अणु ऊर्जा विभाग
संसदीय प्रश्न: यूरेनियम खनन का स्वास्थ्य पर असर
प्रविष्टि तिथि:
23 JUL 2026 3:59PM by PIB Delhi
भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (बीएआरसी) की हेल्थ फिजिक्स यूनिट (एचपीयू) यूरेनियम खनन के असर का पता लगाने हेतु खनन केन्द्रों के आस-पास नियमित रूप से पर्यावरण की निगरानी करती है। यूसीआईएल अपनी खनन एवं प्रसंस्करण संबंधी गतिविधियां एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) की निगरानी में करती है और इसमें एईआरबी, खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) समय-समय पर निरीक्षण व समीक्षा करते हैं। कार्यस्थलों और आस-पास के पर्यावरण की रेडियोलॉजिकल निगरानी काम शुरू होने के समय से ही लगातार की जा रही है। निगरानी के परिणामों से निरंतर यह पता चलता है कि कामगारों और आम लोगों को होने वाला विकिरण संबंधी प्रभाव (रेडिएशन एक्सपोजर) एईआरबी द्वारा निर्धारित की गई सीमा के अंदर ही रहता है। हाल ही में, यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (यूसीआईएल) ने झारखंड में अपने प्रतिष्ठानों के आस-पास के गांवों में एक स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में कई गांवों को शामिल किया गया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की चिकित्सीय जांच की गई। ग्रामीणों में पायी गई स्वास्थ्य समस्याएं आम थीं और ये समस्याएं वैसी ही थीं जैसी आमतौर पर समान सामाजिक-आर्थिक स्थितियों वाले ग्रामीण इलाकों में पाई जाती हैं। पिछले सभी अध्ययनों का मुख्य निष्कर्ष यह था कि यूरेनियम खनन स्थलों के आस-पास होने वाली बीमारियों के पैटर्न को विकिरण संबंधी प्रभाव (रेडिएशन एक्सपोजर) से नहीं जोड़ा जा सकता।
यूसीआईएल, हेल्थ फिजिक्स यूनिट (बीएआरसी) और दूसरी नियामक एजेंसियों के साथ मिलकर झारखंड में यूरेनियम खनन वाले इलाकों और उनके आस-पास के लोगों की सेहत की निगरानी, पर्यावरण की निगरानी और स्थानीय समुदाय के कल्याण हेतु दीर्घकालिक उपाय लागू कर रहा है। एईआरबी द्वारा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने हेतु कार्यस्थल पर विकिरण, पर्यावरण के नमूने (हवा, पानी, मिट्टी और भोजन) और काम के दौरान विकिरण के संपर्क में आने की नियमित निगरानी की जाती है। समय-समय पर कामगारों की सेहत की निगरानी और स्वाथ्य जांच की जाती है। साथ ही, आस-पास के गांवों के लिए स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम भी समय-समय पर चलाए जाते हैं।
यूसीआईएल अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के तहत स्थानीय समुदायों के लिए सुरक्षित पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, साफ-सफाई, शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के विकास जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं भी चलाता है। इसके अलावा, लोगों में जागरूकता बढ़ाने हेतु समय-समय पर विकिरण सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें ग्रामीण, ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, मीडियाकर्मी, स्कूल के शिक्षक, छात्र और यूसीआईएल व हेल्थ फिजिक्स यूनिट (बीएआरसी) के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं।
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2288545)
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