विधि एवं न्याय मंत्रालय
न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने के लिए सरकार ने ई-कोर्ट चरण III के तहत न्यायपालिका के डिजिटल परिवर्तन को गति दी
प्रविष्टि तिथि:
25 JUL 2026 8:51PM by PIB Delhi
विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों का निपटारा न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालाँकि, सरकार मामलों के तेज़ी से निपटारे और लंबित मामलों को कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने न्यायपालिका द्वारा मामलों के तेजी से निपटारे के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने हेतु कई पहल की हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा, 'ई-कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट' के तहत नवीनतम तकनीकों का समावेश, न्यायालयों के लिए बेहतर अवसरंचना तथा ज़्यादा मुकदमों वाले क्षेत्रों में नीतिगत और विधायी उपाय शामिल हैं।
इ-कोर्ट परियोजना के चरण-III (2023-2027) को 13.09.2023 को 7,210 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति दी गई थी। तीसरा चरण रिकॉर्ड के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण, ऑनलाइन सुनवाई के व्यापक उपयोग, संस्थानों के बीच अंतर-संचालनीयता और कृत्रिम मेधा (एआई), एनालिटिक्स एवं ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) सहित उभरती तकनीकों को अपनाने के माध्यम से डिजिटल और कागज़रहित अदालतों की ओर बढ़ने की परिकल्पना करता है। इ- कोर्ट के तीसरे चरण में हुई प्रगति की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
- 2,977 न्यायालय परिसरों को 10 एमबीपीएस से 100 एमबीपीएस तक की बैंडविड्थ गति से लैस किया गया है।
- इ-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से 1.21 करोड़ मामले दर्ज किए गए हैं।
- इ-पेमेंट्स प्रणाली ने 1,594 करोड़ रुपये मूल्य की कोर्ट-फीस और 97 करोड़ रुपये मूल्य के जुर्माने के लेनदेन की प्रक्रिया को पूरा किया है।
- IV. केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस) 4.0 को सभी अदालतों में लागू कर दिया गया है, जिसमें बेहतर गोपनीयता सुरक्षा उपाय शामिल हैं और इसे एनजेडीजी, इ-फाइलिंग, वर्चुअल कोर्ट और इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एकीकृत किया गया है।
- अदालतों (सीआईएस4.0) द्वारा सीसीटीएनएस से डिजिटल रूप से 35.57 लाख से अधिक एफआईआर और 38.36 लाख चार्जशीट प्राप्त की गई हैं।
- VI. ई-मेल के माध्यम से समन की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी के लिए इ-समन प्रणाली शुरू की गई है।
- नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के माध्यम से, मुकदमेबाज़ 32.46 करोड़ से अधिक मामलों और 39.79 करोड़ से अधिक आदेशों/निर्णयों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- अदालतों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 4.15 करोड़ से अधिक सुनवाइयाँ आयोजित की हैं, जिससे विचाराधीन कैदियों, गवाहों और वकीलों की आमने सामने आये बिना सुनवाई को आसान बनाया गया है।
- IX. अदालतों में पुराने रिकॉर्ड (विरासत अभिलेखों) सहित 734 करोड़ से अधिक पन्नों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।
- अदालती रिकॉर्ड को सुरक्षित और स्थायी रूप से संग्रहीत करने के लिए एक मजबूत डिजिटल कक्ष "ज्यूडिशियल डिजिटल ट्रस्टवर्दी रिपॉजिटरी" विकसित किया गया है।
- XI. 'जस्टआईएस' ऐप (22,534 डाउनलोड) न्यायाधीशों को अपने न्यायिक कार्यों को प्रभावी ढंग से व्यवस्थित और निगरानी करने में मदद करता है।
- ट्रैफिक चालानों के ऑनलाइन निपटारे के लिए 31 वर्चुअल कोर्ट स्थापित किए गए हैं।
- वकीलों और मुकदमेबाज़ों को नागरिक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान करने के लिए उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में 2,515 ई-सेवा केंद्र चालू हैं।
- न्यायाधीशों को कानूनी अनुसंधान और दस्तावेज़ विश्लेषण में सहायता के लिए लीगल रिसर्च एनालिसिस अस्सिटेंट (लिगरा) नामक एक एआई आधारित सॉफ़्टवेयर टूल विकसित किया गया है।
- 'एस3वास' प्लेटफ़ॉर्म 730 अदालतों की वेबसाइटों की मेज़बानी करता है, जो एक सुरक्षित और सुलभ वेब अवसंरचना सुनिश्चित करता है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति द्वारा अनुशंसित, पिछले तीन वर्षों के दौरान इ-कोर्ट परियोजना के तहत विभिन्न उच्च न्यायालयों को जारी किये गए धन का विवरण संलग्नक में दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रौद्योगिकी और न्यायिक सुधारों के माध्यम से न्यायिक देरी को कम करने और न्याय तक पहुँच में सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई कदम निम्नानुसार हैं:
- केंद्र प्रायोजित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (एफटीएससी) योजना के तहत, बलात्कार और 'पॉक्सो' अधिनियम के लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 398 एक्सक्लूसिव पॉक्सो (इ पॉक्सो) न्यायालयों सहित 775 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्यरत हैं, जिन्होंने सामूहिक रूप से 3,87,481 मामलों का निपटारा किया है।
- 5 साल से अधिक समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए सभी 25 उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में ‘एरियर समितियाँ’ गठित की गई हैं।
- सरकार ने लंबित मामलों को कम करने के उद्देश्य से नए आपराधिक कानून 2023, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) अधिनियम, 2018, वाणिज्यिक न्यायालय (संशोधन) अधिनियम, 2018 और विशिष्ट सहायता (संशोधन) अधिनियम, 2018 भी लागू किए हैं।
- IV. सरकार द्वारा वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया गया है।
- लोक अदालत आम लोगों के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है, जहाँ अदालत में लंबित या मुकदमेबाज़ी से पहले के स्तर के विवादों/मामलों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाया या समझौता कराया जाता है।
संलग्नक'
(राशि रुपये करोड़ में)
|
क्रम संख्या.
|
उच्च
न्यायालय
|
वित्तीय वर्ष
2023-24
|
वित्तीय वर्ष
2024-25
|
वित्तीय वर्ष
2025-26
|
कुल
|
| |
|
जारी की गई
राशि
|
खर्च री की गई
राशि
|
जारी की गई
राशि
|
खर्च री की गई
राशि
|
जारी की गई
राशि
|
खर्च री की गई
राशि
|
जारी की
गई कुल
राशि
|
कुल
खर्च
|
|
1
|
इलाहाबाद
|
96.08
|
95.87
|
79.26
|
51.78
|
119.92
|
115.9
|
295.26
|
263.55
|
|
2
|
आंध्र
प्रदेश
|
45.28
|
25.44
|
35.1
|
31.74
|
18
|
17.8
|
98.38
|
74.98
|
|
3
|
बॉम्बे
|
69.54
|
69.54
|
145.8
|
83.19
|
104.32
|
79.12
|
319.66
|
231.85
|
|
4
|
कलकत्ता
|
29.15
|
16.73
|
41.9
|
27.65
|
9.5
|
7.96
|
80.55
|
52.34
|
|
5
|
छत्तीसगढ
|
20.22
|
16.27
|
32.57
|
24.17
|
49.74
|
49.23
|
102.53
|
89.67
|
|
6
|
दिल्ली
|
18.89
|
17.89
|
52.51
|
48.19
|
17.9
|
9.25
|
89.3
|
75.33
|
|
7
|
गुवाहाटी
(अरुणाचल प्रदेश)
|
2.32
|
2.03
|
10.39
|
9.76
|
2.26
|
2
|
14.97
|
13.79
|
|
8
|
गुवाहाटी
(असम)
|
25.5
|
24.97
|
34.69
|
33.85
|
3.65
|
3.64
|
63.84
|
62.46
|
|
9
|
गुवाहाटी
(मिजोरम)
|
3.5
|
3.12
|
9.98
|
6.22
|
2.48
|
2.05
|
15.96
|
11.39
|
|
10
|
गुवाहाटी
कोहिमा (नागालैंड)
|
1.8
|
1.79
|
3.93
|
3.91
|
3.41
|
3.04
|
9.14
|
8.74
|
|
11
|
गुजरात
|
27.72
|
27.72
|
74.99
|
73.21
|
48.89
|
38.08
|
151.6
|
139.01
|
|
12
|
हिमाचल
प्रदेश
|
6.13
|
6.06
|
6.9
|
6.89
|
7.63
|
6.86
|
20.66
|
19.81
|
|
13
|
जे एंड के
|
15.37
|
6.52
|
21.98
|
14.53
|
14.48
|
13.33
|
51.83
|
34.38
|
|
14
|
झारखंड
|
12.47
|
10.59
|
37.4
|
29.22
|
7.65
|
4.92
|
57.52
|
44.73
|
|
15
|
कर्नाटक
|
35.86
|
32.37
|
67.65
|
67.4
|
48.22
|
26.08
|
151.73
|
125.85
|
|
16
|
केरल
|
15.63
|
15.4
|
42.49
|
32.62
|
51.6
|
13.28
|
109.72
|
61.3
|
|
17
|
मध्य
प्रदेश
|
23.36
|
22.9
|
79.54
|
77.31
|
59.14
|
46.07
|
162.04
|
146.28
|
|
18
|
मद्रास
|
90.69
|
90.69
|
91.75
|
91.75
|
113.2
|
67.8
|
295.64
|
250.24
|
|
19
|
मणिपुर
|
11.21
|
11.12
|
7.68
|
7.54
|
2.16
|
2.02
|
21.05
|
20.68
|
|
20
|
मेघालय
|
3.44
|
3.33
|
10.83
|
8.5
|
3.83
|
3.61
|
18.1
|
15.44
|
|
21
|
उड़ीसा
|
9.79
|
6.77
|
58.48
|
53.24
|
16.09
|
14.12
|
84.36
|
74.13
|
|
22
|
पटना
|
32.89
|
32.43
|
119.16
|
89.55
|
57.61
|
2.47
|
209.66
|
124.45
|
|
23
|
पंजाब और हरियाणा
|
14.93
|
14.58
|
26.13
|
26.01
|
18.95
|
18.77
|
60.01
|
59.36
|
|
24
|
राजस्थान
|
25.12
|
19.8
|
63.69
|
34.72
|
60.88
|
46.56
|
149.69
|
101.08
|
|
25
|
सिक्किम
|
2.1
|
1.71
|
10.11
|
8.98
|
2.51
|
2.44
|
14.72
|
13.13
|
|
26
|
तेलंगाना
|
22.79
|
22.03
|
34.83
|
28.57
|
29.44
|
12.42
|
87.06
|
63.02
|
|
27
|
त्रिपुरा
|
3.38
|
0.53
|
8.21
|
7.05
|
8.79
|
2.46
|
20.38
|
10.04
|
|
28
|
उत्तराखंड
|
13.68
|
13.68
|
19.95
|
19.95
|
29.57
|
29.57
|
63.2
|
63.2
|
|
|
कुल
|
678.86
|
611.88
|
1227.91
|
997.49
|
911.82
|
640.85
|
2818.59
|
2250.22
|
यह जानकारी केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीके/केसी/एसक
(रिलीज़ आईडी: 2289517)
आगंतुक पटल : 84