जहाजों का पुनर्चक्रण किया जा चुका है।

अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड इस्पात और अन्य सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति एवं पुनः उपयोग के माध्यम से परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा देता है, जिससे संसाधनों का संरक्षण होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। यह लगभग 15,000 श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है तथा सहायक उद्योगों और संबद्ध सेवाओं के माध्यम से 1.5 लाख से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका उपलब्ध कराता है। इस प्रकार यह भारत के जहाज पुनर्चक्रण क्षेत्र की आधारशिला होने के साथ-साथ सतत और पर्यावरण-अनुकूल जहाज पुनर्चक्रण का वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र भी है।

अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड में श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण का एक व्यापक ढांचा स्थापित किया गया है। मार्च 2019 में एक बहु-विशेषता वाला अस्पताल शुरू किया गया, जिसे जनवरी 2025 में उन्नत कर 35 बिस्तरों वाले लेवल-III ट्रॉमा सेंटर में परिवर्तित किया गया। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा संचालित यह अस्पताल आईसीयू, एमआरआई, सीटी स्कैन, बर्न्स यूनिट तथा ऑपरेशन थिएटर सहित उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करता है। 43 स्वास्थ्यकर्मियों से सुसज्जित यह अस्पताल निःशुल्क चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराता है। जून 2026 तक 4.79 लाख से अधिक मरीजों ने यहाँ अपना उपचार कराया है। इसके अतिरिक्त, गुजरात के अलंग स्थित एक अन्य प्राथमिक अस्पताल के रखरखाव और संचालन के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

गुजरात मेरीटाइम बोर्ड (जीएमबी) द्वारा 2003 में स्थापित सुरक्षा एवं श्रमिक कल्याण संस्थान में 1.57 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जहाज पुनर्चक्रण यार्डों में श्रमिकों के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का उपयोग, अग्निशमन, आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी का कड़ाई से पालन कराया जाता है।

श्रमिक कल्याण के लिए, जीएमबी ने 1,008 व्यक्तियों के आवास की क्षमता वाली एक आवासीय कॉलोनी विकसित की है, जिसमें आवश्यक नागरिक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने अलंग-सोसिया पोत पुनर्चक्रण यार्ड द्वारा जून 2025 में लागू हुए हांगकांग कन्वेंशन, 2009 के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019, पोत पुनर्चक्रण नियम, 2021 और पोत पुनर्चक्रण विनियम, 2026 के माध्यम से एक व्यापक कानूनी ढांचा स्थापित किया है, जो घरेलू पोत पुनर्चक्रण प्रथाओं को हांगकांग कन्वेंशन की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है। पोत पुनर्चक्रण सुविधाओं के लिए अनुमोदित पोत पुनर्चक्रण सुविधा प्रबंधन योजनाओं को बनाए रखना और अनुमोदित पोत पुनर्चक्रण योजनाओं के माध्यम से पुनर्चक्रण संचालन को लागू करना आवश्यक है। अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, गुजरात मेरीटाइम बोर्ड ने निरीक्षण, प्रमाणन और अनुपालन सत्यापन के लिए मान्यता प्राप्त संगठनों को सूचीबद्ध किया है, साथ ही नियमित रूप से ऑडिट, सुरक्षा निगरानी और पर्यावरण अनुपालन जांच भी आयोजित की जाती है।

जीएमबी उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (टीएसडीएफ) के माध्यम से पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को बनाए रखता है, जिसमें खतरनाक और गैर-खतरनाक कचरे के लैंडफिल, अपशिष्ट उपचार सुविधाएं और भस्मीकरण सुविधाएं शामिल हैं।

जहाज पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए, फेरस स्क्रैप विकास निधि (एफएसडीएफ)  के तहत 53.5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्डों को जारी की गई है। इन सक्रिय उपायों के परिणामस्वरूप,  अलंग में 115 जहाज पुनर्चक्रण प्लॉट एचकेसी अनुपालन प्राप्त कर चुके हैं, जो सुरक्षित और पर्यावरण की दृष्टि से उपयुक्त जहाज पुनर्चक्रण में भारत की तत्परता और नेतृत्व को दर्शाता है।

गुजरात सरकार द्वारा अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड की क्षमता को चरणबद्ध विकास के माध्यम से 4.5 मिलियन एलटीडी से बढ़ाकर 9 मिलियन एलटीडी प्रति वर्ष करने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया गया है।

भारतीय जहाज पुनर्चक्रण उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने शिप ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत, जब किसी एचकेसी-अनुपालक भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्ड में जहाज का पुनर्चक्रण किया जाता है, तो जहाज मालिकों को पुनर्चक्रित जहाज के स्क्रैप मूल्य के 40% के बराबर क्रेडिट नोट प्राप्त होता है। इस क्रेडिट नोट का उपयोग भारतीय शिपयार्ड में निर्मित नए जहाज के अनुबंध मूल्य के 5% तक के भुगतान के लिए किया जा सकता है, जिससे घरेलू जहाज पुनर्चक्रण और जहाज निर्माण दोनों को बढ़ावा मिलता है।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने यूरोपीय अधिकारियों से संपर्क कर यूरोपीय संघ (ईयू) की स्वीकृत जहाज पुनर्चक्रण सुविधाओं की सूची में पात्र भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्डों को शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया है।

यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

***

पीके/केसी/जेएस/एसएस


(रिलीज़ आईडी: 2290644) आगंतुक पटल : 60
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu