पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रसेवा के दो दशकों की गौरवशाली यात्रा के साथ अपना 20वां स्थापना दिवस मनाया

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 10:40PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय(एमओईएस) ने आज नई दिल्ली स्थित पृथ्वी भवन में अपना ऐतिहासिक 20वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर पृथ्वी प्रणाली विज्ञान, मौसम पूर्वानुमान, समुद्र विज्ञान तथा ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में दो दशकों के अग्रणी योगदान का उत्सव मनाया गया। इस भव्य समारोह में देशभर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं तथा शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सचिव, डॉ. एन. कलाईसेल्वी के संबोधन की प्रमुख बातें

समारोह की अध्यक्षता पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने की। अपने प्रेरणादायी अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने मंत्रालय परिवार को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देश के लिए एक अपरिहार्य स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है और एक संपूर्ण वैल्यू चेन के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा, आप(मंत्रालय) पृथ्वी प्रणालियों के माध्यम से डेटा प्रदाता हैं, ‘मिशन मौसम’ के माध्यम से सेवा प्रदाता हैं और ‘डीप ओशन मिशन’ के माध्यम से प्रौद्योगिकी प्रदाता हैं।”

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत विभिन्न वैज्ञानिक निकायों के अद्वितीय एकीकरण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने 20 वर्ष पुराने मंत्रालय और उसके 150 से अधिक वर्षों के गौरवशाली इतिहास वाले घटक संस्थान भारत मौसम विज्ञान विभाग(आईएमडी) के बीच बेहतर तालमेल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह युवा ऊर्जा और अनुभव के आदर्श संगम का उत्कृष्ट उदाहरण है तथा बिना किसी पदानुक्रमिक बाधा के पूर्ण समर्पण और सामूहिक कार्यसंस्कृति को दर्शाता है।

डॉ. कलाईसेल्वी ने समारोह के विशिष्ट अतिथियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. ए. ई. मुथुनायगम और डॉ. चंद्रमौली गद्दामनुगु जैसे वरिष्ठ वैज्ञानिकों की गरिमामयी उपस्थिति, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जैसे दूरदर्शी वैज्ञानिकों की विरासत को समकालीन पृथ्वी विज्ञान से जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी का कार्य करती है।

विशिष्ट अतिथिगण एवं प्रतिभागी तथा उनके विचार

इस समारोह में निम्नलिखित विशिष्ट अतिथियों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई:

  • डॉ. ए. ई. मुथुनायगम (पद्मश्री से सम्मानित एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्ववर्ती महासागर विकास विभाग(डीओडी) के संस्थापक निदेशक/सचिव) ने जुलाई 1981 में प्रधानमंत्री के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में महासागर विकास विभाग की स्थापना के साथ भारत में महासागर अनुसंधान की शुरुआती दिनों की यादें साझा कीं। उन्होंने भारत के समुद्री और ध्रुवीय उपस्थिति के क्रमिक विस्तार का विवरण दिया—जैसे 1981 में गोवा से प्रथम अंटार्कटिक अभियान का शुभारंभ, दक्षिण गंगोत्री, मैत्री और भारती जैसे स्थायी अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान(एनआईओटी), राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं महासागर अनुसंधान केंद्र(एनसीएओआर, वर्तमान में एनसीपीओआर) तथा भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र(इन्कोइस) जैसे प्रमुख स्वायत्त संस्थानों की स्थापना, साथ ही महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण(ओटीईसी) एवं विलवणीकरण प्रौद्योगिकियों के विकास के माध्यम से ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति शामिल है।
  • डॉ. चंद्रमौली गद्दामनुगु (पद्मश्री से सम्मानित एवं प्रख्यात रक्षा वैज्ञानिक तथा आकाश मिसाइल विकास कार्यक्रम के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता) ने स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली के विकास के दौरान डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के मार्गदर्शन में बिताए अपने दशकों लंबे प्रेरणादायी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने रक्षा तैयारियों और पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के बीच समानताओं के बारे में बात करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज की आपदा-रोधी क्षमता को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी नवाचार, बहु-विषयक टीमों का समन्वित कार्य, संगठनात्मक अहंकार का पूर्ण परित्याग तथा प्रौद्योगिकियों का कठोर परीक्षण एवं सत्यापन अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर भारत मौसम विज्ञान विभाग(आईएमडी) के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री श्रीनिवास राव गंगी रेड्डी सहित मंत्रालय के स्वायत्त संस्थानों के विभिन्न निदेशक, वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

