पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
संसदीय प्रश्न: लाइफ (LiFE) आंदोलन की प्रगति
प्रविष्टि तिथि:
23 JUL 2026 4:22PM by PIB Delhi
मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) एक जन-आंदोलन है, जिसका उद्देश्य संपूर्ण-सरकार तथा संपूर्ण-समाज दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यक्तियों एवं समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह सात प्रमुख विषयों—ऊर्जा की बचत, जल की बचत, अपशिष्ट में कमी, ई-अपशिष्ट में कमी, एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग से बचना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना तथा चिरस्थायी खाद्य प्रणालियाँ अपनाना—पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य नागरिकों में ऐसा व्यवहारगत परिवर्तन लाना है, जिससे वे प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाएँ। अक्टूबर, 2022 में मिशन लाइफ के शुभारंभ के बाद से इसके अंतर्गत की गई प्रमुख गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं:
- मिशन लाइफ के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न हितधारकों द्वारा राष्ट्रव्यापी जन-भागीदारी अभियान चलाए गए हैं। इनमें वन नेशन वन मिशन: एंड प्लास्टिक पॉल्यूशन, हरित योग, स्वच्छता ही सेवा, विश्व पर्यावरण दिवस अभियान, आइडियाज़4लाइफ, ई-अपशिष्ट जागरूकता अभियान तथा मायगव और मायभारत पोर्टलों के माध्यम से संचालित अन्य जन-जागरूकता पहलें शामिल हैं। मिशन लाइफ को भारत पर्व, इंडिया वॉटर वीक, महाकुंभ मेला आदि प्रमुख राष्ट्रीय आयोजनों में संवादपूर्ण डिजिटल प्रदर्शनों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। प्रमुख पहल ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अंतर्गत अब तक 272 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
- पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (एनडीसी) के गुणात्मक लक्ष्यों में ‘लाइफ–पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ को शामिल किया गया है।
- मंत्रालय के पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता विकास एवं आजीविका कार्यक्रम (ईआईएसीपी) केंद्र मिशन लाइफ के विषयों पर जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसके अतिरिक्त, मिशन लाइफ के अंतर्गत 12 लाख से अधिक इको-क्लब विद्यालयों में बच्चों एवं युवाओं के बीच सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
- मंत्रालय द्वारा दो समर्पित डिजिटल मंच प्रारंभ किए गए हैं—मिशन लाइफ पोर्टल, जो ज्ञान भंडार (नॉलेज रिपॉजिटरी) के रूप में कार्य करता है, तथा ‘मेरी लाइफ’ पोर्टल, जिसके माध्यम से लाइफ से संबंधित आयोजनों एवं गतिविधियों की संरचित रिपोर्टिंग तथा निगरानी की जाती है। अब तक देशभर में 40 लाख से अधिक लाइफ आयोजनों में 7.3 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया है। इनमें महाराष्ट्र राज्य में आयोजित 2 लाख से अधिक लाइफ संबंधी जागरूकता एवं जन-भागीदारी कार्यक्रमों में 31,49,967 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
- भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
- 1 मार्च 2024 को नैरोबी में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए-6) के छठे सत्र में भारत द्वारा प्रस्तुत “प्रमोटिंग सस्टेनेबल लाइफस्टाइल्स” संबंधी प्रस्ताव, जिसे श्रीलंका एवं बोलीविया ने सह-प्रायोजित किया था, सर्वसम्मति से अपनाया गया।
- 30 जुलाई 2025 को जिम्बाब्वे में आयोजित रामसर कन्वेंशन के पक्षकारों के 15वें सम्मेलन (सीओपी-15) में भारत द्वारा प्रस्तुत “प्रमोटिंग सस्टेनेबल लाइफस्टाइल्स फॉर द वाइज़ यूज़ ऑफ़ वेटलैंड्स” संबंधी प्रस्ताव को अपनाया गया।
- भारत को सतत् उपभोग एवं उत्पादन प्रतिरूपों पर 10-वर्षीय कार्यक्रम रूपरेखा (10वाईएफपी) के बोर्ड में लगातार दो कार्यकालों (2024–26 तथा 2026–28) के लिए निर्वाचित किया गया है और वर्तमान में भारत इसके सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहा है, जिससे सतत् जीवनशैली के वैश्विक एजेंडा को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
मिशन लाइफ को शर्म अल-शेख कार्यान्वयन योजना (सीओपी-27), जी-20 नई दिल्ली नेताओं की घोषणा आदि वैश्विक मंचों पर मान्यता प्राप्त हुई है।
भारत पेरिस समझौते के अंतर्गत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (एनडीसी) के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को प्रस्तुत भारत की प्रथम द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट (बीटीआर-1) के अनुसार, वर्ष 2005 की तुलना में वर्ष 2022 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वर्ष 2005 से 2022 के बीच वन एवं वृक्ष आवरण ने 2.44 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक निर्मित किया। भारत ने वर्ष 2030 के लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले ही अपनी संचयी स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर लिया। प्रमुख पहलों में पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, राष्ट्रीय परमाणु मिशन तथा कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस) कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जलवायु वित्त जुटाने तथा निम्न-कार्बन विकास को गति देने के लिए संप्रभु हरित बॉन्ड (सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड) और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना प्रारंभ की गई है। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य-योजना (एनएपीसीसी) तथा राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य-योजनाओं (एसएपीसीसी) के माध्यम से जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ किया जा रहा है।
उपरोक्त पहलें स्वच्छ विकास, ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा जलवायु सहनशीलता को बढ़ावा देती हैं और भारत के विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में किए जा रहे बदलावों का समर्थन करती हैं। इस प्रकार, ये पहलें विकसित भारत @2047 के विज़न तथा वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं।
यह जानकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री, श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रदान की।
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पीके/केसी/पीके/एसएस
(राज्यसभा अतारांकित प्रश्न 544)
(रिलीज़ आईडी: 2288582)
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