सहकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सहकारी समितियों को बढ़ावा देना

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 5:27PM by PIB Delhi

सहकारिता मंत्रालय, अपने अधीन एक सांविधिक निगम, राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से उत्तराखंड सहित पहाड़ी राज्यों में सहकारी कृषि, बागवानी और संबद्ध उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए सहायता प्रदान कर रहा है। उत्तराखंड सहित पहाड़ी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान एनसीडीसी द्वारा संवितरित वित्तीय सहायता का राज्य-वार विवरण संलग्नक-I पर संलग्न है।

सेवा समर्थन तथा बाजार सहायता में सुधार करने के उद्देश्य से असम, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पूर्व से विद्यमान कार्यालयों के अतिरिक्त जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा नागालैंड सहित पहाड़ी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में एनसीडीसी के नए कार्यालयों की स्थापना की गई है ।

सहकारिता मंत्रालय ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और किफायती बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) की स्थापना की है । अब तक, बीबीएसएसएल ने इन राज्यों मेंभारत बीजब्रांड के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और विपणन का विस्तार करने के लिए अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं । उत्तराखंड में किसानों को 2,488 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और किफायती बीज उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे गुणवत्तायुक्त बीजों तक उनकी पहुंच में सुधार हुआ है।

पहाड़ी क्षेत्रों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सहकारी समितियों के वस्तु और सेवाओं के निर्यात हेतु अम्ब्रेला संगठन के रूप में राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) की स्थापना । अब तक, एनसीईएल ने पहाड़ी क्षेत्रों के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के लिए अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं ।
  • जैविक उत्पादों के प्रापण, एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण, परीक्षण, ब्रांडिंग और विपणन हेतु एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) की स्थापना । अब तक, एनसीओएल ने पहाड़ी क्षेत्रों के जैविक उत्पादों को बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एनसीओएल ने उत्तराखंड के जैविक प्रमाणित किसानों से लगभग 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूं, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती तथा गुड़, खांडसारी और ब्राउन शुगर सहित 30 मीट्रिक टन स्वीटनर्स उत्पादों का प्रापण किया है ।

बीबीएसएसएल , एनसीईएल और एनसीओएल की सदस्य सहकारी समितियों को गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और किफायती बीजों तक पहुंच; गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणीकरण में सहायता; राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच; उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्रतिफल; तथा उनकी शेयरधारिता पर लाभांश का लाभ प्राप्त होता है । बीबीएसएसएल, एनसीईएल और एनसीओएल में सदस्यता प्राप्त करने वाली सहकारी समितियों की राज्य-वार संख्या संलग्नक-II में दी गई है।

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संलग्नक-I

पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान पहाड़ी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को एनसीडीसी द्वारा संवितरित वित्तीय सहायता का राज्य-वार ब्योरा

क्रम सं.

राज्य का नाम

संवितरण राशि (करोड़ रुपये में)

1

अरुणाचल प्रदेश

1.24

2

असम

28.19

3

हिमाचल प्रदेश

40.15

4

जम्मू और कश्मीर

6.15

5

लद्दाख

0.88

6

मणिपुर

38.37

7

मेघालय

2.14

8

मिजोरम

11.87

9

नागालैंड

3.49

10

सिक्किम

1.96

11

त्रिपुरा

20.56

12

उत्तराखंड

287.95

 

कुल

422.95

 

संलग्नक-II

बीबीएसएसएल, एनसीईएल और एनसीओएल में सदस्यता प्राप्त करने वाली सहकारी समितियों की राज्य-वार संख्या

क्रम सं.

राज्य का नाम

 

बीबीएसएसएल

एनसीईएल

एनसीओएल

1

अरुणाचल प्रदेश

 

15

12

13

2

असम

 

94

18

1

3

हिमाचल प्रदेश

 

469

145

139

4

जम्मू और कश्मीर

 

176

30

10

5

लद्दाख

 

12

6

4

6

मणिपुर

 

48

44

43

7

मेघालय

 

3

0

0

8

मिजोरम

 

8

5

5

9

नागालैंड

 

6

0

1

10

सिक्किम

 

119

2

15

11

त्रिपुरा

 

165

114

105

12

उत्तराखंड

 

551

487

387

 

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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