विमोचन एवं शुभारंभ

जनसेवा में सुधार लाने और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के अपने मिशन के अनुरूप, 20वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान देशभर में पूर्व चेतावनी प्रणालियों, आपदा प्रबंधन और मौसम-निगरानी एवं पूर्वानुमान क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए प्रमुख वैज्ञानिक रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर जारी की गईं और नई तकनीकी अनुप्रयोगों की शुरूआत की गई:

1. भारत मौसम विज्ञान विभाग(आईएमडी)

उत्कृष्टता केंद्र: देशभर में 13 विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इनमें जयपुर में मरुस्थलीय मौसम विज्ञान, देहरादून में पर्वतीय मौसम विज्ञान, पटना में आंधी-तूफान अनुसंधान तथा बेंगलुरु में कृषि-मौसम विज्ञान अनुसंधान जैसे विशेषीकृत केंद्र शामिल हैं।

उन्नयन: तिरुवनंतपुरम स्थित चक्रवात चेतावनी केंद्र का उन्नयन कर उसे क्षेत्रीय चक्रवात चेतावनी केंद्र बनाया जाएगा, जो केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप के लिए चक्रवात संबंधी चेतावनी सेवाएं प्रदान करेगा।

पशु रोग पूर्वानुमान: भारत मौसम विज्ञान विभाग(आईएमडी) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पशु रोग महामारी विज्ञान एवं सूचना विज्ञान संस्थान(ICAR-NIVEDI) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत मौसम आधारित पशु रोग जोखिम पूर्वानुमान इकाई की स्थापना की जाएगी, जो जिला स्तर पर पशुधन रोगों के जोखिम का दो महीने पहले तक पूर्वानुमान उपलब्ध कराएगी।

आईएमडी नोवा: बिजली गिरने नेटवर्क और स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आंधी-तूफान के तात्कालिक पूर्वानुमानों की निगरानी, सत्यापन और अभिलेखीकरण के लिए एक वेब प्लेटफॉर्म आईएमडी नोवा का शुभारंभ किया गया।

2. राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र(एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)

विंग्स मोबाइल एप्लिकेशन: एकीकृत मोबाइल प्लेटफॉर्म की शुरूआत की गई, जो संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग आधारित पूर्वानुमान तथा वास्तविक समय के मेसोस्केल विश्लेषण की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रीय डॉप्लर मौसम रडार परावर्तन मोज़ेक: मिशन मौसम के अंतर्गत विकसित इस निर्बाध, लगभग वास्तविक समय के दृश्यांकन उपकरण का शुभारंभ किया गया। यह संवहन प्रणालियों तथा गंभीर मौसम की घटनाओं की प्रभावी निगरानी में सहायक होगा।

एनसीएमआरडब्ल्यूएफ ओपन डेटा पोर्टल: पुनः डिज़ाइन किए गए इस पोर्टल में विस्तारित डेटा सेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें उप-मौसमी से मौसमी हिंदकास्ट, बहु-स्रोत एन्सेम्बल वर्षा विश्लेषण, तथा नेमोवार(NEMOVAR) का उपयोग करते हुए तैयार किए गए 10 वर्षों के परिचालन महासागरीय विश्लेषण शामिल हैं।

3. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र(एनसीएस)

मासिक भूकंप विज्ञान बुलेटिनों का संकलन(2023 एवं 2024): राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क से प्राप्त सत्यापित भूकंप सूची, भूकंपीय चरण संबंधी आंकड़ों तथा हाइपोसेंट्रल मापदंडों को समाहित करने वाले इस संकलन का प्रकाशन किया गया।

भारत का स्ट्रॉन्ग मोशन एटलस(2010–2020): 4.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों के प्रबल भू-कंपन अभिलेखों तथा एक्सेलरोग्राम का यह संकलन प्रकाशित किया गया। इसका उद्देश्य भूकंप अभियांत्रिकी तथा भूकंपीय जोखिम आकलन को सुदृढ़ आधार प्रदान करना है।

4. समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केन्द्र(सीएमएलआरई)

टैक्सोनॉमिक मैनुअल: पूर्वी अरब सागर के टिन्टिनिड सिलिएट्स की चित्रात्मक पहचान पुस्तिका का विमोचन किया गया, जिसमें 100 प्रजातियों का विवरण शामिल है। इसके साथ ही भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र के समुद्रपर्वत से संबद्ध जीव-जंतुओं पर आधारित प्रकाशन "भारत के ईईजेड में समुद्रपर्वत से जुड़े जीव(भाग-I: लक्षद्वीप सागर)" भी जारी किया गया, जिसमें 225 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

मानक संचालन प्रक्रियाएं(एसओपी): समुद्री जैविक नमूनों के संग्रहण, संरक्षण एवं प्रसंस्करण के लिए दिशा-निर्देशों से संबंधित दस्तावेज जारी किए गए। इनमें पारंपरिक वर्गिकी, आणविक वर्गीकरण तथा जीनोमिक्स आधारित वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करते हुए नमूनों के वैज्ञानिक अध्ययन और विश्लेषण की मानक प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।

5. राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र(एनसीसीआर)

सागर प्रहरी ऐप: कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) आधारित, नागरिक-केंद्रित मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया। यह ऐप समुद्र तटों की सफाई गतिविधियों का जियो-टैगिंग करने तथा समुद्री कचरे की स्वतः पहचान करने में सक्षम है।

सहव 2.0(SAHAV 2.0): समुद्री स्थानिक नियोजन के लिए विकसित उन्नत ओपन-सोर्स, जीआईएस आधारित निर्णय-सहायक मंच का शुभारंभ किया गया। इसमें भू-स्थानिक विश्लेषण तथा ओशन अकाउंटिंग मॉड्यूल जैसी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।

6. राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान(एनआईओटी)

अवसंरचना राष्ट्र को समर्पित: आंध्र प्रदेश के पामांजी में स्थित बैलास्ट जल उपचार परीक्षण सुविधा के लिए समुद्री पाइपलाइन ट्रेस्टल, नौका अवतरण सुविधा तथा समुद्री जल ग्रहण सुविधा का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही इंटरनेट ऑफ थिंग्स(IoT) आधारित तटवर्ती मौसम एवं महासागर वेधशाला भी राष्ट्र को समर्पित किया गया।

समुद्री मत्स्य पालन प्रदर्शन: अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के चिड़ियाटापू में खुले समुद्र में एशियाई सीबास के पिंजरा-आधारित मत्स्य पालन के लिए एचडीपीई ने 8 गोलाकार तैरते मत्स्य पिंजरों की स्थापना की है।

गहरे समुद्र में खनन जन-जागरूकता: मध्य हिंद महासागर बेसिन में बहुधात्विक पिंडों से युक्त 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के अन्वेषण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्योग जगत के साथ जन-जागरूकता एवं सहभागिता संबंधी पहल शुरू की गई।

ओशियन ओलंपियाड इंडिया 2026: स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में महासागर साक्षरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की बहु-चरणीय प्रतियोगिता "ओशन ओलंपियाड इंडिया 2026" की  शुरूआत की गई।

इस समारोह का समापन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के समूचे परिवार द्वारा इस नए-संकल्प के साथ हुआ कि वह वायुमंडलीय, महासागरीय, ध्रुवीय तथा हिममंडलीय अनुसंधान की सीमाओं का विस्तार करेंगे और वैज्ञानिक ज्ञान को राष्ट्रीय संपदा एवं सामाजिक सुरक्षा में रूपांतरित करेंगे।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001684H.jpeg

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0022KXS.jpeg

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0031VL2.jpeg

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image004BEPM.jpeg

***

पीके/केसी/पीकेपी


(रिलीज़ आईडी: 2290226) आगंतुक पटल : 168
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu